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UP Travel Guide : सूफी संत टक्करी बाबा की मजार पर माथा टेकने से दूर होते हैं कष्ट
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UP Travel Guide : सूफी संत टक्करी बाबा की मजार पर माथा टेकने से दूर होते हैं कष्ट

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह, हेमवती नंदन बहुगुणा और पहलवान दारा सिंह यहां कर चुके हैं जियारत
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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

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Updated: 24 Sep 2019, 6:52 PM IST

सीतापुर. बिसवां के टक्करी बाबा की मजार हिन्दू-मुस्लिम एकता की जीती-जागती मिसाल है। हिंदू हों या मुसलमान सभी इस दर पर खाली झोलियां लेकर आते हैं और बाबा के आशीर्वाद से झोली भरकर ही जाते हैं। महान सूफी संत शैखुल औलिया हजरत गुलजार उर्फ टक्करी बाबा की मजार पर हर साल उर्स का विशाल मेला लगता है। मेले में भारत के कोने-कोने से लोग यहां आकर अकीदत के फूल चढ़ाते हैं और मन्नतें मांगते हैं। बाबा के दर लोग खाली मुरादों की झोलियां लेकर आते हैं और बाबा के दरगाह से झोली भरकर ही जाते हैं। अपनी अलग पहचान रखने वाले इस मेले में प्यार, मोहब्बत, मेल-मिलाप और भाईचारे का दिलचस्प नजारा देखने को मिलता है।