
नगर निगम की समिति 15 दिन में सौंपेगी रिपोर्ट; GIS सर्वे में बढ़ाए गए गृहकर पर उठे सवाल, जलकर की गणना में भी बदलाव के संकेत (फोटो सोर्स : Whatsapp News Group )
House Tax Freeze Brings Major Relief: शहर के करीब दो लाख भवन स्वामियों को राहत देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल की दिशा में कदम बढ़ते नज़र आ रहे हैं। नगर निगम द्वारा बढ़े हुए गृहकर (House Tax) पर रोक लगाने के फैसले से अब जलकर (Water Tax) में भी सीधे लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि जलकर की गणना गृहकर की एआरवी (Annual Rental Value- वार्षिक किराया मूल्य) के आधार पर की जाती है। बढ़े हुए गृहकर और समय पर टैक्स भरने वालों को भी भेजे जा रहे बकाया बिलों की शिकायतों को देखते हुए नगर निगम ने पूरे मामले की गहन जांच के लिए एक समिति गठित की है, जो 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
शहर में अभी भी व्यापक रूप से वाटर मीटर नहीं लगाए गए हैं। न ही जल उपभोग के आधार पर पानी का बिल तय किया जाता है। ऐसे में नगर निगम जलकर की गणना भवन की एआरवी के आधार पर करता है। गणना इस प्रकार होती है,हाउस टैक्स की एआरवी तय होती है। इसी एआरवी पर जलकल विभाग 15.5% दर से जलकर + सीवर कर वसूलता है।
पिछले कई महीनों से बड़ी संख्या में भवन स्वामी यह शिकायत कर रहे थे कि वे नियमित रूप से गृहकर जमा कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके खातों में
इसका मुख्य कारण बताया गया कि जीआईएस सर्वे के आधार पर नगर निगम ने गृहकर को 2010 और 2014 से पुनरीक्षित करते हुए बढ़ा दिया, जिससे कई भवन स्वामियों पर अचानक भारी वित्तीय बोझ पड़ गया। लोगों का कहना था कि अगर गृहकर बढ़ाना था, तो उस समय बढ़ा देते। कई वर्षों बाद अचानक बढ़ाकर बकाया के रूप में थोपना अनुचित है।
नगर निगम ने भवन स्वामियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बड़ा निर्णय लिया, साल 2022 से पहले बढ़ाए गए गृहकर लागू नहीं होंगे। इस रोक का सबसे बड़ा असर यह है कि पहले की एआरवी पुनरीक्षित नहीं होगी। जलकर भी पुरानी एआरवी पर ही गणना किया जाएगा। समय से टैक्स भरने वालों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा ;करीब दो लाख भवन स्वामियों को इस निर्णय से राहत मिलने की उम्मीद है।
महापौर के निर्देश पर गठित समिति निम्न बिंदुओं पर परीक्षण करेगी:
नियमित रूप से गृहकर भरने वाले कई नागरिकों का कहना है कि उनके घर का गृहकर अचानक कई गुना बढ़ा दिया गया। बकाया बिल भेजकर उन्हें भुगतान के दबाव में डाला गया। जलकर भी स्वतः बढ़ गया, जिससे कुल भार दोगुना हो गया। एक निवासी ने बताया कि हम समय से गृहकर भरते रहे, फिर भी हमें 2010 से बकाया दिखा दिया गया। यह कैसे संभव है? लोगों पर दोहरी मार पड़ रही है, गृहकर भी बढ़ा और जलकर भी।
.जीआईएस सर्वे में कई गड़बड़ियां
सर्वे में कई भवनों का क्षेत्रफल गलत दर्ज हुआ। इससे एआरवी भी गलत निकाली गई।
.पुराने वर्षों से पुनरीक्षण
2010 और 2014 से टैक्स संशोधन ने अचानक भार बढ़ा दिया।
.वाटर मीटर न होने से जलकर भी एआरवी आधारित
पानी का उपयोग जितना है, उतना भुगतान की व्यवस्था अभी लागू नहीं। हालांकि यह जरूरी है।
.नए क्षेत्रों के शामिल होने पर स्पष्ट नियम नहीं
नगर निगम सीमा बढ़ने के बाद कई भवनों पर गृहकर की प्रारंभिक तिथि को लेकर विवाद है।
संभावित बदलाव:
Published on:
17 Nov 2025 09:42 pm
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