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House Tax: गृहकर बढ़ोतरी पर रोक से दो लाख भवनस्वामियों को राहत, जलकर भी घटेगा; समिति करेगी पूरी जांच

House Tax Relief: गृहकर बढ़ोतरी पर रोक लगने से अब जलकर में भी राहत मिलने का रास्ता साफ हो गया है। जीआईएस सर्वे से बढ़ाए गए गृहकर और बकाया बिलों की शिकायतों की जांच के लिए नगर निगम ने समिति बनाई है, जो 15 दिन में रिपोर्ट देगी। इससे करीब दो लाख भवन स्वामियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Nov 17, 2025

नगर निगम की समिति 15 दिन में सौंपेगी रिपोर्ट; GIS सर्वे में बढ़ाए गए गृहकर पर उठे सवाल, जलकर की गणना में भी बदलाव के संकेत (फोटो सोर्स : Whatsapp News Group )

नगर निगम की समिति 15 दिन में सौंपेगी रिपोर्ट; GIS सर्वे में बढ़ाए गए गृहकर पर उठे सवाल, जलकर की गणना में भी बदलाव के संकेत (फोटो सोर्स : Whatsapp News Group )

House Tax Freeze Brings Major Relief: शहर के करीब दो लाख भवन स्वामियों को राहत देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल की दिशा में कदम बढ़ते नज़र आ रहे हैं। नगर निगम द्वारा बढ़े हुए गृहकर (House Tax) पर रोक लगाने के फैसले से अब जलकर (Water Tax) में भी सीधे लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि जलकर की गणना गृहकर की एआरवी (Annual Rental Value- वार्षिक किराया मूल्य) के आधार पर की जाती है। बढ़े हुए गृहकर और समय पर टैक्स भरने वालों को भी भेजे जा रहे बकाया बिलों की शिकायतों को देखते हुए नगर निगम ने पूरे मामले की गहन जांच के लिए एक समिति गठित की है, जो 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

गृहकर बढ़ने पर क्यों बढ़ रहा था जलकर

शहर में अभी भी व्यापक रूप से वाटर मीटर नहीं लगाए गए हैं। न ही जल उपभोग के आधार पर पानी का बिल तय किया जाता है। ऐसे में नगर निगम जलकर की गणना भवन की एआरवी के आधार पर करता है। गणना इस प्रकार होती है,हाउस टैक्स की एआरवी तय होती है। इसी एआरवी पर जलकल विभाग 15.5% दर से जलकर + सीवर कर वसूलता है।

यानी

  • गृहकर बढ़ा → एआरवी बढ़ी → जलकर भी बढ़ गयागृहकर कम हुआ → एआरवी कम → जलकर भी कम
  • गृहकर में लगी रोक का सीधा लाभ अब जलकर की राशि में भी दिखाई देगा।

समय पर टैक्स भरने वालों को भी भेजे गए बकाया बिल

पिछले कई महीनों से बड़ी संख्या में भवन स्वामी यह शिकायत कर रहे थे कि वे नियमित रूप से गृहकर जमा कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके खातों में

  • बकाया गृहकर
  • कई गुना बढ़े टैक्स
  • पुराने वर्षों से पुनरीक्षित मूल्य
  • जैसे बिल भेजे जा रहे हैं।

इसका मुख्य कारण बताया गया कि जीआईएस सर्वे के आधार पर नगर निगम ने गृहकर को 2010 और 2014 से पुनरीक्षित करते हुए बढ़ा दिया, जिससे कई भवन स्वामियों पर अचानक भारी वित्तीय बोझ पड़ गया। लोगों का कहना था कि अगर गृहकर बढ़ाना था, तो उस समय बढ़ा देते। कई वर्षों बाद अचानक बढ़ाकर बकाया के रूप में थोपना अनुचित है।

साल 2022 से पहले बढ़े गृहकर पर लगी रोक

नगर निगम ने भवन स्वामियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बड़ा निर्णय लिया, साल 2022 से पहले बढ़ाए गए गृहकर लागू नहीं होंगे। इस रोक का सबसे बड़ा असर यह है कि पहले की एआरवी पुनरीक्षित नहीं होगी। जलकर भी पुरानी एआरवी पर ही गणना किया जाएगा। समय से टैक्स भरने वालों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा ;करीब दो लाख भवन स्वामियों को इस निर्णय से राहत मिलने की उम्मीद है।

समिति करेगी पूरे मामले का परीक्षण- 15 दिन में रिपोर्ट

महापौर के निर्देश पर गठित समिति निम्न बिंदुओं पर परीक्षण करेगी:

  • 2022 से पहले बढ़ाए गए गृहकर पर रोक को लागू करने की स्पष्ट शर्तें।
  • जीआईएस सर्वे के बाद आवासीय और व्यावसायिक भवनों के लिए गृहकर निर्धारण की अंतिम तिथि।
  • बकाया कर पर ब्याज लगेगा या नहीं, इसकी स्पष्ट नीति।
  • अपार्टमेंट को लेकर गृहकर निर्धारण के नए नियम।
  • नगर निगम सीमा में शामिल किए गए नए विस्तारित इलाकों में गृहकर कब से लागू होगा।
  • बढ़े हुए गृहकर का जलकर गणना पर सीधा प्रभाव और उसका संशोधित ढांचा।
  • समिति के एक सदस्य ने कहा कि जब नियम स्पष्ट होंगे, तो न निगम अधिकारियों को दुविधा होगी, न भवन स्वामी परेशान होंगे।

भवन स्वामी क्यों परेशान? सुनिए शिकायतें

नियमित रूप से गृहकर भरने वाले कई नागरिकों का कहना है कि उनके घर का गृहकर अचानक कई गुना बढ़ा दिया गया। बकाया बिल भेजकर उन्हें भुगतान के दबाव में डाला गया। जलकर भी स्वतः बढ़ गया, जिससे कुल भार दोगुना हो गया। एक निवासी ने बताया कि हम समय से गृहकर भरते रहे, फिर भी हमें 2010 से बकाया दिखा दिया गया। यह कैसे संभव है? लोगों पर दोहरी मार पड़ रही है, गृहकर भी बढ़ा और जलकर भी।

गृहकर और जलकर विवाद शहर की बड़ी समस्या क्यों बन रहा है?

.जीआईएस सर्वे में कई गड़बड़ियां
सर्वे में कई भवनों का क्षेत्रफल गलत दर्ज हुआ। इससे एआरवी भी गलत निकाली गई।

.पुराने वर्षों से पुनरीक्षण
2010 और 2014 से टैक्स संशोधन ने अचानक भार बढ़ा दिया।

.वाटर मीटर न होने से जलकर भी एआरवी आधारित
पानी का उपयोग जितना है, उतना भुगतान की व्यवस्था अभी लागू नहीं। हालांकि यह जरूरी है।

.नए क्षेत्रों के शामिल होने पर स्पष्ट नियम नहीं
नगर निगम सीमा बढ़ने के बाद कई भवनों पर गृहकर की प्रारंभिक तिथि को लेकर विवाद है।

समिति किन बड़े सुधारों की सिफारिश कर सकती है

संभावित बदलाव:

  • 2010 और 2014 के पुनरीक्षित गृहकर को रद्द या संशोधित करना।
  • जीआईएस सर्वे के आंकड़ों की पुनः: जांच।
  • जलकर की गणना में संशोधन या नई प्रणाली।
  • वाटर मीटर स्थापना की विस्तृत योजना।
  • अपार्टमेंट और व्यावसायिक भवनों के लिए अलग-अलग गृहकर पॉलिसी।