
lucknow Coaching Center Fire: लखनऊ के अलीगंज में 22 जून 2026 को हुए दर्दनाक अग्निकांड के मामले में पुलिस और प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। इस हादसे को लेकर पुलिस ने नामजद आरोपियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामले में अब तक चार प्रमुख आरोपियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है।
जॉइंट सीपी बबलू कुमार ने बताया कि बिल्डिंग मालिक समेत चार लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है। इनमें इमारत के मालिक के साथ वहां संचालित प्रतिष्ठानों के मालिक भी शामिल हैं। सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें जेल भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी नए तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में सोमवार को लगी भीषण आग ने कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर को मौत के जाल में बदल दिया। जिस इमारत में छात्र अपने भविष्य के सपने लेकर पहुंचे थे, वहीं अचानक अफरातफरी, चीख-पुकार और जान बचाने की जद्दोजहद शुरू हो गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कई छात्रों को तीसरी मंजिल से तार और पाइप के सहारे नीचे उतरने की कोशिश करनी पड़ी, जबकि कुछ ने सीधे छलांग लगा दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद मामूली आग लगी है, लेकिन देखते ही देखते धुएं ने ऊपरी मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया। सीढ़ियां धुएं से भर गईं और बाहर निकलने का रास्ता लगभग बंद हो गया। अंदर फंसे छात्र खिड़कियों और शीशों तक पहुंचने लगे। कई युवाओं ने हिम्मत दिखाते हुए शीशे तोड़े ताकि ताजी हवा मिल सके और बाहर निकलने का कोई रास्ता बन सके।
अंदर फंसे छात्रों के लिए हर एक सेकंड भारी पड़ रहा था। इस हादसे में जान गंवाने वाले एक युवक के परिजन ने रुंधे गले से बताया कि कोचिंग सेंटर पूरी तरह हाई-टेक था। बिना बायोमेट्रिक के कोई अंदर-बाहर नहीं आ सकता था। लेकिन जैसे ही आग लगी, बिल्डिंग की बिजली कट गई। बिजली कटते ही बायोमेट्रिक और ऑटोमैटिक सिस्टम पूरी तरह ठप हो गए।
निकलने का कोई दूसरा रास्ता (इमरजेंसी एग्जिट) नहीं था। छात्र जान बचाने के लिए छत की तरफ भागे, लेकिन बदकिस्मती से छत का दरवाजा भी बंद था। देखते ही देखते पूरी मंजिल दम घोंटू काले धुएं के गुबार से भर गई।
जब चारों तरफ सिर्फ धुआं था और सांस लेना नामुमकिन हो गया, तब छात्रों ने हिम्मत दिखाई। कुछ युवकों ने खिड़कियों के शीशे तोड़ डाले। बाहर से गुजर रहे बिजली के तारों और एसी के पाइपों को पकड़कर छात्र तीसरी मंजिल से नीचे लटकने लगे।
इस खौफनाक मंजर को झेल चुकीं छात्रा लवप्रीत इस समय KGMU ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं। पैर की टूटी हड्डी और आंखों में खौफ लिए लवप्रीत ने बताया कि चारों तरफ इतना धुआं था कि दम घुटने लगा। कोई रास्ता नहीं बचा था। मैंने खिड़की से बाहर लटक रहे एक तार को पकड़ा और नीचे उतरने की कोशिश की, लेकिन हाथ छूट गया और मैं सीधे नीचे गिर पड़ी। मैं किस्मत वाली थी कि मेरी जान बच गई, लेकिन मेरे कई साथी इतने खुशनसीब नहीं थे।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि बिल्डिंग के बाहर खड़े लोग बेबस थे। अंदर फंसे बच्चे खिड़कियों से हाथ हिलाकर मदद की गुहार लगा रहे थे। तेज लपटों के बीच से आ रही बच्चों की चीखें बाहर खड़े लोगों का कलेजा चीर रही थीं। लेकिन देखते ही देखते वो चीखें धीरे-धीरे मद्धम पड़ती गईं… और फिर एक खौफनाक सन्नाटा छा गया।
जब तक राहत और बचाव कार्य की टीमें मुस्तैद हो पातीं, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस भीषण अग्निकांड में 15 मासूम जिंदगियां हमेशा के लिए खामोश हो गईं। डॉक्टरों के मुताबिक, शुरुआती जांच में सभी की मौत की वजह दम घुटना (Asphyxiation) बताया जा रहा है। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बिखरी लाशें और अपनों को खो चुके परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
Updated on:
23 Jun 2026, 2:44 PM IST
Published on:
23 Jun 2026, 9:59 AM IST
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