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लखनऊ अग्निकांड: ‘पापा उठ जाओ, भाई चला गया’ बेटे की लाश देख बेहोश हुए पिता, बिलखती रही बहन, सामने आईं आखिरी कॉल्स की दर्दनाक कहानी

Lucknow Fire Tragedy: लखनऊ कोचिंग अग्निकांड ने 15 लोगों की जान ले ली है। हादसे के बाद मृतकों के परिजन सदमे में हैं और उनका रो-रोकर बुरा हाल है। हादसे में फंसे लोगों ने अपने घर पर मदद की गुहार लगाते हुए कॉल किए थे।

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लखनऊ

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Harshita Saini

Jun 23, 2026

Lucknow Coaching Fire

लखनऊ अग्निकांड में भाई का शव देख चीख-चीखकर रोई बहन (Photo-X)

Lucknow Coaching Fire: लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। हादसे ने 15 लोगों की जान छीन ली। शवों का पोस्टमॉर्टम सोमवार देर रात तक चलता रहा। पूरे प्रोसेस में लगभग सात घंटे लगे। इस दौरान पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर परिजनों का जमावड़ा लगा रहा और कुछ मार्मिक दृ्य सामने आए। अपने बच्चों और परिजनों को खोने वाले परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल था। कई लोग शव देखते ही बेसुध हो गए और कुछ को रिश्तेदारों ने संभाला। वहीं इसके अलावा बताया जा रहा है कि आग लगने के बाद बच्चों ने मदद के लिए अपने घर पर आखिरी कॉल भी किए थे।

बेटे का शव देख बेहोश हुए पिता

हादसे में जान गंवाने वाले नीलेश का शव देखकर उसके पिता बेहोश हो गए। उसी जगह नीलेश की बहन भी मौजूद थी जो पिता से लिपटकर चीख-चाखकर रोने लगी और बोली कि पापा उठ जाओ..भाई चला गया है। पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद रात को ही शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया था। लेकिन पश्चिम बंगाल की रहने वाली सौमल्या और अनामिका तथा मध्य प्रदेश की जैनी के परिजन दूरी अधिक होने के कारण मंगलवार सुबह लखनऊ पहुंच सके। जैसे ही अनामिका की मां ने अपनी बेटी का शव देखा, वह खुद को संभाल नहीं सकीं और रोते-रोते बेहोश हो गईं।

आपको बता दें, मृतक नीलेश और अनामिका एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे और दोनों परिवारों के बीच रिश्ते को लेकर बातचीत चल रही थी। नीलेश के भाई अभिषेक के अनुसार, अगले सप्ताह परिवार को अनामिका के घर पश्चिम बंगाल जाना था, जिसके लिए टिकट भी बुक हो चुके थे।

आग लगने के बाद घर पर किया था कॉल

परिजनों के दिए जा रहे बयानों से पता चल रहा है कि आग में फंसे लोगों ने अपने घर पर कॉल कर मदद मांगी थी, लेकिन समय पर नहीं पहुंच पाने की वजह से जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे में जान गंवाने वाले अब्दुल रहनाम पिछले आठ महीने से आईटी टेक्निशियन के तौर पर काम कर रहे थे। लंबे संघर्ष के बाद मिली नौकरी से वह बहुत खुश थे और परिवार की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। उनके पिता को पैरालिसिस है। अब्दुल के दोस्त शादान शेख ने बताया कि आग लगने के बाद अब्दुल ने घर फोन कर अपने फंसने की जानकारी दी थी, लेकिन तबीयत खराब होने का वजह से वे मोर्चरी तक नहीं पहुंच सके। वहीं लखनऊ के सुखमणि सिंह ने भी अपने घर पर आखिरा कॉल कर कहा था कि पापा आग लग गई है, हमें बचा लीजिए।

बहन नहीं उठा पाई थी आदित्य का फोन

सीतापुर के रहने वाले 3डी कैरेक्टर आर्टिस्ट आदित्य श्रीवास्तव की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। उनकी बहन निशा ने बताया कि हादसे के दौरान आदित्य ने उन्हें फोन किया था, लेकिन वह कॉल रिसीव नहीं कर सकीं। जानकारी के अनुसार आदित्य के चचेरे भाई भवन श्रीवास्तव ने खिड़की से कूदकर जान बचाई और आदित्य को भी ऐसा करने के लिए कहा, लेकिन वह हिम्मत नहीं जुटा सका और वहीं फंसे रहने की वजह से उसकी मौत हो गई।

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