
डीएम विशाख जी की अध्यक्षता में जिला शुल्क नियामक समिति की बड़ी कार्रवाई, अभिभावकों को राहत की उम्मीद (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
DM Lucknow Action: राजधानी लखनऊ में निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली और नियमों के उल्लंघन पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी VisakhG की अध्यक्षता में आयोजित जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। जांच में शिकायतें सही पाए जाने पर 8 निजी स्कूलों को 5-5 लाख रुपये जुर्माने का नोटिस जारी किया गया है। संबंधित स्कूलों को 1 जून 2026 तक अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। यह कार्रवाई फीस विनियमन अधिनियम संशोधन-2020 के तहत की गई है। प्रशासन की इस सख्ती से अभिभावकों में राहत और उम्मीद का माहौल है, जबकि निजी स्कूलों में हड़कंप मचा हुआ है।
जिला प्रशासन को पिछले कुछ महीनों में जिले के 20 निजी स्कूलों के खिलाफ कुल 28 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों में अभिभावकों ने आरोप लगाया था कि कई स्कूल निर्धारित नियमों से अधिक फीस वसूल रहे हैं, हर साल मनमाने तरीके से फीस बढ़ा रहे हैं और अनावश्यक शुल्क भी जोड़ रहे हैं।
कुछ शिकायतों में यह भी कहा गया कि किताबें और यूनिफॉर्म विशेष दुकानों से खरीदने का दबाव बनाया गया। परिवहन शुल्क में अनियमित बढ़ोतरी की गई। वार्षिक शुल्क और विकास शुल्क के नाम पर अतिरिक्त रकम ली गई। फीस न जमा करने पर छात्रों पर दबाव बनाया गया। इन शिकायतों के बाद जिला शुल्क नियामक समिति ने गंभीरता से जांच शुरू की।
प्रशासनिक जांच के दौरान कई स्कूलों से रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगे गए। फीस संरचना, बढ़ोतरी के आधार और अभिभावकों की शिकायतों का मिलान किया गया। जांच में 8 शिकायतें सही पाई गईं। समिति ने माना कि संबंधित स्कूलों ने फीस विनियमन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। इसके बाद प्रशासन ने इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी।
बैठक के दौरान दो निजी स्कूलों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। स्कूल प्रबंधन की ओर से प्रशासन को आश्वासन दिया गया कि अतिरिक्त वसूली गई फीस को समायोजित किया जाएगा। भविष्य में नियमों का पालन किया जाएगा। अभिभावकों से पारदर्शिता रखी जाएगी। प्रशासन ने इन स्कूलों को चेतावनी देते हुए सुधार का अवसर दिया है।
जिन स्कूलों पर आरोप गंभीर पाए गए, उन्हें 5-5 लाख रुपये जुर्माने का नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन की ओर से साफ कहा गया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई भी की जाएगी। संबंधित स्कूलों को 1 जून 2026 तक अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में जिलाधिकारी Visakh G ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की आर्थिक मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालना गलत है। सभी स्कूलों को फीस विनियमन अधिनियम का पालन करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। डीएम ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए फीस विनियमन अधिनियम लागू किया था। बाद में वर्ष 2020 में इसमें संशोधन भी किया गया।
इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधान-
प्रशासन की कार्रवाई के बाद अभिभावकों में संतोष दिखाई दे रहा है। कई अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल हर साल फीस बढ़ाकर मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डाल देते हैं। आलोक गौतम (अभिभावक) ने कहा कि स्कूलों की फीस लगातार बढ़ रही थी। शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती थी। अब प्रशासन की कार्रवाई से उम्मीद जगी है।”
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद निजी स्कूलों में हलचल तेज हो गई है। कई स्कूल अब अपनी फीस संरचना और दस्तावेजों की समीक्षा कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ स्कूल प्रबंधन अब कानूनी सलाह भी ले रहे हैं ताकि आगे की कार्रवाई से बचा जा सके।
सूत्रों की मानें तो जिला प्रशासन अन्य शिकायतों की भी जांच कर रहा है। यदि आगे और गड़बड़ियां सामने आती हैं तो अन्य स्कूलों पर भी कार्रवाई संभव है। प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है तो उसकी शिकायत दर्ज कराएं।
Published on:
22 May 2026 01:30 pm
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