
बाहुबली मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद के लिये बुरी खबर, डीजीपी ओपी सिंह ने हिट लिस्ट में किया शामिल, लिया ये बड़ा एक्शन
लखनऊ. अपने लाइसेंसी हथियारों (Licensee weapons) के बल पर खौफ पैदा करने वाले बाहुबली (UP Bahubali) और कुख्यात अपराधी (History Sheeter) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की पुलिस के सीधे निशाने पर आ गए हैं। उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह (UP DGP OP Singh) ने बाहुबलियों और उनके परिवार में मौजूद लोगों के पास लाइसेंसी शस्त्रों (Shastra License) का ब्योरा जुटाने का निर्देश दिये हैं। डीजीपी ओपी सिंह (DGP OP Singh) का कहना है कि शासन स्तर पर पैरवी करके इन अपराधियों के शस्त्र लाइसेंस (Armed License) निरस्त करवाने की कोशिश की जाएगी। डीजीपी से इस फैसले से बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी (MLA Mukhtar Ansari), पूर्व सांसद अतीक अहमद (Atiq Ahmed) और पश्चिमी यूपी के कई बड़े अपराधियों की मुश्किलें और बढ़ना तय मानी जा रही हैं।
हिट लिस्ट में मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद
मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) इन दिनों पंजाब की जेल (Punjab Jail) में बंद है। मुख्तार अंसारी के साथ ही कई दूसरे बाहुबलियों के लाइसेंसी शस्त्रों (Shastra License) का ब्योरा निकलवाया गया है। इस हिट लिस्ट में सबसे ऊपर मुख्तार अंसारी ही है। अतीक अहमद (Atiq Ahmed) का नाम भी लिस्ट में शामिल है। पूर्व सांसद अतीक अहमद इन दिनों अहमदाबाद की जेल (Ahmedabad Jail) में बंद है। डीजीपी ओपी सिंह (DGP OP Singh) ने बताया कि मुख्तार अंसारी के पास नौ लाइसेंसी शस्त्र हैं। जबकि पूर्व सांसद अतीक अहमद के पास चार लाइसेंसी शस्त्र हैं। जानकारी के मुताबिक लिस्ट में शामिल कुख्यात सुंदर भाटी (Sundar Bhati), अमित भाटी (Amit Bhati), सुशील मूंछ (Sushil Moonchh) समेत नौ अपराधियों के पास एक से अधिक लाइसेंसी शस्त्र हैं। डीजीपी मुख्यालय (DGP Office) स्तर से अब इनके लाइसेंसी शस्त्र निरस्त कराने की कवायद की जाएगी।
डीजीपी मुख्यालय जुटा रहा जानकारी
उल्लेखनीय है कि लखनऊ के कारोबारी को अगवा कर देवरिया जेल में पीटने व जबरन संपत्ति के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के बहुचर्चित मामले में अतीक अहमद (Atiq Ahmed) पर सीबीआई ने शिकंजा कसा है। बीते दिनों अपराधियों को हासिल लाइसेंसी शस्त्रों (Armed License) के दुरुपयोग के इस तरह कई मामले सामने आए हैं। जिसके बाद शस्त्र लाइसेंस (Armed License) के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए पुलिस ने माफिया और बाहुबलियों के पास मौजूद लाइसेंसों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। डीजीपी मुख्यालय (DGP OP Singh Office) इसके लिए सभी संबंधित जिलों से जानकारी जुटा रहा है।
लाइसेंसी शस्त्रों का आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल
दरअसल अधिकारियों को पता चला है कि कई बाहुबलियों और माफियाओं के पास व उनके परिवार के सदस्यों के नाम से कई शस्त्र लाइसेंस (Bahubali Armed License) हैं। इन लाइसेंसी शस्त्रों का आपराधिक गतिविधियों में प्रयोग किया जा रहा है। पिछले दिनों शासन स्तर से कारतूस (Kartoos) और शस्त्र लाइसेंसों (Armed License) के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश स्तर पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसी कड़ी में यह कवायद हो रही है। पुलिस के आला अधिकारियों (Police Officers) का कहना है कि जिलों से शस्त्र लाइसेंस संबंधित जानकारी आने के बाद बड़ी संख्या में लाइसेंसों को निरस्त करने की कवायद होगी। इसमें कई बड़े अपराधियों और बाहुबलियों के लाइसेंस निरस्त (Armed License Cancel) होना तय है।
फर्जी शस्त्र लाइसेंस गिरोह का पर्दाफाश
हाल ही के दिनों में कुछ जिलों में फर्जी शस्त्र लाइसेंस (Fake Armed License) जारी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। शस्त्र लाइसेंस (Armed License) जारी करने पर अघोषित रूप होने के कारण इस गिरोह की गतिविधियां और बढ़ती गईं। वहीं हाईकोर्ट (High Court) के हस्तक्षेप के बाद साल 2013 से शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर कई तरह की बंदिशों लागू हैं। फर्जी शस्त्र लाइसेंस के मामलों के साथ ही कुछ जिलों में कारतूस घोटाला (Kartoos Ghotala) भी सामने आया था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि कहीं फर्जी शस्त्र लाइसेंस पर असलहे खरीदकर कारतूसों का घोटाला तो नहीं किया गया है। आपको बता दें कि बाहुबलियों के मामले में अक्सर प्रशासनिक कार्रवाई धीमी गति से चलती है। उदाहरण के तौर पर प्रयागराज (Prayagraj) में बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद (Bahubali Atiq Ahmed) का शस्त्र लाइसेंस हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के 10 साल बाद निरस्त हो पाया था। डीएम कार्यालय से यह प्रकरण दस सालों से लंबित था।
Updated on:
26 Aug 2019 02:46 pm
Published on:
25 Aug 2019 09:50 am
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