
सपा संरक्षक व यूपी के तीन बार मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव अब हमारे बीच नहीं रहे हैं। उनके निधन से समूचे उत्तर प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। सपा के साथ ही भाजपा, कांग्रेस, बसपा, आप समेत तमाम दलों के नेता और कार्यकर्ता अपने-अपने तरीके से संवेदना व्यक्त कर उन्हें याद कर रहे हैं। मुलायम सिंह यादव यानी नेता जी यूं ही यूपी के सबसे लोकप्रिय नेताओं में शुमार नहीं थे। उन्होंने कई ऐसे काम और बड़े फैसले लिए थे, जिनके लिए नेता जी को हमेशा याद किया जाएगा। इन्हीं में से पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार में लागू नकल अध्यादेश को खत्म करना मुलायम सिंह यादव का बड़ा फैसला था। इस मास्टरस्ट्रोक से उन्होंने लाखों छात्रों का दिल जीत लिया था।
ज्ञात हो कि भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान 1992 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने नकल विहीन परीक्षा के लिए नकल अध्यादेश लागू किया था। उस दौरान यूपी सरकार में राजनाथ सिंह शिक्षा मंत्री हुआ करते थे। हालांकि नकल अध्यादेश को कल्याण सिंह के दिमाग की उपज बताया गया था। नकल अध्यादेश लागू होने के बाद 1992 की यूपी बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल का रिजल्ट महज 14.70 प्रतिशत तो इंटरमीडिएट का परीक्षा परिणाम केवल 30.30 प्रतिशत रहा था। उस दौरान कई स्कूलों में एक भी नहीं तो कई में एक-दो छात्र ही पास हो सके थे। लाखों छात्रों को असफलता के कारण निराशा हाथ लगी थी। जबकि नकल करने के आरोप में पकड़े गए छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश भी दिए गए थे।
चुनाव में जनता से किया वादा, सत्ता में आते ही किया पूरा
मुलायम सिंह यादव अच्छे से लोगों की नब्ज जानते थे। यही वजह है कि मुलायम सिंह ने 1993 के विधानसभा के चुनाव के दौरान चुनावी सभाओं में ही जनता से वादा कर दिया था कि सरकार बनते ही सबसे पहले नकल अध्यादेश को वापस लिया जाएगा और पुरानी व्यवस्था बहाल हो जाएगी। इसी मास्टरस्ट्रोक के बूते मुलायम सिंह ने जनता के दिल के साथ चुनाव भी जीता।
लाखों छात्रों के चेहरों पर लौटी मुस्कान
मुलायम सिंह यादव ने सरकार बनते ही अपना वादा पूरा किया। उन्होंने इलाहाबाद पहुंचकर नकल अध्यादेश को वापस लेने की बड़ी घोषणा की। जिसके बाद लाखों छात्रों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई थी।
Published on:
10 Oct 2022 12:48 pm
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