
नमामि गंगे प्रोजेक्ट: यूपी में अब गंगा की सफाई करेंगी 15 लाख मछलियां
लखनऊ.नमामि गंगे अभियान(Namami Gange Project): गंगा को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने के एक अन्य प्रयास में यूपी सरकार नमामि गंगे अभियान के तहत नदी में पशुपालन की प्रथा शुरू करेगी। मत्स्य पालन विभाग द्वारा विभिन्न प्रजातियों की लगभग 15 लाख मछलियों को नदी में छोडऩे की कार्ययोजना बनाई गई है। इससे नदी में जैव विविधता(Biodiversity) को बनाए रखने और संरक्षित करने में मदद मिलेगी और नमामि गंगे अभियान के तहत इसकी सफाई सुनिश्चित होगी।
नमामि गंगे अभियान क्या है (Namami Gange Project)
2014 में केंद्र सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 'नमामि गंगे' नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का शुभारंभ किया है| इस योजना का क्रियान्वयन केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
12 जिलों में छोड़ेगें मछलियां(Fish will be released in 12 districts in UP)
इन मछलियों को पूर्वी यूपी से लेकर पश्चिमी यूपी तक के करीब 12 जिलों में छोड़ा जाएगा। ये जिले गाजीपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, प्रयागराज, कौशांबी, प्रतापगढ़, कानपुर, हरदोई, बहराइच, बुलंदशहर, अमरोहा और बिजनौर हैं। वाराणसी और गाजीपुर जिलों से गंगा में लगभग 1.5-1.5 लाख मछलियां छोड़ी जाएंगी। नदी की सफाई सुनिश्चित करने के लिए, राज्य सरकार ने नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा में सीवेज के प्रवाह को खत्म करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का भी निर्माण किया है।
गंगा टास्क फोर्स भी तैनात(Ganga Task Force also deployed)
नदी के किनारे प्रदूषण की निगरानी के लिए सरकार ने गंगा टास्क फोर्स भी तैनात किया है। नमामि गंगे के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि नदी पालन की प्रथा गंगा की सफाई और भूजल के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का एक हिस्सा है। मत्स्य पालन विभाग के उप निदेशक एन.एस. रहमानी ने कहा कि प्रदूषण को नियंत्रित करने और नदी में समुद्री जीवन को बेहतर बनाने के लिए नदी पालन की गतिविधि का भी उपयोग किया जाता है। इस गतिविधि में विभिन्न प्रजातियों की मछलियां नदी में छोड़ी जाती हैं, जो नाइट्रोजन के स्तर को बढ़ाने वाले कारकों को नष्ट कर देती हैं।
नाइट्रोजन कचरे को करेंगी नियंत्रित(Nitrogen waste will be controlled)
ये मछलियां नदी की सफाई बनाए रखने में भी मदद करेंगी, क्योंकि वे जैविक अवशेषों पर भोजन करती हैं। उन्होंने कहा कि गंगा में अत्यधिक मछली पकड़ने और प्रदूषण के कारण मछलियों की आबादी भी कम हो रही है। रहमानी ने आगे बताया कि लगभग 4,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में मौजूद लगभग 1500 किलोग्राम मछली लगभग 1 मिलीग्राम प्रति लीटर नाइट्रोजन कचरे को नियंत्रित करती है। इसलिए, सरकार ने नदी में अतिरिक्त नाइट्रोजन को नियंत्रित करने के लिए लगभग 15 लाख मछलियों को गंगा में छोडऩे का फैसला किया है। यदि नाइट्रोजन 100 मिलीग्राम प्रति लीटर या अधिक से अधिक है, तो यह नदी की मछली विविधता के लिए अत्यधिक हानिकारक हो जाती है। नतीजन, मछली प्रजनन नहीं कर सकती है और अंडे नहीं दे सकती है, जो उनके विलुप्त होने की ओर ले जाती है।
रोहू, कतला और मृगल शामिल(Rohu, Katla and Mrigal included)
इस अभ्यास के माध्यम से, छोड़ी गई मछलियों को मछली स्टॉक की बहाली को बढ़ने के लिए किया जाएगा, जो ना केवल जलीय जीवों की रक्षा करेगा, बल्कि प्रदूषण को भी कम करेगा। छोड़ी जाने वाली मछलियों में रोहू, कतला और मृगल शामिल हैं।
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Published on:
29 Sept 2021 04:58 pm
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