
योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव (File Photo)
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजनीति में विपक्ष एक नई रणनीति पर काम करता दिख रहा है। पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर लगातार हमले के बाद अब कांग्रेस (Congress) और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने बीजेपी (BJP) के खिलाफ राम मंदिर के चढ़ावे में अनियमिताओं और चोरी (Ram Mandir Donation Theft) के आरोपों को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की शुरुआत कर दी है। विपक्ष को लगता है कि चुनावी राजनीति में भावनात्मक और आस्था से जुड़े मुद्दों का असर केवल युवाओं तक सीमित रहने वाले पेपर लीक जैसे विषयों से कहीं ज़्यादा व्यापक हो सकता है।
दरअसल राम मंदिर अब तक बीजेपी का सबसे मज़बूत राजनीतिक और वैचारिक ‘पिच’ रही है। ऐसे में उसी मुद्दे पर बीजेपी को घेरना विपक्ष के लिए बड़ा जोखिम भी है। ज़रा सी चूक विपक्ष को 'राम विरोधी' बताने के लिए पर्याप्त हो सकती है। इसके बावजूद कांग्रेस और सपा को इस मुद्दे में बड़ा सियासी अवसर नज़र आ रहा है। ऐसे में यह कहना गलत नाहों होगा कि बीजेपी की सबसे मज़बूत ‘पिच’ पर विपक्ष ‘बैटिंग’ कर रहा है।
विपक्ष मंदिर निर्माण पर नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और चढ़ावे की पारदर्शिता को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि बीजेपी के लिए राम मंदिर और दूसरे धार्मिक मुद्दे आस्था से ज़्यादा राजनीतिक पूंजी बन गए हैं। जो लोग खुद को भगवान राम का सबसे बड़ा भक्त बताते हैं, उन्हें चढ़ावे के प्रबंधन में पूरी जवाबदेही दिखानी चाहिए।
हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि विपक्ष इस मुद्दे को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ा रहा है। संसद परिसर में कांग्रेस और सपा के सांसदों ने राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद पर लगातार विरोध-प्रदर्शन किया है। पिछले कई दिनों से कांग्रेस और सपा के वरिष्ठ नेता लगातार पत्रकार वार्ता कर मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन और पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार आक्रामक अभियान चलाया जा रहा है।
पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में धांधली और शिक्षा व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने सरकार को लगातार घेरा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को भी विपक्ष ने अपनी राजनीतिक बढ़त के रूप में पेश करने की कोशिश की। लेकिन विपक्ष को यह भी पता है कि पेपर लीक का मुद्दा मुख्य रूप से युवाओं और नौकरी की तैयारी कर रहे वर्ग तक ही सीमित रह सकता है। इसके उलट, राम मंदिर से जुड़ा कोई भी सवाल सामाजिक और राजनीतिक रूप से पूरे प्रदेश और देश में व्यापक असर डाल सकता है।
Updated on:
19 Aug 2026 05:52 am
Published on:
19 Aug 2026 05:32 am
