
UP cabinet decision on NSA on liquor adulteration and jail
17 जुलाई, 2019 को जनपद सोनभद्र की तहसील
व थाना घोरावल स्थित ग्राम उम्भा में जमीनी विवाद की
दुःखद घटना की जानकारी मिलते ही प्रदेश सरकार ने
तत्परता से कार्यवाई प्रारम्भ कर दी थी।
ऽ पुलिस महानिदेशक को इस प्रकरण का व्यक्तिगत रूप से
अनुश्रवण करते हुए दोषियों को गिरफ्तार करने के निर्देश
दिए गए थे।
ऽ सोनभद्र के जिलाधिकारी को घायलों का समुचित उपचार
सुनिश्चित कराने के लिए निर्देशित किया गया था।
ऽ मैंने दिनांक 21 जुलाई, 2019 को जनपद सोनभद्र का
भ्रमण कर मृतकां के परिजनों से भेंट की थी।
ऽ मैंने प्रत्येक परिजन को सुनकर अपनी संवेदना व्यक्त की
थी एवं स्थल का भी निरीक्षण किया था।
ऽ मैंने पीड़ित परिवारों को आश्वस्त किया था कि संकट की
इस घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है।
ऽ राज्य सरकार इस घटना के दोषियों के विरूद्ध सख्त से
सख्त कानूनी कार्यवाई करते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाने
के लिए प्रतिबद्ध है। वर्षों से उनके साथ हो रहे अन्याय का
स्थाई समाधान करने का मैंने उनको भरोसा दिलाया था।
ऽ इसके दृष्टिगत विवादित भूमि के सम्बन्ध में समय-समय
पर दाखिल-खरिज एवं नामांतरण आदेशों की वैधानिकता
की विस्तृत छानबीन और जांच के लिए प्रदेश सरकार द्वारा
अपर मुख्य सचिव राजस्व, प्रमुख सचिव श्रम तथा आयुक्त
विन्ध्याचल मण्डल की तीन सदस्यीय समिति गठित की
गई।
ऽ समिति की जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को कल प्राप्त हो
गई है एवं इसका मुख्य सचिव के स्तर से विस्तृत परीक्षण
किया गया।
ऽ जांच समिति द्वारा यह पाया गया कि दिनांक 10 अक्टूबर,
1952 को गठित आदर्श कृषि सहकारी समिति,
उम्भा/सपही के मुख्य प्रवर्तक महेश्वर प्रसाद नारायण
सिंह तथा प्रबन्धक श्री दुर्गा प्रसाद राय सहित कुल 12
सदस्य थे।
ऽ यह उल्लेखनीय है कि आदर्श को-ऑपरेटिव सोसाइटी
उम्भा, सपही का गठन विवाद का मूल कारण है। यह
सोसाइटी बिहार के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता तथा उत्तर प्रदेश
के पूर्व राज्यपाल चन्देश्वर प्रसाद नारायण सिंह के
चाचा महेश्वर प्रसाद नारायण द्वारा गठित की गई थी।
महेश्वर प्रसाद कांग्रेस पार्टी के बिहार से राज्यसभा के
सांसद तथा एम0एल0सी0 भी थे।
ऽ वर्ष 1989 में इसी सोसाइटी की भूमि का व्यक्तिगत नामों में
अन्तरण किया गया था।
ऽ 17 जुलाई, 2019 की घटना का मुख्य अभियुक्त ग्राम प्रधान
यज्ञदत्त समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक रमेश चन्द्र
दुबे का करीबी रहा है। दबंग प्रवृत्ति के इस व्यक्ति ने
पिछले चुनाव में सपा का प्रचार किया था। ग्राम प्रधान के
भाई को वर्ष 2017 से पूर्व, सड़क निर्माण का ठेका मिला
था।
ऽ पंजीकरण के समय समिति द्वारा ग्राम उम्भा में 727 बीघा
तथा ग्राम सपही में 725 बीघा जमीन समिति के सदस्यों
की दर्शायी गयी थी, किन्तु इस सम्बन्ध में कोई शासकीय
अभिलेख प्रस्तुत नहीं किये गये थे। केवल गाटा संख्या एवं
रकबे की हस्तलिखित सूची प्रस्तुत की गई थी।
ऽ समिति द्वारा दर्शायी गई जमीनों के सम्बन्ध में आधार वर्ष
फसली सन् 1359 (सन् 1952 ई0) की खतौनी से मिलान
करने पर समिति ने यह पाया कि ग्राम उम्भा की 641 बीघा
तथा ग्राम सपही की 664 बीघा कुल 1305 बीघा बंजर
खाते की भूमि है, जो ग्रामसभा की होती है।
ऽ रॉबर्ट्सगंज के तत्कालीन तहसीलदार कृष्ण मालवीय
द्वारा दिनांक 17 दिसम्बर, 1955 को पारित आदेश के
अनुसार ग्राम उम्भा की बंजर खाते की कुल 258 गाटा
रकबा 641 बीघा तथा ग्राम सपही की 123 गाटा रकबा
693 बीघा 03 बिस्वा जमीन आदर्श कॉपरेटिव फार्मिंग
सोसाइटी लि0 उम्भा/सपही के नाम दर्ज करने के आदेश
दिए गए थे।
ऽ वर्ष 1985-90 के बीच ग्राम उम्भा के 50 गाटे रकबा 524
बीघा 04 बिस्वा तथा ग्राम सपही के 57 गाटा रकबा 435
बीघा 15 बिस्वा जमीन पर उक्त सहकारी समिति को
संक्रमणीय अधिकार प्रदान किये गये। (असंक्रमणीय के रूप
में 10 वर्ष पूर्ण होने के पश्चात संक्रमणीय अधिकार स्वतः
प्राप्त होने के आधार पर)
ऽ श्रीमती आशा मिश्रा पत्नी प्रभात कुमार मिश्रा
आई0ए0एस0 तथा श्रीमती विनीता शर्मा उर्फ किरन कुमारी
पत्नी श्री भानु प्रताप शर्मा आई0ए0एस0 द्वारा धारा 33/39
लैण्ड रेवेन्यु एक्ट, 1901 में दाखिल दो मुकदमों में
एस0डी0ओ0 रॉबर्ट्सगंज अशोक कुमार श्रीवास्तव द्वारा
दिनांक 06 सितम्बर, 1989 को आदेश पारित किया गया।
ऽ इस आदेश के द्वारा ग्राम उम्भा तथा सपही की तथाकथित
रूप से समिति के नाम दर्ज जमीनों में से लगभग 18-18
हेक्टेयर भूमि श्रीमती आशा मिश्रा तथा श्रीमती विनीता शर्मा
के नाम दर्ज करने के आदेश पारित किए गए।
ऽ तत्कालीन एस0डी0ओ0 द्वारा परित यह आदेश त्रुटिपूर्ण एवं
अधिकारातीत है, क्योंकि धारा 33/39 मात्र त्रुटियों एवं
ओमिशन्स को ठीक करने के लिए है। इस धारा के
अन्तर्गत स्वत्व निर्धारण का आदेश पारित नहीं किया जा
सकता।
ऽ श्रीमती विनीता शर्मा द्वारा प्रधान पक्ष के लोगों को कुल 18.
211 हेक्टेयर तथा श्रीमती आशा मिश्रा द्वारा प्रधान पक्ष के
ही लोगों को कुल 18.209 हेक्टेयर जमीन दिनांक 17
अक्टूबर, 2017 को विक्रय की गयी।
ऽ प्रधान पक्ष के लोगों द्वारा वर्ष 2018 में राजस्व विभाग एवं
पुलिस की मदद से बैनामे की भूमि पर कब्जा करने का
प्रयास किया गया, किन्तु वे सफल नहीं हुए।
ऽ जांच समिति को स्थलीय निरीक्षण के दौरान यह ज्ञात हुआ
कि आदर्श कृषि सहकारी समिति की भूमि पर ग्राम
उम्भा/सपही के लगभग 140 परिवार तीन पीढ़ियों से खेती
करते चले आ रहे हैं।
ऽ इसके लिए वे समिति के प्रतिनिधि श्री नीरज राय को
प्रतिवर्ष आपसी सहमती से निर्धारित धनराशि का भुगतान
करते थे।
ऽ दिनांक 17 अक्टूबर, 2017 को प्रधान पक्ष के लोगों को
बैनामा किये जाने के पश्चात धनराशि का भुगतान करना
बन्द कर दिया गया।
ऽ सहायक अभिलेख अधिकारी सोनभद्र राजकुमार द्वारा
बैनामे के आधार पर ग्रामीणों की गम्भीर आपत्तियों एवं
विधिक व्यवस्था के विपरीत जाकर बिना कोई जांच किए
दिनांक 27 फरवरी, 2019 को नामांतरण आदेश पारित कर
दिए गए।
ऽ जिलाधिकारी सोनभद्र के समक्ष ग्रामीणों द्वारा नामांतरण
आदेशों के विरुद्ध 11 अपीलें दायर की गई।
ऽ इन अपीलों को मात्र तकनीकी आधार पर दिनांक 06
जुलाई, 2019 को जिलाधिकारी, सोनभद्र द्वारा खारिज कर
दिया गया।
ऽ यद्वपि जिलाधिकारी न्यायालय में सहायक अभिलेख
अधिकारी, सोनभद्र द्वारा नामांतरण आदेश दिनांक 27
फरवरी, 2019 के विरूद्ध प्रकाश नारायण सिंह पुत्र स्व0
चन्द्र मौलेश्वर प्रसाद सिंह, ग्राम शहजादपुर, थाना टाउन
हाजीपुर, जिला वैशाली, बिहार द्वारा दो अपीलें दाखिल की
गई हैं, जो अभी निस्तारण हेतु लम्बित हैं। अगली सुनवाई
की तिथि 09 अगस्त, 2019 निर्धारित है।
ऽ पुलिस प्रशासन द्वारा ग्रामीणों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कर
गुण्डा एक्ट में भी कार्रवाई की गई, किन्तु प्रधान पक्ष के
लोगों केइ विरूद्ध कोई निरोधात्मक कार्रवाई नहीं गई,
जिसके परिणामस्वरूप प्रधान पक्ष के लोगों का मनोबल बढ़ा
और उक्त घटना घटित हुई।
ऽ इसके अतिरिक्त, सोनभद्र की घटना में दोनों पक्षों के बीच
दर्ज आपराधिक मुदकमों तथा निरोधात्मक कार्रवाई में प्रथम
दृष्टया पक्षपात पूर्ण कार्य की जांच अपर पुलिस
महानिदेशक, वाराणसी जोन से करायी गयी।
ऽ उक्त दोनों समितियों के आधार पर निम्न कार्रवाई का
निर्णय लिया गया हैः-
ऽ जिलाधिकारी, सोनभद्र अंकित कुमार अग्रवाल के
विरुद्ध अनुशासनिक जांच के आदेश देते हुए इन्हें
नियुक्ति विभाग से सम्बद्ध कर दिया जाए।
ऽ पुलिस अधीक्षक सोनभद्र श्री सलमान जफर ताज
पाटिल के विरुद्ध अनुशासनिक जांच के आदेश दे
दिए गए हैं। इन्हें डी0जी0पी0 मुख्यालय से सम्बद्ध
किया जाए।
ऽ दिनांक 17 दिसम्बर, 1955 को त्रुटिपूर्ण आदेश पारित
करने वाले तत्कालीन तहसीलदार रॉबर्ट्सगंज श्री
कृष्ण मालवीय के जीवित होने की सम्भावना क्षीण है।
ऽ यदि वे जीवित भी होंगे तो, इस स्थिति में नहीं होंगे
कि उनके विरुद्ध मुकदमा कायम कराया जाए।
इसलिए समिति द्वारा उनके विरुद्ध किसी कार्रवाई की
संस्तुति नहीं की गई।
ऽ वर्ष 1989 के तत्कालीन परगना अधिकारी रॉबर्ट्संगज
अशोक कुमार श्रीवास्तव व तहसीलदार जय
चन्द्र सिंह यदि जीवित हों, तो उनके विरुद्ध
आई0पी0सी0 की सुसंगत धाराओं में एफ0आई0आर0
दर्ज कराकर कार्रवाई की जाए।
ऽ सहायक अभिलेख अधिकारी सोनभद्र राजकुमार के
विरुद्ध आई0पी0सी0 की सुसंगत धाराओं में
एफ0आई0आर0 दर्ज कराकर कार्रवाई की जाए।
ऽ साथ ही, इन्हें तत्काल निलम्बित करते हुए इनके
विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई भी की जाए।
ऽ तत्कालीन उप जिलाधिकारी घोरावल श्री विजय
प्रकाश तिवारी के विरुद्ध नियुक्ति विभाग द्वारा
कार्रवाई की जा रही है तथा इनके विरुद्ध भी
एफ0आई0आर0 दर्ज करने के निर्देश दिये गये हैं।
ऽ क्षेत्राधिकारी घोरावल अभिषेक सिंह, उपनिरीक्षक
लल्लन प्रसाद यादव, निरीक्षक अरविन्द कुमार
मिश्र तथा बीट आरक्षी सत्यजीत यादव के विरुद्ध
गृह विभाग द्वारा अनुशासनिक जांच प्रारम्भ कर दी
गई है।
ऽ क्षेत्राधिकारी घोरावल अभिषेक सिंह को पीड़ित पक्ष
पर दबाव बनाने के लिए उन पर गुण्डा एक्ट व
आपराधिक वाद दर्ज करते हुए उनके विरुद्ध भी
एफ0आई0आर0 दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
ऽ निरीक्षक थाना घोरावल अरविन्द कुमार मिश्र,
उपनिरीक्षक हल्का थाना घोरावल लल्लन प्रसाद
यादव तथा बीट आरक्षी सत्यजीत यादव के विरुद्ध
अपराधियों का साथ देने, पीड़ित पक्ष के विरुद्ध
अनावश्यक पुलिस कार्रवाई करने, घटना की पूर्व
जानकारी होने तथा ग्रामीणों द्वारा घटना की सूचना
दिए जाने के बावजूद जानबूझकर घटना स्थल पर
समय से न पहुंचने के लिए आई0पी0सी0 की सुसंगत
धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर कार्रवाई की जाए।
ऽ कोर्ट के समुचित आदेश के बिना नामांतरण आदेश के
पूर्व, विवादित भूमि को खाली कराने के लिए प्रधान
पक्ष से 1.42 लाख रुपए जमा कराने के लिए
तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार
दीक्षित के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई संस्थित करने व
एफ0आई0आर0 दर्ज करने के निर्देश दिए गये हैं।
ऽ सहायक निबन्धक कृषि सहकारी समितियां, वाराणसी
विजय कुमार अग्रवाल को पदीय दायित्वों का
निर्वहन न करने के कारण निलम्बित करने तथा बिना
जांच किए व बिना सुसंगत अभिलेख प्राप्त किये
कार्रवाई करने के कारण इनके विरुद्ध विभागीय
कार्रवाई संस्थित करने व एफ0आई0आर0 दर्ज करने
के निर्देश दिए गए हैं।
ऽ तथाकथित रूप से तत्कालीन तहसीलदार, रॉबर्ट्सगंज
द्वारा पारित आदेश दिनांक 17 दिसम्बर, 1955 से
आदर्श कृषि सहकारी समिति के नाम ग्राम उम्भा की
641 बीघा तथा ग्राम सपही की 693 बीघा, 03 बिस्वा
दर्ज की गई बंजर/परती खाते की भूमि को पुनः
1359 फसली (आधार खतौनी) की खतौनी के अनुसार
ग्रामसभा के खाते में दर्ज करने हेतु जिलाधिकारी
सोनभद्र नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करें।
ऽ तत्कालीन तहसीलदार रॉबर्ट्सगंज द्वारा पारित आदेश
दिनांक 17 दिसम्बर, 1955 को ंइ.पदपजपव त्रुटिपूर्ण
होने के कारण पश्चातवर्ती समस्त कार्यवाहियां
अविधिक घोषित कर दी जाएं तथा समस्त भूमि
ग्रामसभा में नियमानुसार निर्धारित प्रक्रिया के अन्तर्गत
दर्ज होने के पश्चात ग्रामीणों को नियमानुसार कृषि
कार्य हेतु पट्टे पर आवंटित की जाए।
ऽ ग्रामसभा की भूमि समिति के नाम फर्जी रूप से दर्ज
कराने के लिए आदर्श कृषि सहकारी समिति, उम्भा के
प्राथमिक 12 सदस्यों में से जो जीवित हों, उनके
विरुद्ध ग्रामसभा की भूमि हड़पने के लिए आई0पी0सी0
की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत प्राथमिकी दर्ज कर
कार्रवाई की जाए।
ऽ इसके अतिरिक्त तत्कालीन उप जिलाधिकारी घोरावल
मणि कण्डन तथा तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक
घोरावल आशीष कुमार सिंह, शिव कुमार मिश्र
तथा तत्कालीन क्षेत्राधिकारी विवेकानन्द तिवारी एवं
राहुल मिश्रा के विरुद्ध एफ0आई0आर0 दर्ज
करने के निर्देश दिये गए हैं।
ऽ वर्ष 1989 में सोसाइटी की भूमि जो मूलतः ग्रामसभा
की थी, अपने नाम दर्ज कराने के लिए श्रीमती आशा
मिश्रा पत्नी प्रभात कुमार मिश्रा आई0ए0एस0 तथा
श्रीमती विनीता शर्मा उर्फ किरन कुमारी पत्नी भानु
प्रताप शर्मा आई0ए0एस0 के विरुद्ध आई0पी0सी0 की
सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की
जाए।
ऽ इसके अतिरिक्त क्षेत्राधिकारी विवेकानन्द तिवारी,
अभिषेक कुमार सिंह, राहुल मिश्रा तथा
निरीक्षक श्री मूल चन्द्र चौरसिया, निरीक्षक आशीष
कुमार सिंह, निरीक्षक शिवकुमार मिश्रा, उप
निरीक्षक पदमकान्त तिवारी, मुख्य आरक्षी
सुधाकर यादव, मुख्य आरक्षी कन्हैया यादव व
आरक्षी प्रमोद प्रताप के विरुद्ध पक्षपात पूर्ण
निरोधात्मक कार्रवाई करने तथा निष्पक्षता से विवेचना
न करने के लिए विभागीय कार्रवाई करने के भी
निर्देश दिए गए हैं।
ऽ यह उल्लेखनीय है कि एफ0आई0आर0 दर्ज कर इस
समस्त मामले की जांच एस0आई0टी0 द्वारा की
जाएगी। एस0आई0टी0 की अध्यक्षता डी0आई0जी0
एस0आई0टी0 जे0 रवीन्द्र गौड़ करेंगे एवं उक्त
दल में अपर पुलिस अधीक्षक श्रीमती अमृता मिश्रा एवं
तीन पुलिस इंस्पेक्टर भी साथ में विवेचना करेंगे।
एस0आई0टी0 के कार्य का पर्यवेक्षण डी0जी0
एस0आई0टी0 आर0पी0 सिंह करेंगे।
Published on:
04 Aug 2019 05:43 pm
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