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दलित फंड को लेकर कांग्रेस ने योगी सरकार को घेरा, यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने स्पेशल कंपोनेंट प्लान को लेकर उठाए सवाल

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने दलित फंड और स्पेशल कंपोनेंट प्लान के मुद्दे पर भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं ने फंड के इस्तेमाल का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
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लखनऊ

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Mohsina Bano

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Updated: 20 Sep 2026, 2:11 PM IST

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कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम (PC: X/@INCUttarPradesh)

UP Congress Slams BJP Over Dalit Fund Misuse:उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति और बहुजन समाज के अधिकारों को लेकर कांग्रेस पार्टी आक्रामक हो गई है। राजधानी लखनऊ में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और नेता कुंवर सिंह निषाद ने एक प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारें दलित समाज के लिए निर्धारित संसाधनों का सही इस्तेमाल नहीं कर रही हैं और स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत मिलने वाले धन पर कुठाराघात किया जा रहा है।

1978 में शुरू हुई थी विशेष योजना

कांग्रेस नेताओं ने जानकारी देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति के सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए साल 1978 और 1979 में स्पेशल कंपोनेंट प्लान की शुरुआत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य विकास योजनाओं में अनुसूचित जाति की आबादी के अनुपात के अनुसार संसाधन सुनिश्चित करना था। केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय मंत्रालय के नियमों के मुताबिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दलितों के लिए विशेष योजनाएं बनाकर संसाधन तय करने की व्यवस्था रही है।

कैरी फॉरवर्ड व्यवस्था लागू करने की मांग

पार्टी नेताओं ने दावा किया कि निर्धारित वित्तीय वर्ष में खर्च न हो पाने वाली राशि को अगले वित्तीय वर्ष में ले जाकर यानी कैरी फॉरवर्ड कर दलित समाज के विकास कार्यों पर खर्च किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में इस व्यवस्था का सही पालन नहीं किया जा रहा है और दलितों के हिस्से का पैसा दूसरी जगहों पर इस्तेमाल किया जा रहा है या फिर वह लैप्स हो रहा है। कांग्रेस का कहना है कि इसका सीधा असर छात्रों की छात्रवृत्ति, बस्तियों के विकास और युवाओं से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ रहा है।

सरकार से मांगा गया खर्च का पूरा हिसाब

कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि SC कंपोनेंट के तहत कितनी राशि आवंटित हुई कितनी खर्च की गई और कितनी धनराशि शेष बची है इसका विभागवार ब्योरा सार्वजनिक किया जाए। नेताओं ने कहा कि केवल बजट में कागजी प्रावधान करने से दलित समाज का विकास नहीं हो सकता बल्कि उस पैसे का वास्तविक उपयोग जमीन पर दिखना चाहिए। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यह मामला केवल बजट का नहीं बल्कि शिक्षा रोजगार और बुनियादी अधिकारों से जुड़ा है और पार्टी इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक जोर-शोर से उठाएगी।