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दो महिलाओं ने दी राजा भैया को चुनौती, विरोध में खड़ा गुलशन कभी था दाहिना हाथ

दूसरी ओर प्रतापगढ़ से चुनाव लड़ने वाली कालंकार राजघराने की राजकुमारी रत्ना सिंह रघुराज प्रताप सिंह को चुनौती दे चुकी हैं। रत्ना सिह प्रतापगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ती हैं। एक बार रघुराज प्रताप सिंह के करीबी अक्षय प्रताप सिंह रत्ना सिंह को चुनाव में मात दे चुके हैं हालांकि बाद में अपनी हार को रत्ना सिंह ने जीत में बदल लिया था।
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लखनऊ

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Prashant Mishra

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Updated: 30 Jan 2022, 11:30 AM IST

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Raja Bhiya उत्तर प्रदेश की राजनीति में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया एक बड़ा नाम है। समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे रघुराज प्रताप सिंह इन दिनों अपनी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक को मजबूत करने में लगे हुए हैं। वर्ष 1993 से लगातार विधायक बनते आ रहे रघुराज प्रताप सिंह के सामने इस बार दोहरी चुनौती है। जहां समाजवादी पार्टी ने कभी रघुराज प्रताप सिंह के काफी करीबी रहे गुलशन यादव को उम्मीदवार बनाया है तो वहीं दूसरी ओर भाजपा ने भी महिला प्रत्याशी को रघुराज प्रताप सिंह के खिलाफ उतार दिया है। रघुराज प्रताप सिंह के खिलाफ कुंडा से सिंधुजा मिश्रा को भाजपा ने टिकट दिया गया है। रघुराज प्रताप सिंह के सामने सपा से चुनाव लड़ने वाला गुलशन कभी रघुराज का काफी करीबी थी लोग तो यहां तक कहते हैं कि एक समय गुलशन राजा का दाहिना हाथ था व राजा का कारोबार देखता था।

राजघराने की बेटी दे रही चुनौती

दूसरी ओर प्रतापगढ़ से चुनाव लड़ने वाली कालंकार राजघराने की राजकुमारी रत्ना सिंह रघुराज प्रताप सिंह को चुनौती दे चुकी हैं। रत्ना सिह प्रतापगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ती हैं। एक बार रघुराज प्रताप सिंह के करीबी अक्षय प्रताप सिंह रत्ना सिंह को चुनाव में मात दे चुके हैं हालांकि बाद में अपनी हार को रत्ना सिंह ने जीत में बदल लिया था।

दो महिलाओं से मिल रही चुनौती

उत्तर प्रदेश के बाहुबली राजनेताओं में रघुराज प्रताप सिंह को दो महिलाओं से चुनौती मिल रही है। रत्ना सिंह की रियासत कालंकार रियासत व भदरी रियासत में पुरानी अदावत रही है। जहां रत्ना सिंह कालंकार रियासत की राजकुमारी है वहीं रघुराज प्रताप सिंह भदरी रियासत के राजकुमार हैं। ऐसे में दोनों में पुरानी अदावत के साथ-साथ राजनीतिक लड़ाई भी है। रत्ना सिंह पिछले लंबे समय से लगातार रघुराज प्रताप सिंह को चुनौती दे रहे हैं।

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लोकसभा चुनाव में राजा की पार्टी को मिली थी हार

रघुराज प्रताप सिंह ने समाजवादी पार्टी से अलग होने के बाद अपनी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक बनाई थी। पिछले लोकसभा चुनाव में राजा ने दो सीटों पर उम्मीदवार भी उतारे थे। लेकिन रघुराज प्रताप सिंह को हार का सामना करना पड़ा था। विधानसभा चुनाव में मजबूत पकड़ रखने वाले रघुराज प्रताप सिंह को आगामी विधानसभा चुनाव से काफी उम्मीद है। कभी समाजवादी पार्टी के काफी करीबी रहे रघुराज प्रताप सिंह व समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच टकराव की स्थिति देखी जा रही है। ‌

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