
स्वतंत्रता दिवस पर होगी 5,118 सरकारी स्कूलों में बाल वाटिकाओं की शुरुआत फोटो सोर्स : Social Media
UP Education Balvatika: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत उत्तर प्रदेश में 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बालवाटिकाएं अब केवल खेल का स्थान नहीं रहेंगी, बल्कि नन्हे-मुन्नों के लिए सीखने और खेलने का रंगीन संसार बनकर तैयार हो चुकी हैं। स्वतंत्रता दिवस 2025 के अवसर पर इन बाल वाटिकाओं का औपचारिक शुभारंभ होगा। इसके साथ ही प्रदेश के 5,118 विद्यालयों में बच्चों के सर्वांगीण विकास की मजबूत नींव रखी जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार यह पहल ‘स्कूल रेडिनेस’ को मजबूत बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (ICDS) के सहयोग से नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्रों को इन स्कूलों में स्थानांतरित कर दिया गया है। इन्हें आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, आनंददायक और सुरक्षित अधिगम का अनुभव मिल सके।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बाल वाटिकाओं के माध्यम से नन्हे-मुन्नों के भविष्य की मजबूत नींव रखी जा रही है। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता है कि हर बच्चा कक्षा-1 में प्रवेश से पहले मानसिक और सामाजिक रूप से पूरी तरह तैयार हो। पोषण, सुरक्षित वातावरण और आनंददायक अधिगम इस योजना के केंद्र में है।”
इन बाल वाटिकाओं को बच्चों के लिए आकर्षक और शिक्षाप्रद बनाने के लिए कई नई सुविधाएं जोड़ी गई हैं -
साथ ही, चरणबद्ध तरीके से ECCE (Early Childhood Care and Education) एजुकेटर्स की तैनाती की जा रही है, ताकि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण प्री-प्राइमरी शिक्षा पहुंच सके।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इन बाल वाटिकाओं में भव्य आयोजन की योजना बनाई गई है। स्कूल परिसरों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और आकर्षक सजावट के साथ विभिन्न सांस्कृतिक व शैक्षिक गतिविधियां आयोजित होंगी।
बच्चों के लिए गायन, नृत्य और नाटिका प्रतियोगिताएं।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने बताया कि 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास के लिए सबसे अहम होती है। उन्होंने कहा, “‘स्कूल रेडिनेस’ का यह चरण पूरा होने के बाद बच्चा कक्षा-1 में प्रवेश के समय शिक्षा ग्रहण करने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है। हमारी प्राथमिकता पोषण, सुरक्षित वातावरण और आनंददायक अधिगम सुनिश्चित करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में प्री-प्राइमरी शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है, और बाल वाटिकाओं की शुरुआत उसी दिशा में बड़ा कदम है।”
इन बाल वाटिकाओं को सफल बनाने के लिए सरकार स्थानीय समुदाय को भी जोड़ रही है। विद्यालय प्रबंधन समितियां, ग्राम प्रधान और अभिभावकों को योजना की निगरानी में शामिल किया जा रहा है, ताकि बाल शिक्षा के स्तर पर सामूहिक जिम्मेदारी तय हो सके। बेसिक शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में सभी सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को इस तरह की बाल वाटिकाओं से जोड़ा जाए। इससे ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों के बच्चों को समान गुणवत्ता की प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध होगी और वे प्रतिस्पर्धी माहौल में आगे बढ़ सकेंगे।
Published on:
14 Aug 2025 08:25 pm
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