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मायावती ने UPI शुल्क और स्मार्ट स्कूलों पर उठाए सवाल, जनहित को बताया सरकार की पहली प्राथमिकता

BSP Mayawati: बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने UPI डिजिटल लेनदेन पर शुल्क की नई व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश में 14,429 सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने की योजना पर भी प्रतिक्रिया दी है।
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लखनऊ

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Ritesh Singh

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Updated: 18 Sep 2026, 8:42 AM IST

यूपी के स्मार्ट स्कूलों में भी बुनियादी सुविधाओं की चुनौती (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

UPI Fee Row and UP Smart Schools: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने केंद्र सरकार द्वारा यूपीआई डिजिटल लेनदेन पर शुल्क लगाने की नई व्यवस्था और उत्तर प्रदेश सरकार की 'स्मार्ट स्कूल' योजना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने सरकार की नीतियों को जनविरोधी और पूंजीवादी सोच से प्रेरित करार दिया है।

यूपीआई पर शुल्क लगाना जनता से वसूली और मुनाफाखोरी: मायावती

बीएसपी प्रमुख ने कहा कि शुरुआत में डिजिटल लेनदेन को खूब बढ़ावा देने के बाद अब सरकार द्वारा आगामी 15 अक्तूबर से यूपीआई लेनदेन पर शुल्क वसूलने की नई व्यवस्था लागू की जा रही है। उन्होंने इसे प्रथमदृष्टया मुनाफाखोरी के पूंजीवादी रवैये के तहत जनता से दोनों हाथों से टैक्स वसूली का प्रयास बताया।

'नाम कुछ भी हो, जेब आम जनता की कटेगी'

मायावती ने कहा कि अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की इस व्यवस्था को भले ही सरकार 'कर' (टैक्स) न माने, लेकिन इसे चाहे जो भी नाम दिया जाए, अंततः आम जनता की ही जेब कटेगी और उनका खर्च बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि देश की बहुसंख्यक जनता पहले से ही अपार गरीबी और जबरदस्त महंगाई की मार झेल रही है। बेरोजगारी, अशिक्षा और कुव्यवस्था से त्रस्त जनता पर इस तरह का आर्थिक बोझ डालना चिंताजनक है। सरकार की नीतियां व्यावसायिक लाभ कमाने वाली न होकर जनकल्याणकारी होनी चाहिए।

स्मार्ट स्कूल से पहले बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान दे यूपी सरकार

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के लगभग 14,500 प्राथमिक स्कूलों को 'स्मार्ट स्कूल' बनाने की घोषणा पर मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि स्कूलों को स्मार्ट बनाना अच्छी बात है, लेकिन कथित 'स्मार्ट पढ़ाई' से पहले बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी की जानी चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रति स्कूल लगभग दो लाख रुपये के बजट में बच्चों के सिर पर छत, बेंच, कुर्सी, किताबें, शौचालय, खेल का मैदान और साफ-सफाई जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं संभव हो पाएंगी? मायावती ने सरकार से मांग की है कि वह जनता की तंगी और दुखों को समझते हुए इन बुनियादी जरूरतों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे और प्राथमिकता के आधार पर काम करे।