चंबल, एक ऐसा शब्द है, जहां भी आता है जहन में अपने आप ही खून-खराबा और डकैती जैसी तमाम शब्द अपने साथ ले आता है। मातृ दिवस के खास मौके पर पत्रिका आपको एक ऐसी कहानी से रूबरू कराने जा रहा जो वाकई मातृत्व परिभाषा को बयां करेगी। यूपी के औरैया जिले के बबाइन गांव में एक टूटे मकान में 4 बहन और 2 भाई अपने मां-बाप के साथ सो रहे थे। अचानक तेज बारिश होने लगी, फिर घर के बाहर गोली चलने की आवाज आई। दरवाजा तोड़ते हुए 3 आदमी और एक औरत समेत 10 लोग घर के अंदर आए और गालियां देते हुए 13 साल की एक बच्ची को उठा कर चंबल के बीहड़ की तरफ ले गए। 13 साल की वह बच्ची कोई और नहीं बल्कि सीमा परिहार थी। सीमा परिहार जब बाहर नही निकल सकीं तो चंबल को ही अपनी दुनिया बना ली। यहां डाकू तो बनी ही लेकिन मां बनीं तो जीवन ही बदल गया।