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UP Roadway: रोडवेज में महिलाओं की धमाकेदार एंट्री, परिचालक पदों पर रचा इतिहास-पुरुष पीछे, महिलाएं तेजी से बढ़ी आगे

Transport Sector : उत्तर प्रदेश रोडवेज में इस वर्ष हुई संविदा भर्तियों ने चौंकाने वाला ट्रेंड दिखाया है। जहां पुरुष चालक बनने से कतराते दिखे, वहीं महिलाओं ने बस परिचालक के रूप में बड़ी संख्या में आगे बढ़कर कमान संभाल ली। 49% महिलाएं कंडक्टर बनीं, जबकि पुरुषों में रुझान सिर्फ 34% रहा।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Dec 04, 2025

194 पदों में 95 बनीं परिचालक, पुरुष चालक बनने से कतराए, जानें कितनी मिलती है तनख्वाह, क्यों कम है पुरुषों का रुझान     (फोटो सोर्स : Information Department )   

194 पदों में 95 बनीं परिचालक, पुरुष चालक बनने से कतराए, जानें कितनी मिलती है तनख्वाह, क्यों कम है पुरुषों का रुझान     (फोटो सोर्स : Information Department )   

Women Drive Change UP Roadways: उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) में चल रही संविदा भर्तियों ने एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है। बसों की कमान संभालने के लिए जहां पुरुष पीछे हटते दिख रहे हैं, वहीं महिलाएं उत्साह के साथ आगे आ रही हैं। यह बदलाव न सिर्फ सामाजिक सोच में परिवर्तन का संकेत है, बल्कि प्रदेश में महिला रोजगार के नए अध्याय को भी खोल रहा है। इस वर्ष रोडवेज में हुई दो प्रमुख संविदा भर्तियों में कुल 194 पदों में से 95 महिलाएं परिचालक बनी हैं, यानी 49 प्रतिशत महिलाएं अब बसों में टिकटिंग और संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगी।

इसके उलट, पुरुषों में चालक पद के लिए रुझान काफी कम देखने को मिला। दो चरणों की भर्ती में 324 पदों पर 111 पुरुष ही चालकों के रूप में चयन के लिए सामने आए, जो मात्र 34 प्रतिशत है। यह आंकड़ा साफ बताता है कि रोडवेज की नई रीढ़ महिलाएं बन रही हैं, जबकि पुरुष निजी क्षेत्र की ओर झुक रहे हैं।

दो चरणों की भर्तियों में महिलाओं ने दिखाया बढ़त

  • लखनऊ परिक्षेत्र में इस वर्ष संविदा कर्मियों के लिए दो रोजगार मेले आयोजित किए गए—
  • पहला मेले में 125 परिचालक पद
  • दूसरा मेले में 69 परिचालक पद
  • पहली भर्ती में 65, और दूसरी भर्ती में 30 महिलाएं परिचालक बनीं।

इस प्रकार कुल 95 महिलाओं का चयन हुआ। इनमे कई महिलाएं गृहणियां, छात्राएं, और निजी नौकरियों में काम कर रहीं युवतियां थीं। कई ने बताया कि उन्हें स्थिर आय और सरकारी ढांचे में काम करने का मौका आकर्षित करता है।

पुरुष चालक पद पर कम क्यों आ रहे

  • पुरुषों के लिए चालकों की भर्ती दो चरणों में हुई--
  • पहली भर्ती : 204 पदों में 75 चयन
  • दूसरी भर्ती : 120 पदों में 36 चयन
  • कुल 324 पदों में से केवल 111 ही चालक बने।
  • इस मजबूरन कम संख्या ने विभाग को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।

क्यों नहीं आ रहे पुरुष,कारणों की सूची साफ है-

1. शादी–समारोह का सीजन (सहलाग)

अधिकारियों का कहना है कि सहालग के चलते कई प्राइवेट ड्राइवर शादी-ब्याह वाली गाड़ियों में अधिक पैसा कमा लेते हैं।
इसलिए रोडवेज की भर्ती में पुरुषों की भागीदारी घटती है।

2. निजी बसों में अधिक वेतन और “ऊपरी कमाई”

  • सूत्रों के मुताबिक, निजी बसों में ड्राइवरों को
  • 20–25 हजार रुपये महीना
  • साथ में “ऊपरी कमाई”
  • और काम का कम दबाव मिल जाता है।
  • इसके मुकाबले रोडवेज में जिम्मेदारी अधिक और दायित्व भारी होते हैं।

3. चालान और दुर्घटना होने पर वेतन कटने का डर

  • रोडवेज में किसी भी दुर्घटना पर
  • मरम्मत
  • चालान
  • बस क्षति
  • की भरपाई चालक की तनख्वाह से की जाती थी। इससे पुरुषों में नौकरी लेने का डर बना रहता था।

हालांकि, इस बार रोडवेज प्रशासन ने पहली बार राहत दी है, बस दुर्घटना होने पर क्षति भरपाई में ढील दी गई है, ताकि चालक तनाव मुक्त काम कर सकें।

महिलाएं क्यों आगे आ रही हैं

महिला परिचालकों के सामने यह नौकरी कई मायनों में सुरक्षित और व्यवस्थित विकल्प बनी है-

1. राज्य सरकार की सुरक्षा और सम्मान नीति

  • महिला कर्मियों के लिए
  • सुरक्षित ड्यूटी
  • व्यवस्थित रूट
  • हेल्पलाइन
  • महिला मित्र मंडल
  • जैसी सहूलियतें मिलने से भरोसा बढ़ा है।

2. स्थायी जैसी नौकरी का अनुभव

  • संविदा होने के बावजूद
  • नियमित काम
  • मासिक आय
  • लंबे समय तक सेवा
  • कई महिलाओं को आकर्षित कर रहा है।

3. सामाजिक बदलाव और परिवार का साथ

  • अब परिवार भी बेटियों को बस परिचालक के रूप में बाहर भेजने में हिचक नहीं दिखाते।
  • यह बदलाव समाज में बढ़ी जागरूकता का संकेत है।
  • तनख्वाह, भत्ते और सुविधाएं, संविदा में भी पैकेज मजबूत

रोडवेज में संविदा चालकों व परिचालकों को 2.06 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान मिलता है। औसतन उनके हाथ करीब 18,000 रुपये महीना आ जाते हैं।

इसके अलावा--

  • 1 करोड़ रुपये का इंश्योरेंस
  • दुर्घटना में मृत्यु पर 7.50 लाख रुपये
  • घायल होने पर 10,000 रुपये
  • गंभीर घायल होने पर 25,000 रुपये
  • परिवार के लिए 5 निशुल्क यात्रा पास

ये सुविधाएं निजी सेक्टर में बिल्कुल नहीं मिलतीं। यही कारण है कि महिलाएं इसे सुरक्षित और भरोसेमंद नौकरी मान रही हैं।

संविदा भर्ती का सिलसिला जारी रहेगा

रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक आरके त्रिपाठी ने बताया कि महिला परिचालकों की भर्ती में बेहतरीन रुझान मिला है। आगे भी रोजगार मेले आयोजित किए जाएंगे। हमारा प्रयास है कि बस संचालन बेहतर हो और यात्रियों को सुरक्षित सुविधा मिले।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी,रोडवेज में नई तस्वीर

  • यह भर्ती सिर्फ संख्या का खेल नहीं, बल्कि एक बड़ा संदेश है। 
  • महिलाएं अब परिवहन जैसे पुरुष-प्रधान क्षेत्र में भी नेतृत्व कर रही हैं।
  • बसों में यात्रियों को टिकट देना
  • संचालन संभालना
  • विवाद समाधान
  • सफर के दौरान सुरक्षा
  • इन सभी जिम्मेदारियों को महिलाएं सफलता से निभा रही हैं।
  • यह बदलाव न सिर्फ रोजगार बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का भी प्रतीक है।