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एमपी में जल जीवन मिशन की नल जल योजना में बड़ी धांधली

mp news: जल जीवन मिशन में धांधली, नल कनेक्शनों में नल और टोटी नहीं तो कहीं-कहीं पर प्लेटफार्म ‘गायब’..।

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mandsaur nal jal yojna

mandsaur nal jal yojna

mp news: मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत एकल नल जल प्रदाय योजना में बड़ी धांधली सामने आई है। यह धांधली उस वक्त सामने आई है जब खुद जनपद पंचायत के अधिकारियों ने इसका जमीन स्तर पर सत्यापन किया। सत्यापन में सामने आया कि ग्रामीणों को नल कनेक्शन तो दे दिया लेकिन केवल केबल डालकर, कहीं प्लेटफार्म नहीं बनाया और नल लगाना तो छोड़ो टोटियां तो ज्यादातर जगह नहीं लगाई गईं। बिना नल-टोटी और प्लेटफॉर्म बनाए ही संबंधित ठेकेदारों ने काम पूरा होने की बात कह पंचायतों को ओवरहेंड भी कर दिया है।

192 गांवों में नल जल योजना का हुआ काम

जानकारी के अनुसार जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर नल हर घर जल को लेकर प्रत्येक घर में नल कनेक्शन लगाकर उसका प्लेटफार्म बनाने के साथ-साथ नल लगाकर टोटी भी देना थी। इस योजना के तहत 192 गांवों में 64 हजार 865 नल कनेक्शन देना थे। जिसमें 192 गांवों में से 172 गांवों को तो घोषित कर दिया कि यहां पर कनेक्शन जितने हैं उसके अतिरिक्त नहीं चाहिए और इनमें से 144 के पूरे होने का प्रमाण पत्र लेकर 137 गांवों में इस योजना को संबंधित पंचायतों को ओवरहेंड भी कर दिया।

सत्यापन में खुली धांधली की पोल

जिला पंचायत सीईओ को इस योजना के अंतर्गत शिकायत मिली तो उन्होंने कुछ ओवरहेंड की गई ग्राम पंचायतों का सत्यापन करवाया। जिसमें सामने आया कि नलों के प्लेटफार्म अधिकांश जगह नहीं बनाए गए। यानि की सीमेंट का पूरा पैसा बचा लिया गया। इसके अलावा नल और टोटी नहीं लगाए गए इसका पैसा भी गायब कर दिया गया है। कागजों में ये भी बताया गया है कि इन 192 गांवों में 183.39 किलोमीटर रोड खोदी गई और इसमें से 182 किमी. की रोड को वापस भर दिया गया है। जबकि जमीन स्तर पर ऐसा नहीं हुआ है और कई जगहों पर रोड की मरम्मत का काम ही नहीं किया गया है। पाइप लाइन की गहराई को लेकर भी गड़बड़ी मिली है।

ये बोले जिम्मेदार

जिला पंचायत सीईओ अनुकूल जैन का कहना है कि एकल नल जल योजना को लेकर कई शिकायतें मिल रही थी। जिसको लेकर ओवरहेंड की गई पंचायतों का भौतिक सत्यापन करवाया। उसमें कई तरह की कमियां निकली। जब शिकायतें बढ़ी तो एसडीएम की अध्यक्षता में एक टीम का गठन किया गया है। जो जांच करेगी। इसके अलावा दिशा की बैठक में सांसद द्वारा निर्देशित किया गया। उसके लिए तीन कार्यपालन यंत्री का एक जांच दल अलग से गठित किया गया। दोनों जांच दलों की रिपोर्ट मिलेगी और शासन को प्रेषित की जाएगी। सचिव और सरपंच टेक्निकल मजबूत नहीं होते है। यह पीएचई के द्वारा पूर्ण कर ओवरहेंड देना थी।