
सेंसेक्स की जगमगाहट के बीच छोटे शेयरों में गिरावट ने निवेशकों की त्योहार से जुड़ी उम्मीदों पर चिंता की छाया डाल दी है। ( फोटो डिजाइन: ChatGPT)
दिवाली की आहट है। बाज़ारों में रंग-बिरंगी झालरें सजने लगी हैं। हर दुकानदार चाहता है कि उसके आँगन में लक्ष्मी के क़दम पड़ें। लेकिन शेयर बाज़ार की कहानी कुछ अलग है। यहाँ बड़ी कंपनियों की हवेलियाँ रोशनी से जगमगा रही हैं, जबकि कई छोटे निवेशकों के घरों में उम्मीदों के दीये मद्धम हैं। गुरुवार, 15 अक्टूबर को सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1,000 अंकों से अधिक उछला, मगर छोटे शेयरों में कमज़ोरी दिखाई दी। सवाल है, जब बाज़ार इतना चढ़ रहा है, तो आम निवेशक का पोर्टफ़ोलियो क्यों नहीं चमक रहा?
गुरुवार के उपलब्ध कारोबारी आँकड़ों में सेंसेक्स 73,656.40 और निफ़्टी 22,881.90 पर दर्ज हुए। इनमें क्रमशः 1.21 प्रतिशत और 1.15 प्रतिशत की बढ़त थी। सूचना प्रौद्योगिकी तथा वित्तीय कंपनियों ने तेज़ी को सहारा दिया। इसके विपरीत छोटे शेयरों का समूह लगभग 0.6 प्रतिशत गिरा। यानी बाज़ार की बड़ी तस्वीर हरी थी, मगर उसके भीतर कई हिस्सों में लाल निशान मौजूद थे। ये अंतिम बंद भाव नहीं, बल्कि उपलब्ध कारोबारी स्थिति के आँकड़े हैं।
| सूचकांक | स्तर/स्थिति | बदलाव |
|---|---|---|
| सेंसेक्स | 73,656.40 | +1.21% |
| निफ़्टी 50 | 22,881.90 | +1.15% |
| छोटे शेयर | दबाव | −0.60% |
| मझोले शेयर | बढ़त | +0.30% |
| सूचना प्रौद्योगिकी | तेज़ी | +2.40% |
| क्षेत्रीय सूचकांक | 12/16 चढ़े | सकारात्मक |
स्रोत: रॉयटर्स, 15 अक्टूबर 2026 का कारोबारी अपडेट। बदलाव पिछले बंद स्तर की तुलना में; आँकड़े अंतिम समापन के नहीं हैं।
सेंसेक्स में केवल 30 प्रमुख कंपनियाँ हैं। इनका प्रभाव उनके मुक्त प्रवाह बाज़ार पूँजीकरण के अनुसार निर्धारित होता है। इसलिए अधिक भारांश वाली कंपनियों में बड़ी तेज़ी पूरे सूचकांक को ऊपर उठा सकती है। गुरुवार को एचसीएल टेक्नोलॉजीज़, इंफ़ोसिस, टीसीएस और प्रमुख बैंकों की मज़बूती ने यही असर दिखाया। रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने भी बढ़त को सहारा दिया। लेकिन सूचकांक का बढ़ना इस बात की गारंटी नहीं कि अधिकांश सूचीबद्ध शेयर भी चढ़ रहे हैं।
छोटे शेयरों की कहानी और मार्मिक है। 15 अक्टूबर तक प्रकाशित वर्ष 2026 के विश्लेषण के अनुसार, निफ़्टी स्मॉलकैप 250 की 250 कंपनियों में से 148 के शेयरों ने वर्ष की शुरुआत से नकारात्मक प्रतिफल दिया। कुछ शेयरों में गिरावट लगभग 70 प्रतिशत तक पहुँची। इसके बावजूद संबंधित सूचकांक सात प्रतिशत से अधिक चढ़ा था। अर्थात कुछ बेहतर प्रदर्शन करने वाले शेयरों का प्रभाव कमज़ोर कंपनियों के नुक़सान पर भारी पड़ गया।
| पैमाना | आँकड़ा | संकेत |
|---|---|---|
| कुल कंपनियाँ | 250 | 100% |
| नुक़सान वाले शेयर | 148 | 59.2% |
| शेष शेयर | 102 | 40.8% |
| सूचकांक बढ़त | 7% से अधिक | सकारात्मक |
| अधिकतम गिरावट | लगभग 70% | गंभीर |
| गणना का आधार | 2026 | वर्षारंभ से |
स्रोत: 15 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित शेयर-प्रदर्शन विश्लेषण; सूचकांक संरचना के लिए एनएसई इंडाइसेज़। 102 शेष शेयरों में शून्य अथवा सकारात्मक प्रतिफल वाले शेयर शामिल हैं। प्रतिशत की गणना 148÷250 के आधार पर।
बाज़ार में अँधेरा फैलाने वाला एक कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। अक्टूबर के शुरुआती छह कारोबारी सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की शुद्ध बिकवाली लगभग 45,125 करोड़ रुपये बताई गई। वहीं, वर्ष के शुरुआती नौ महीनों में विदेशी पोर्टफ़ोलियो निवेशकों की निकासी तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक रही। वैश्विक अनिश्चितता, डॉलर और बॉन्ड प्रतिफल का आकर्षण तथा भारतीय शेयरों के मूल्यांकन को लेकर चिंताएँ निवेशकों के व्यवहार को प्रभावित कर रही हैं।
जब सरकारी बॉन्ड पर अपेक्षाकृत बेहतर प्रतिफल मिलने लगता है, तब जोखिमभरे शेयरों का आकर्षण घट सकता है। विशेषकर छोटी कंपनियों के लिए महँगा कर्ज़ विस्तार और मुनाफ़े की संभावनाएँ प्रभावित करता है। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी महँगाई और ब्याज दरों की आशंकाएँ भी निवेशकों को सावधान कर रही हैं। हालाँकि सभी छोटे शेयरों की गिरावट को केवल बॉन्ड प्रतिफल से जोड़ना सही नहीं होगा।
तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। भारतीय म्यूचुअल फ़ंडों में सितंबर के दौरान शेयर योजनाओं में लगभग 38,307 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। छोटी कंपनियों पर केंद्रित योजनाओं में करीब 9,039 करोड़ रुपये और मझोली कंपनियों की योजनाओं में 7,845 करोड़ रुपये पहुँचे। व्यवस्थित निवेश योजनाओं के माध्यम से निवेश लगभग 32,490 करोड़ रुपये रहा। यानी छोटे शेयरों से निवेशकों का मोह समाप्त नहीं हुआ है; बल्कि पूँजी का प्रवाह और व्यक्तिगत शेयरों का प्रदर्शन अलग-अलग दिशाओं में चल सकते हैं।
दिवाली पर समझदार परिवार अपनी पूरी जमा-पूँजी केवल सजावट पर ख़र्च नहीं करता। कुछ धन ज़रूरतों, कुछ बचत और कुछ भविष्य के लिए रखता है। निवेश में भी यही विवेक आवश्यक है। केवल तेज़ी देखकर छोटे शेयर ख़रीदना ख़तरनाक हो सकता है। कंपनी का कर्ज़, नक़दी प्रवाह, आय, प्रबंधन और मूल्यांकन जाँचना चाहिए। विविधीकृत निवेश तथा लंबी अवधि की व्यवस्थित निवेश योजना उपयोगी हो सकती है। हालाँकि इनके माध्यम से भी लाभ की गारंटी नहीं मिलती।
शेयर बाज़ार की चमक हमेशा निवेशकों की वास्तविक समृद्धि का प्रतिबिंब नहीं होती। सेंसेक्स के हज़ार अंक कभी कुछ बड़ी कंपनियों की कहानी सुनाते हैं, तो छोटे शेयरों का बिखरा प्रदर्शन हज़ारों परिवारों की चिंता बयान करता है। इस दिवाली निवेशकों के लिए सबसे बड़ी सीख यही है-सिर्फ़ रोशनी देखकर दौड़ना नहीं, बल्कि उस दीये की मज़बूती पहचानना है, जो मुश्किल मौसम में भी जल सके। ज़रूरत के अनुसार पोर्टफ़ोलियो की समीक्षा और पंजीकृत निवेश सलाहकार का मार्गदर्शन उपयोगी रहेगा।
Published on:
15 Oct 2026 11:51 am
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