पश्चिमी उप्र में विस प्रत्याशियों का नाम तय करने में जुटी भाजपा चुनौतियां की भंवर में खड़ी थी। पार्टी पर 2017 का प्रदर्शन दोहराने का भारी दबाव है, जबकि ज्यादातर विधायकों के खिलाफ मतदाताओं में नाराजगी भी है। पार्टी के कुछ विधायकों के सपा में जाने के बाद अब भाजपा आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढी है। पार्टी बड़ी संख्या में नए चेहरों को मौका देने की तैयारी में थी। बता दे कि माना जा रहा था कि पश्चिम यूपी की 71 सीटों में से दर्जनों का टिकट कटने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन जबसे पार्टी में भगदड़ की स्थिति बनी उसके बाद से पार्टी ने अपने निवर्तमान विधायकों पर दांव खेला है। वहीं कुछ सीटों पर फेरबदल किया गया है।