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दलितों को साधने के लिए भाजपा ने शुरू किया ये काम तो मायावती भी हो गई परेशान, देखें वीडियो

खास बातें भाजपा के कार्यक्रमों की शुरुआत में दिख रहा इसका असर कार्यकर्ताओं से लेकर पार्टी के बड़े नेता कर रहे हैं ये काम लोक सभा चुनाव के बाद भाजपा दलितों के लिए चिंतित
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मेरठ

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Sanjay Kumar Sharma

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Updated: 22 Aug 2019, 3:20 PM IST

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केपी त्रिपाठी, मेरठ। दलित वोटों को साधने के लिए अब भाजपा ने डा. बीआर अंबेडकर का सहारा लेना शुरू कर दिया है। भाजपा के किसी भी कार्यक्रम की शुरूआत अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण से हो रही है। मेरठ आए भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने भी सबसे पहले डा. भीमराव अंबेडकर को माल्यार्पण किया। देखने में भले ही ये छोटी सी बात रही हो, लेकिन उनके इस कार्य के मायने राजनीति हलकों में कई पार्टियों को बेचैन कर गए। इनमें प्रमुख रूप से बसपा है।

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भाजपा को दलितों के छिंटकने का डर

आज भाजपा भले ही सत्ता में है, लेकिन उसे कहीं न कहीं इस बात का डर उत्तर प्रदेश में है कि दलित अभी भी भाजपा को पूरी तरह से आत्मसात नहीं कर सके। दलितों के दिल में मायावती प्रेम कहीं न कहीं जरूर है। इसी कारण से भाजपा दलितों के दिल से मायावती का प्रेम निकालना चाहती है। इसलिए ही शायद हर कार्यक्रम के पहले भाजपा नेता संविधान निर्माता डा. भीमराव अंबेडकर को माल्यार्पण करना नहीं भूलते। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि प्रदेश के मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने में वे सफल रहे हैं, लेकिन दलित वोट का ध्रुवीकरण न होना उनके लिए चिंता का कारण बना हुआ है। इसलिए प्रदेश में अब पार्टी ने अंबेडकर माल्यार्पण अभियान चलाया है। जिसका मतलब है कि पार्टी का कोई भी कार्यक्रम हो उसकी शुरुआत अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद ही हो। मेरठ में अब तक जितने भी कार्यक्रम हुए हैं। उनमें से सभी कार्यक्रमों में भाजपा नेताओं ने दलित प्रेम दिखाते हुए अंबेडकर की प्रतिमा पर सर्वप्रथम माल्यार्पण किया।

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दलित-मुस्लिम गठजोड़ को तोड़ने की कोशिश

पिछले दिनों हुए लोकसभा चुनाव के दौरान सपा-बसपा महागठबंधन भले ही आशा के अनुरूप परिणाम नहीं दे पाया। लेकिन ये महागठबंधन कहीं न कहीं भाजपा को नुकसान जरूर पहुंचा गया। बसपा को इसका लाभ मिला और जो बसपा 2014 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी वह 2019 के चुनाव में 11 सीटें जीत गई। हालांकि महागठबंधन में सपा को भारी नुकसान उठाना पड़ा। भाजपा को पता है कि आगे भी अगर सत्ता में बने रहना है तो मुस्लिम-दलित गठजोड़ को तोड़ना होगा।

मायावती की चाल भांपने की कोशिश

कश्मीर में धारा 370 हटाने का समर्थन करना बसपा प्रमुख मायावती की मजबूरी थी। केंद्र सरकार को समर्थन देने के बाद से बसपा का लगा कि उससे मुस्लिम वर्ग नाराज हो सकता है। इसलिए ही मायावती ने मुस्लिम वर्ग से ही प्रदेशाध्यक्ष भी बना डाला। मेरठ के मुनकाद अली को बसपा ने प्रदेशाध्यक्ष बनाकर मुस्लिमों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे मुस्लिम हितैषी हैं।

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