
मेरठ. बिहार चुनाव में हुई दुर्गति पर ईमानदारी से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मंथन किया तो यह बिल्कुल साफ दिखाई देगा कि कांग्रेस सत्तर-अस्सी के दशक की अपनी 'मध्यमार्गी राजनीति' के समावेशी नैरेटिव का संदेश जनता तक नहीं पहुंचा पा रही है। यह कहना है एआईसीसी के सदस्य और वरिष्ठ कांग्रेसी सतीश शर्मा का। वरिष्ठ कांग्रेसी सतीश शर्मा सहित जिले और प्रदेश के दिग्गज कांग्रेसी आज पार्टी की दुर्गति से काफी आहत हैं। इस संबंध में सतीश शर्मा ने शीर्ष नेतृत्व को ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने पार्टी की गिरती साख पर मंथन करने को कहा है। साथ ही एआईसी सेशन बुलाकर पूर्णकालीन अध्यक्ष का चुनाव करने की भी मांग की है।
1995 से लगातार कमजोर होती गई पार्टी
वरिष्ठ कांग्रेस नेता सतीश शर्मा का कहना है कि बिहार हो या अन्य राज्य। पार्टी की स्थिति 1995 से लगातार कमजोर हो रही है। इसके लिए हम सबको मंथन करना होगा। इसके कारणों को तलाशकर उन पर काम करना होगा। बिहार में बीजेपी के मजबूती से उभरने की वजह से लोकसभा में भी पार्टी की हालत पतली होने लगी कांग्रेस 1996 के लोकसभा चुनाव में बिहार की 54 सीटों में से केवल 3 सीटें ही जीत पाई थी। यह पार्टी के लिए बेहद शर्मनाक स्थिति है। उसके बाद से पार्टी की स्थिति चुनाव-दर-चुनाव गिरती ही गई। राज्यों में हुए उपचुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हुई भारी दुर्गति से एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि बदली राजनीति में सबसे कारगर साबित हो रहे 'नेतृत्व' और 'नैरेटिव' के दो सबसे अहम मानकों पर पार्टी खरी नहीं उतर पा रही है।
भाजपा का विकल्प बनने से चूक रही कांग्रेस
खुद को धर्मनिरपेक्षता की वैचारिक लड़ाई की सबसे मजबूत ताकत के रूप में पेश करने के बावजूद नेतृत्व और नैरेटिव की इस कमजोरी के कारण ही भाजपा का विकल्प बनने से कांग्रेस बार-बार चूक रही है। उसकी इस कमजोरी का फायदा क्षेत्रीय दलों और उसके क्षत्रपों को सीधे तौर पर मिल रहा है। राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद राष्ट्रीय नेतृत्व के विकल्प को लेकर पार्टी का लगातार जारी असमंजस काफी हद तक कांग्रेस के इस संकट के लिए जिम्मेदार है। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भाजपा को कमजोर करने की रणनीति के तहत कांग्रेस नेता सांत्वना भले तलाश लें मगर सियासी हकीकत तो यही है कि बिहार और उपचुनावों में दुर्गति ने नेतृत्व को लेकर पार्टी की चुनौती को और बढ़ा दिया है।
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुई मुखर तो मिला समर्थन
कांग्रेस ने नागरिकता संशोधन कानून-एनआरसी के खिलाफ भाजपा को सीधी चुनौती दी। शाहीन बाग के विरोध प्रदर्शन, जामिया और जेएनयू के छात्रों के साथ हुई हिंसा-गुंडागर्दी के खिलाफ पार्टी ने केवल मुखर रही, बल्कि उसके कई नेता समर्थन जताने के लिए इन सबके साथ खड़े भी हुए, लेकिन भाजपा के हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद के सियासी दांव के फंदे में कांग्रेस बार-बार उलझती दिखाई पड़ी। कांग्रेस के इस उलझन का साफ तौर पर फायदा भाजपा और अन्य दलों ने उठाया है।
Published on:
12 Nov 2020 11:56 am
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