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यूपी में शराब की दुकान पर बड़े खेल का खुलासा, अंग्रेजी के साथ बेची जा रही देसी शराब

Highlights- विभाग की सरपरस्ती में ठेकेदार ने ताक पर रखे नियम- ओवर रेट की तमाम शिकायतों के बाद भी नहीं हो रही कार्यवाही- क्षेत्र की निर्धारित देशी दुकान के संचालक ने पकड़ा खेल

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मेरठ

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lokesh verma

Jun 15, 2020

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मेरठ. आबकारी विभाग द्वारा छोड़े गए शराब के ठेकों पर जमकर मनमानी का खेल चल रहा है। ओवररेट की तमाम शिकायतें तो आम हैं ही अब एक नया कारनामा सामने आया है। अंग्रेजी शराब की दुकान पर खुलेआम देशी शराब भी बेची जा रही है। दरअसल, अंग्रेजी दुकान का ठेकेदार अपनी दूसरी देशी दुकान का माल लाकर अंग्रेजी की दुकान पर बिकवा रहा था। क्षेत्र की निर्धारित देशी दुकान के संचालक ने रंगे हाथ यह खेल पकड़ा तो पूरी पोल खुल गई। पता चला कि कई दिनों से उक्त अंग्रेजी दुकान की आड़ में देशी शराब बेची जा रही थी। आरोप है कि यह सारा खेल विभागीय अधिकारियों की सरपरस्ती में चल रहा था। इसीलिए मामला खुलते ही उस पर लीपापोती की कवायद भी शुरू हो गई है।

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मामला खरखौदा थाना क्षेत्र की फफूंडा गांव की अंग्रेजी शराब की दुकान का है है। यहां दो अंग्रेजी शराब के ठेके हैं। ये दोनों अंग्रेजी शराब ठेका 'क' और 'ख' के नाम से आवंटित हुए थे। मामला ख दुकान से जुड़ा है, जिसका आवंटन कुछ दिन पहले ही अमित प्रधान के नाम से हुआ था। उनके पिता राजकुमार प्रधान की गढ़ रोड पर शांतिकुंज नाम से देशी शराब की दुकान है। आरोप है कि बीते कई दिनों से यहां अंग्रेजी शराब की आड़ में देशी शराब भी बेची जा रही थी। जबकि पहले से ही फफूंडा में देशी शराब की दुकान अश्वनी शर्मा के नाम से चल रही है। ठेकेदार अश्वनी ने बताया कि बीते कुछ दिनों से एकाएक उनकी दुकान की बिक्री गिर गई। उन्होंने पता किया तो जानकारी मिली कि गांव के भट्टे के पास चल रही अंग्रेजी शराब की दुकान पर गुपचुप तरीके से देशी शराब की बिक्री की जा रही है। यह सुनते ही वह खुद ही अपने साथी को लेकर मौके पर पहुंचे और अपना एक आदमी भेजकर देशी शराब की खरीद कराई।

अंग्रेजी दुकान पर बैठे सेल्समैन ने तुरंत ही दुकान के बराबर में पड़े खाली प्लाट से देशी शराब के दस पव्वे लाकर उसे दे दिए। यह देखते ही वह भी दुकान पर पहुंच गए और उसके फोटो और वीडियो बनानी शुरू कर दी। इसको लेकर काफी देर तक वहां गहमागहमी भी चलती रही। अश्वनी शर्मा ने बताया कि उन्होंने देशी शराब के पव्वों को स्कैन करके देखा तो पता चला कि वो गढ़ रोड स्थित शांतिकुंज की देशी दुकान के थे, जिन्हें यहां लाकर बेचा जा रहा था। उन्होंने इसकी जानकारी विभागीय इंस्पेक्टर को दी। सूचना पर डायल 112 और थाने की पुलिस भी पहुंच गई। हालांकि काफी देर तक चले हंगामे के बाद भी विभागीय अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे और इस पूरे खेल पर पर्दा डालने की कवायद शुरू हो गई।

बताया जाता है कि आरोपी ठेका संचालक की आबकारी विभाग में अच्छी पैठ है। इसलिए वह धड़ल्ले से नियम कानूनों को ठेंगा दिखाने में लगा हुआ है। इसका अंदाजा इस बात से भी दिखा कि नई दुकान खोलने के बाद उसने हाइवे पर जगह जगह शराब की दुकान के प्रचार करते बड़े बड़े होर्डिंग लगा दिए। यहां तक की सरकारी यूनिपोल पर भी उसने अंग्रेजी शराब का प्रचार करता होर्डिंग लगा दिया। जबकि यह सीधे सीधे सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन है। कोर्ट के आदेश पर शराब के प्रचार पर पूरी तरह रोक है, लेकिन विभाग की शह पर वह खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाने में लगा है और अधिकारियों ने आंखें मूंद ली हैं। इस मामले में सेक्टर चार के इंस्पेक्टर धमेंद्र वर्मा से जब बात की गई तो उनका कहना था कि उन्हें इसकी जानकारी मिली और वो इसकी जांच कर रहे हैं। उनसे जब यह जानकारी की गई कि क्या अंग्रेजी के ठेके पर देशी शराब की बिक्री हो सकती है तो उन्होंने कहा कि यह गलत है। अभी जांच चल रही है। अगर ऐसा हुआ है तो ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इंस्पेक्टर ने मामले में पूरी लीपापोती कर दी।

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