
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ. कोरोना काल में सबसे ज्यादा मुनाफा मिलावटखोरों ने कमाया है। दवा से लेकर सेनेटाइजर और अन्य चीजों की नकली माल बनाकर बाजार में बेचकर लाखों कमाए हैं। कोरोना काल में जहां जीवनरक्षक दवाओं का बाजार में अकाल पड़ गया, वहीं नकली दवाओं का कारोबार भी खूब फल फूल रहा है। कोरोना संक्रमण के चलते जीवन रक्षक दवाओं के साथ ही सैनिटाइजर की मांग भी खूब बढ़ी। जिसके चलते नकली दवाओं का कारोबार करने वालों ने नामी कम्पनियों के नकली सैनिटाइजर मार्केट में उतार दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, ब्रह्मपुरी निवासी एक व्यक्ति ने नामी कम्पनी पारले के सैनिटाइजर की 5 लीटर की एक केन खरीदी। उपभोक्ता ने जब इस नामी कम्पनी पारले के सैनिटाइजर की केन को खोलकर छोटी स्प्रे बोतल में भरने लगा तो पता चला कि यह सैनिटाइजर एकदम नकली है। जांच के लिए एक कटोरी में सैनिटाइजर डालकर जलाकर देखा तो इसकी पुष्टि हो गई की मात्र पानी और नीले रंग के अलावा इसके कुछ नहीं है। उपभोक्ता ने तत्काल पारले कम्पनी के टोल फ्री नम्बर 1800-180-5250 पर सम्पर्क किया तो कॉल रिसिव करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम सुमित श्रीवास्तव बताया और उपरोक्त सैनिटाइजर की व्हाट्सएप पर फोटो भेजने को कहा। उपभोक्ता ने ऐसा ही किया।
इसके बाद सुमित श्रीवास्तव ने बताया कि यह सैनिटाइजर एकदम नकली है, कैन पर पड़ा बैच नम्बर भी हमारा नहीं है। सुमित श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि हमारी कम्पनी ने मेरठ जनपद में इस वर्ष सैनिटाइजर की सप्लाई नहीं की है। अब प्रश्न यह उठता है कि जब पारले जी कम्पनी ने मेरठ में सैनिटाइजर की सप्लाई नहीं की है तो फिर यह नकली सैनिटाइजर मार्केट में कहां से आ रहा है? इस मामले में पीड़ित उपभोक्ता ने थाने में तहरीर दी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
Published on:
23 Jun 2021 03:40 pm
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