
मेरठ। लॉकडाउन के चलते श्रमिकों का रोजगार छिन जाने से अब श्रमिकों की घर वापसी के लिए होड़ मची है। कोई पैदल, कोई ट्रकों पर, कोई रिक्शे से अपने गांव-घर के लिए निकल पड़ा है। ऐसे में एक श्रमिक अपने परिवार और सामान के साथ रिक्शे से घर के लिए निकल पड़ा। यह चार दिन पहले करनाल से चला और इसको मुजफ्फनगर जाना है। मुजफ्फनगर का रहने वाला छोटा करनाल में रिक्शा चलाकर अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रहा था। लॉकडाउन के कारण रोजी खत्म हुई तो सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया। कोई साधन नहीं मिलते देख वह रिक्शे में अपने परिवार को बैठाकर और उसमें पीछे गृृहस्थी लादकर चल पड़ा। छोटा बताता है कि उसे चार दिन हो गए हैं, करनाल से चले हुए।
रास्ते में किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली। गांव वालों ने जरूर उसकी मदद की। जहां भी जरूरत पड़ती है गांव वालों से खाना बनाने के लिए आटा और अन्य सामग्री ले लेता है और कहीं भी सड़क के किनारे खाना बनाकर अपना और बच्चों का पेट भर लेता है। छोटा कहता है कि मार्च माह में अचानक लॉकडाउन होने से काम बंद हो गया। एक माह तक काम शुरू होने की उम्मीद में वे लोग करनाल में रहे, लेकिन एक के बाद एक लॉकडाउन बढ़ता गया। इससे उसके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। उसके साथी पैदल और ट्रकों से निकल चुके थे, लेकिन वह अपनी विकलांग पत्नी को छोड़कर कहां जाता। उसने रिक्शे से ही अपने घर आने का मन बनाया। करनाल से मुजफ्फरनगर आने के लिए कोई साधन न मिलने से वह बीस दिन तक परेशान रहा। आखिर में वहीं पुराना रिक्शा और परिवार के सभी लोगों को रिक्शे में बैठाकर निकल पड़ा वह अपने घर के लिए।
छोटा का कहना है कि रास्ते में दो दिन भूखे रहकर रिक्शा चलाया। बच्चों को पानी में बिस्किट देकर बहलाया। छोटा की पत्नी कहती है कि करनाल अब कभी नहीं जाऊंगी। घर में रूखी-सूखी खाकर रहूंगी, लेकिन बाहर की तरफ अब रुख नहीं करना है। 35 साल की उम्र में ऐसा समय पहले कभी नहीं देखा है। लॉकडाउन के बाद मानों दुखों का पहाड़ टूट गया हो। आटा, सब्जी, दवा सब बंद हो गया था। कभी सूखी रोटी तो कभी भूखे पेट बच्चों को सुलाया। कुछ दिन बाद आटा और सब्जी मिली।
Published on:
17 May 2020 07:18 pm
बड़ी खबरें
View Allमेरठ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
