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हस्तिनापुर बनेगा आइकोनिक साइट, महाभारत कालीन पांडव टीला के बदलेंगे दिन

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अंतर्गत संरक्षित है पांडव टीलापांडव टीले पर मौजूद अवशेषों को तलाशने का काम प्रारंभ

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मेरठ

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shivmani tyagi

Jul 12, 2021

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मेरठ दशकों से उपेक्षा का दंश झेल रहा महाभारत के गवाह हस्तिनापुर के दिन अब बहुरने वाले हैं। हस्तिनापुर स्थित महाभारत कालीन पांडव टीला अब आइकोनिक साइट बनने जा रहा है। इसके लिए पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। जल्द ही पांडव टीला सहित हस्तिनापुर स्थित महाभारतकालीन की अन्य धरोहर निखरी और आइकोनिक साइट के रूप में नजर आएंगी।

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एएसआइ की टीम ने आज से यहां पर कार्य प्रारंभ कर दिया है। टीम पांडव टीले पर मौजूद अवशेषों को निखारने व आसपास नए अवशेषों को तलाशने की का काम करेगी। बता दें कि हस्तिनापुर स्थित पांडवटीला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अंतर्गत संरक्षित है। इसमें महाभारत कालीन अवशेष व महाभारत कालीन रहस्य दफन हैं। समय-समय पर टीले से पौराणिक अवशेष मिलते भी रहते हैं। इन अवशेषों को एएसआइ संरक्षित कर रही हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीक्षण पुरातत्वविद् डीबी गणनायक ने बताया कि मेरठ सर्किल के अंतर्गत सभी उपमंडल कार्यालयों से कर्मचारियों को बुलाया गया है। इन लोगों ने आज से कार्य प्रारंभ कर दिया है।

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उन्होंने बताया कि फिलहाल पांडव टीले के तीन स्थान जयंती माता मठ, राजा रघुनाथ महल व अमृत कूप के समीप कार्य प्रारंभ होगा। उन्होंने बताया कि टीले पर पहले से मौजूद पुरातात्विक महत्व वाले स्थानों को निखारा जाएगा और उसके इर्द-गिर्द सफाई की जाएगी। इसके अलावा इन स्थानों पर महत्ता दर्शाने वाले साइन बोर्ड भी लगाए जाएंगे। इससे पांडव टीले पर आने वाले पर्यटक हमारी प्राचीन धरोहरों को विस्तार व सुगमता से जान सकेंगे।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने दिया था आश्वासन
गत फरवरी में तत्कालीन केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने पांडव टीले का निरीक्षण किया था। उन्होंने पांडव टीले को आइकोनिक साइट में विकसित करने की बात कही थी।

सैकड़ों साल से उपेक्षा का दंश झेल रहा हस्तिनापुर
कहते हैं हस्तिनापुर को द्रोपदी का श्राप लगा हुआ है। जिसके कारण यह आज तक कोई विकास नहीं कर पाया। हस्तिनापुर इतिहास की धरोहर तो है लेकिन यह आज तक पर्यटक नगरी के रूप में अपना कोई मुकाम नहीं बना पाया। महाभारत कालीन इन कस्बे में आज भी पांडव—कौरवों से संबंधित धरोहरें निकलती रहती हैं।

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