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बड़ा फैसला: आपराधिक छवि वाले नेताओं को यह राष्ट्रीय पार्टी नहीं देगी लोकसभा का टिकट, आवेदन की तिथि बढ़ाई

सपा के प्रदेशाध्यक्ष नरेश उत्तम ने साफ कहा किसी भी कीमत पर दागदार या अपराधिक किस्म के व्यक्ति को पार्टी 2019 में लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ाएगी

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मेरठ

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lokesh verma

Jul 22, 2018

meerut

बड़ा फैसला: आपराधिक छवि वाले नेताओं को यह राष्ट्रीय पार्टी नहीं देगी लोकसभा का टिकट, आवेदन की तिथि बढ़ाई

मेरठ. 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी हर कदम फूंक-फूंककर रख रही है। यही वजह है कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2017 के आखिर में ही इसकी गाइडलाइन जारी कर दी थी। इसका फार्म भी अब जारी कर दिया गया है। ताजा जारी फार्म में यह बताया गया है कि लोकसभा-2019 के टिकट के लिए आवेदन करने के लिए आवेदक को इन मानकों को पूरा करना होगा। अखिलेश यादव ने इस बार स्वच्छ छवि और अपराधिक इतिहास वाले प्रत्याशियों को टिकट न देने का फैसला किया है। इसका उम्मीदवार के घोषणा पत्र में बकायदा उल्लेख किया जाएगा। यदि आवेदक के ऊपर एक भी आपराधिक मुकदमा दर्ज है तो उसको पार्टी लोकसभा का टिकट नहीं देगी। यहां बता दें कि पहले आवेदन की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2018 रखी गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 31 अगस्त 2018 कर दिया गया है। सपा के प्रदेशाध्यक्ष नरेश उत्तम ने बताया कि पार्टी अब किसी भी दागदार या अापराधिक किस्म के व्यक्ति को 2019 में लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ाएगी।

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पार्टी कोष में जमा कराने होंगे दस हजार

समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार में अगर कार्यकर्ता चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं तो सर्वप्रथम उन्हें अपनी जेब से दस हजार रुपये पार्टी कोष में जमा कराने होंगे। इसके बाद ही वह उम्मीदवारी फार्म भरने के हकदार होंगे।

समाजवादी पार्टी बुलेटिन का बनना पड़ेगा अाजीवन सदस्य

चुनाव लड़ने या उम्मीदवारी जताने वाले दावेदार के लिए दूसरी शर्त होगी कि उन्हें समाजवादी पार्टी बुलेटिन का अाजीवन सदस्य बनना पड़ेगा। तभी उम्मीदवारी फार्म पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा लोकसभा चुनाव लड़ने वाले को पार्टी का सक्रिय सदस्य होना चाहिए।

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पार्टी की छवि सुधारने को प्रार्थना पत्र में मांगा ब्यौरा

बता दें कि 2012 के विधानसभा चुनाव में आपराधिक छवि के कारण अखिलेश यादव ने पश्चिम उप्र के गाजियाबाद जिले के बाहुबली डीपी यादव को सपा में शामिल न करने पर अड़ गए थे। जिस पर मुलायम और अखिलेश आमने-सामने भी आ गए थे। अखिलेश यादव के उस फैसले से प्रदेश में बदलाव और बेहतरी की तरफ जाने की उम्मीद जगी थी। दूसरी तरफ 2014 के लोकसभा चुनाव में ही यह उम्मीद टूट गई थी। जब सपा ने बाहुबली अतीक अहमद समेत कई दागी नेताओं को चुनाव मैदान में उतार दिया था। पिछली अखिलेश यादव सरकार बनने के बाद मंत्रियों के आपराधिक मामलों के विश्लेषण में 54 फीसदी मंत्रियों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले दर्ज होने का उल्लेख किया था। जिन 26 मंत्रियों ने आपराधिक मामले की जानकारी दी है, उनमें नौ के खिलाफ गंभीर केस दर्ज थे।

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सपा के विधायक महबूब अली ने भी अपने शपथ पत्र में हत्या, अपहरण और डकैती समेत 15 मामले, रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया ने अपहरण, हत्या के प्रयास और डकैती समेत आठ मामले बताए थे। अन्य दागी मंत्रियों में विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह, अरविंद सिंह गोप रामकरन आर्य, जगदीश सोनकर आदि शामिल हैं। फीरोजाबाद जिले की जसराना सीट से सपा विधायक रामवीर सिंह ने शपथ पत्र में हत्या के आठ मामलों समेत 18 आपराधिक मामले विचाराधीन होने का जिक्र किया है। एडीआर-नेशनल इलेक्शन वाच ने 2014 के लोकसभा चुनाव में सभी दलों के प्रत्याशियों की आपराधिक पृष्ठूभूमि का विश्लेषण किया था, जिसमें से कुल 1259 प्रत्याशियों के विश्लेषण में 235 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी। यानी 19 फीसदी प्रत्याशी आपराधिक पृष्ठूभूमि के थे।

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यह 2009 के लोकसभा चुनाव की तुलना में 3 फीसदी अधिक थे। 2014 में 185 प्रत्याशियों (15 प्रतिशत) के खिलाफ गंभीर मामले दर्ज हुए थे। लोकसभा चुनाव 2014 में समाजवादी पार्टी ने आपराधिक छवि वाले 35 उम्मीदवारों को टिकट दिया था। इस बारे में पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष नरेश उत्तम ने बताया कि पार्टी अब किसी दागदार या अपराधिक किस्म के व्यक्ति को 2019 में चुनाव नहीं लड़ाएगी। ऐसे व्यक्ति के सामाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ने पर पूरी तरह से रोक होगी।

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