
Ceiling fan
केपी त्रिपाठी, पत्रिका
मेरठ ( meerut news ) दो ब्लेड और 70 किलो वजन, रफ्तार धीमी लेकिन हवा का जवाब नहीं। हम बात कर रहे हैं 100 साल से अधिक पुराने उस ( Ceiling fan ) पंखे की जिसे अंग्रेज सात समंदर पार से भारत लाए थे। इस पंखे की लंबाई करीब पांच फिट है और इसकी बाइडिंग में भी करीब 10 किलो कॉपर वायर लगती है लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 100 साल में ना तो इस पंखे की रफ्तार कम हुई और ना ही यह कभी खराब हुआ।
100 साल में एक बार भी नहीं हुआ खराब
मेरठ का कैंट इलाका सैकड़ों साल पुरानी धरोहर अपने भीतर संजोए हुए है। 18 दशक के बने पुराने मकान और बड़ी हवेलियां इसकी कहानी कहती हैं। अंग्रेजों ने जब देश पर कब्जा जमाना शुरू किया तो मेरठ भी अंग्रेजों का बहुत बड़ा गढ़ रहा। लंदन से अंग्रेज अपने साथ सभी शानो-शौकत का सामान लेकर आए। उन्ही में से एक है अंग्रेजों का 70 किलों वजनी छत का पंखा। अंग्रेज तो देश छोड़कर चले गए लेकिन यह पंखा आज भी कैंट की माल रोड स्थित हवेली काे हवा दे रहा है। इस पंखे को यहां लगे 100 साल से अधिक समय हो गया है लेकिन आज तक यह खराब नहीं हुआ। यह पंखा जब चलता है तो इसकी ठंडी हवा के झोके गर्मी को भगा देते हैं। जिस हवेली में यह पंखा लगा हुआ है वह सेना के अधिकार क्षेत्र में है। इस हवेली में रहने वाले सैन्य अधिकारी कहते हैं कि उन्होंने सुना है कि आज तक ये पंखा कभी खराब नहीं हुआ। उनसे पहले भी कई सैन्य अधिकारी आए उन्होंने भी यही बताया।
नई तकनीक ( New technology ) के पंखों को दे रहा मात
ये पंखा नई टैक्नॉलाजी के पंखों को मात दे रहा है। इस हवेली में और भी पंखे लगे हैं जो कि नए जमाने की टैक्नॉलाजी के बने हैं लेकिन वो सभी पंखे इसके आगे फेल हैं। एक सदी से लगे इस पंखे के आगे न जाने कितने नई टैक्नोलाजी के पंखे दम तोड़ गए लेकिन दो ब्लेड वाला यह पंखा आज भी अपनी हवा से यहां रहने वालों को गर्मी से निजात दिला रहा है।
Updated on:
09 Jul 2021 05:47 pm
Published on:
08 Jul 2021 10:58 am
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