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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिष्ठा इस ग्रह दशा के कारण हो रही कम, पांच राज्यों के चुनाव परिणामों पर इसलिए पड़ा असर, देखें वीडियो

पांच विधान सभा चुनावों के परिणाम के दौरान भी ग्रह चाल का बुरा असर  
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मेरठ

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Sanjay Kumar Sharma

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Updated: 16 Dec 2018, 2:06 PM IST

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिष्ठा इस ग्रह दशा के कारण हो रही कम, इसकी वजह से पांच राज्यों के चुनाव में पड़ा असर

केपी त्रिपाठी, मेरठ। पांच राज्यों में चुनाव और वहां पर भाजपा की पराजय को सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोंदी की नाकामी से जोड़कर देखा जा रहा है। वैसे भी देश में रफेल का मामला हो या फिर अन्य विवादित मुद्दे। सभी को कहीं न कहीं सीधे नरेन्द्र मोदी से जोड़ा गया है। विपक्ष के निशाने पर भी भाजपा की जगह प्रधानमंत्री मोदी ही हैं। अचानक से ऐसा क्या हुआ कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिष्ठा को इतने झटके लग रहे हैं। कहीं न कहीं यह सब ग्रह नक्षत्र के कारण हो रहा है। ज्योतिषाचार्य हबीब का कहना है कि इस समय उनके चंद्र की महादशा खराब है इस कारण उनके साथ ये उथल-पुथल मची हुई हैं।

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मोदी की कुंडली में चंद्र की महादशा खराब

तीन राज्यों में भाजपा की सरकार का जाना भी मोदी की कुंडली में चंद्र की महादशा का खराब होना माना जा रहा है। आचार्य हबीब का मानना है कि वर्तमान में जनता सरकार बीजेपी की न मानकर नरेन्द्र मोदी की मान रही है। इस लिहाज से वर्तमान में राजनीतिक उथल-पुथल को नरेन्द्र मोदी के जीवन से जोड़कर ही देखना ज्यादा सटीक होगा। उन्होंने कहा कि ज्योतिष पद्धति से देखा जाए तो जब मोदी प्रधानमंत्री पद पर बैठे थे तो उन पर चंद्र की महादशा व राहु का अंतर चल रहा था। चंद्र की महादशा नवंबर 2011 से प्रारंभ होकर 2021 तक रहेगी, क्योंकि चंद्र की दशा दस वर्ष की होती है।

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राहु के अंतर से विवाद में रहे मोदी

मोदी की जन्म कुंडली में चंद्र वृश्चिक लग्न में बैठकर व भाग्यवश पुष्कर नंवाश में होने पर लाभकारी होता है। जिससे ऊंचा पद प्रतिष्ठा मिली, किन्तु पद ग्रहण के समय राहु का अंतर था जिस कारण वे किसी न किसी विवाद में रहे। वर्तमान में भी चुनाव के दौरान कांग्रेस को जो जीत मिली और भाजपा या मोदी को नुकसान हुआ तो वर्तमान में दशा तो चंद्र की ही है, जो दशा अंतर है वह उनके अनुकूल नहीं है। क्योंकि चंद्र की दशा में बुध प्रत्यन्तर में शनि का संयोग बनने से वर्तमान का घटना क्रम घट रहा है। इन सबके कारण व्यक्ति के प्रभाव में कुछ कमी व शक्ति क्षीण होकर शत्रु को बलशाली बना देते हैं। यह आगे 2019 फरवरी से चंद्र की दशा में केतु का अंतर रहेगा। जो कुछ ख्याति में कुछ पीड़ा देगा, लेकिन क्षतिपूर्ति में कुछ सहयोग भी करेगा।