1 सितंबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Meerut News: ‘गन्ने का भाव 500 रुपए प्रति क्विंटल हो’, राकेश टिकैट के नेतृत्व में हुई किसानों की महापंचायत

Meerut News: मेरठ में राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसानों की महापंचायत हुई, जिसमें गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, बकाया भुगतान, बिजली और खाद की समस्या, भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा और बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई समेत कई मांगें उठाई गईं।
3 min read
Google source verification

मेरठ

image

Harshul Mehra

Sep 01, 2026

rakesh tikait kisan mahapanchayat meerut sugarcane price

राकेश टिकैत का बड़ा बयान | Image - FB/@ChaudharyRakeshTikait

Meerut News: मेरठ में मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसानों की महापंचायत आयोजित हुई। इसमें किसानों से जुड़े कई अहम मुद्दों को उठाया गया। महापंचायत में गन्ने के दाम बढ़ाने और बकाया भुगतान के साथ बिजली, खाद, भूमि अधिग्रहण और बाढ़ से होने वाले नुकसान के मुआवजे जैसे मुद्दों पर किसानों ने अपनी मांगें रखीं।

महापंचायत के दौरान किसानों की बढ़ती लागत और फसलों के उचित दाम का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों के सामने इस समय कई स्तरों पर समस्याएं हैं और सरकार को उनकी लागत व आमदनी के बीच बढ़ते अंतर पर ध्यान देना चाहिए।

गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग

राकेश टिकैत ने गन्ना किसानों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि गन्ने के दाम में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं हुई है। उन्होंने मांग की कि गन्ने का भाव बढ़ाकर 500 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ने के बावजूद किसानों की फसलों की कीमतों में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में किसानों को उनकी बढ़ती उत्पादन लागत के हिसाब से फसल का उचित मूल्य मिलना जरूरी है।

महंगाई बढ़ी, लेकिन फसलों के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़े

टिकैत ने कहा कि खाने-पीने की चीजों से लेकर कपड़े और रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं तक की कीमतों में लगातार इजाफा हुआ है। दूसरी ओर, किसान की उपज के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को कम से कम पिछले साल के मुकाबले चीनी के बढ़े हुए भाव का लाभ मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, किसानों की आय और उत्पादन लागत को ध्यान में रखते हुए सरकार को फसलों के उचित दाम सुनिश्चित करने चाहिए।

आलू किसानों की परेशानी का भी मुद्दा उठा

महापंचायत में आलू उत्पादक किसानों की समस्याओं को भी उठाया गया। राकेश टिकैत ने कहा कि लागत बढ़ने के बावजूद आलू किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने खेती में इस्तेमाल होने वाली बिजली और खाद की कीमतों तथा उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बढ़ती लागत का सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।

भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजे की मांग

राकेश टिकैत ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि जमीन के मौजूदा सर्किल रेट कम हैं, जबकि किसानों को अधिग्रहण के दौरान उनकी जमीन का उचित मूल्य मिलना चाहिए। उन्होंने जमीन के सर्किल रेट बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि अधिग्रहण की स्थिति में किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य मिल सके, इसके लिए मौजूदा दरों पर ध्यान देना जरूरी है।

बिजली की बढ़ती कीमतों पर भी सवाल

किसानों पर बिजली के बढ़ते खर्च का मुद्दा भी महापंचायत में उठाया गया। टिकैत ने कहा कि एक ओर जमीन के सर्किल रेट कम हैं, वहीं दूसरी ओर बिजली की दरें अधिक हैं। उन्होंने सरकार से किसानों के लिए बिजली की दरें कम करने की मांग की। टिकैत के मुताबिक, बिजली की बढ़ती लागत खेती की कुल उत्पादन लागत पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है।

खाद की कीमत और उपलब्धता का मुद्दा

किसानों की समस्याओं में खाद का मुद्दा भी शामिल रहा। टिकैत ने खाद की उपलब्धता और उसकी कीमतों पर सवाल उठाते हुए कहा कि खेती की लागत पहले ही बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को खेती के लिए जरूरी संसाधन उचित कीमत पर और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराना जरूरी है।

बाढ़ से फसल और जमीन को नुकसान

टिकैत ने खादर क्षेत्र में बाढ़ की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण किसानों की फसलों के साथ-साथ जमीन को भी नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की। साथ ही बाढ़ से स्थायी तौर पर बचाव के लिए बांध जैसी व्यवस्था किए जाने की बात कही।

अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लेकर भी जताई चिंता

राकेश टिकैत ने दिल्ली में अमेरिका के साथ चल रही डील को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय समझौतों का असर भारतीय किसानों पर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से किसानों के हित प्रभावित न हों।

‘नीतियों में किसान केंद्र में हों’

टिकैत ने कहा कि सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिनमें किसानों के हितों को प्राथमिकता मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते से किसानों को लाभ नहीं मिलता है तो ऐसे समझौतों का औचित्य क्या है। मेरठ की महापंचायत में उठाए गए मुद्दों के जरिए किसानों ने फसल के उचित दाम, बढ़ती लागत, बिजली, खाद, भूमि अधिग्रहण और प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान जैसे विषयों पर अपनी मांगें सामने रखीं।

बड़ी खबरें

View All

मेरठ

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग