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कैराना लोकसभा उपचुनाव से पहले अपने ही जाल में फंसे अजीत सिंह, विधायक ने खोल दी पोल

रालोद से निष्कासित विधायक ने अजीत सिंह के खिलाफ कह दी ऐसी बात

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मेरठ

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Iftekhar Ahmed

Mar 26, 2018

Ajit singh

बागपत. कैराना लोकसभी सीट के लिए होने वाले उपचुनाव को देखते हुए सियासी पार्टियों के बीच जुगलबंदी शुरू होने लगी है। इस सीट से राष्ट्रीय लोक दल के मुखिया अपने बेटे जयंत सिंह को किसी भी हाल में जिताना चाहते हैं। लेकिन भाजपा को अकेले मात देने की हालत में नहीं है। लिहाजा, उन्होंने दूसरी पार्टियों से जुगलबंदी शुरू कर दी है। अजीत सिंह को बसपा प्रमुख मायावती से मदद मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि बसपा प्रमुख को खुश करने के लिए ही उन्होंने राज्यसभा चुनाव में भाजपा के लिए क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायक सहेन्द्र रमाला को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। लेकिन उनका ये दाव उलटा पड़ता दिख रहा है। पार्टी से निकाले गए विधायक ने अजीत सिंह पर सीधा जुबानी हमला करते हुए अपने बेटे को जिताने के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाने का आरोप लगाया है। रमाला ने आरोप लगाया है कि राज्यसभा चुनाव में उन्होंने जो कुछ किया वह अजीत सिंह के कहने पर किया। पहले वे मुझे मोहरा बनाकर भाजपा से साठगांठ की कोशिश कर रहे थे। अब बसपा प्रमुख मायावती का समर्थन हासिल करने के लिए मुझे एक बार फिर मोहरे की तरह इस्तेमाल किया है।

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पार्टी से निकाले जाने से नाराज रालोद से निष्कासित विधायक सहेन्द्र रमाला ने अजीत सिंह पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि चौधरी अजीत सिंह ने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए मुझे राजनीतिक मोहरा बनाया। कैराना उपचुनाव बसपा के सहयोग से लड़ने के लिए मुझे बली का बकरा बनाया गया है। उन्ोहंने आरोप लगाया कि मायावती को खुश करने के लिए ये कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि चौधरी अजीत सिंह ने संविधान और लोकतंत्र की हत्या की है। उन्होंने कहा कि रमाला शुगर मिल के विस्तारीकरण कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम में पहले मुझे जाने से रोका। इसके बाद भाजपा से गठबंधन करने के लिए मुझसे भाजपाईयों से तालमेल बैठाने को भी कहा।

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राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग के चलते बागपत की छपरौली विधानसभा सीट से विधायक सहेन्द्र रमाला को अजीत सिंह ने शनिवार को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। रालोद से निकाले गए विधायक सहेन्द्र रमाला ने कहा है कि कैराना उपचुनाव के लिए मुझे बली का बकरा बनाया है। उन्होंने कहा कि बसपा के सहयोग से रालोद लड़ना चाहती है। लिहाजा, कैराना उपचुनाव से पहले मायावती को खुश करने के लिए चौधरी अजीत सिंह ने मुझे पार्टी से निकालकर अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए मुझे राजनीतिक मोहरा बनाया है।