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मेरठ ( Meerut) सितंबर महीने में अब उमस ने भी पिछले 9 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। अभी तक सितंबर में उमस का स्तर 60 प्रतिशत से कम नहीं हुआ है। इतनी उमस बरसात के मौसम में भी नहीं हाेती जितनी सितंबर के महीने में है।
उमस के कारण ही लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम के हालात यह है कि तेज धूंप और उमस के कारण लोगों को जेठ वाली गर्मी का अहसास सितंबर माह में करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के विशेषज्ञों की माने तो सितंबर 2011 में उमस का स्तर पिछले 9 सालों में सर्वाधिक यानी 50-55 प्रतिशत के बीच है। सितंबर में इतनी उमस कभी नहीं पड़ी जितनी इस बार पड़ रही है।
भूगोलविद् डॉक्टर कंचन सिंह ने बताया कि इस मेरठ में बारिश कम होने के कारण ही मौसम में ये परिवर्तन देखने को मिल रहा है। वायुदाब जो कि बारिश का सबसे बड़ा कारक होता है। इस बार वैसा नहीं बन पाया जैसा कि प्रतिवर्ष बनता है। उन्होंने बताया कि अगर वायुदाब बारिश के लिए एक बार अच्छे तरीके से बन जाए तो फिर वर्षा ऋतु में बारिश बेहतर होती है। इस बार मेरठ और पश्चिम उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में बारिश के अनुरूप वायुदाब नहीं बन पाया। जिस कारण बारिश नहीं हुई और पानी वाले बादल बिना बारिश के ही उड़ गए।
बारिश न होने के कारण ही वातावरण में नमी और उमस बनी हुई है जो कि लोगों को परेशान किए हुए हैं। उन्होंने कहा कि अब यह उमस तो सितंबर के बाद ही समाप्त होगी। बता दें कि इस समय तेज धूंप और चिलचिलाने वाली गर्मी से सभी लोग परेशान हैं। इस परेशानी के चलते लोगों में तरह-तरह की बीमारियां हो रही हैं। गर्मी और उमस के कारण पशु-पक्षियों का भी बुरा हाल है। पक्षी पानी की तलाश में भटक रहे हैं।
Updated on:
20 Sept 2020 06:12 pm
Published on:
20 Sept 2020 06:08 pm
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