
नवरात्र 2021 : विंध्याचल में तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा, हरे वस्त्र पहन अपराजिता पुष्प चढ़ाएं धन और यश मिलेगा
मिर्ज़ापुर. शारदीय नवरात्र का आज तीसरा दिन है। आज मां चंद्रघंटा आराधना की जाती है। विंध्याचल में आज नवरात्र के तीसरे दिन मां विंध्यवासिनी के चंद्रघंटा स्वरूप की आराधना पूरे धूमधाम के साथ हो रही है। सुबह से सभी भक्त गण मां के दर्शन के लिए लाइन लगा कर खड़े हैं। और उत्साह से जयकारे लगा रहे हैं।
मां दुर्गा की 9 शक्तियों की तीसरी स्वरूपा मां चंद्रघंटा की पूजा नवरात्र के तीसरे दिन की जाती है। मां के माथे पर घंटे आकार का अर्धचन्द्र है। जिसके कारण इन्हें चन्द्रघंटा कहा जाता है। इनका रूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। माता का शरीर स्वर्ण के समान उज्जवल है। इनका वाहन सिंह है। दस हाथ हैं जो कि विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र से सुशोभित रहते हैं। सिंह सवार मां चंद्रघंटा की उपासना से आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है। इस दिन दुर्गा सप्तसती का पाठ करना चाहिए, इससे वह संसार में यश, कीर्ति एवं सम्मान को प्राप्त करता है।
विंध्याचलय के पुरोहित मिठ्ठू मिश्रा बताते हैं कि, आज के दिन मां चंद्रघंटा की पूजा हरे वस्त्र पहन कर करनी चाहिए। माता को दूध से बने प्रदार्थ का भोग लगाना चहिए। जिससे मां प्रसन्न होती है। पूजा में अपराजिता और कमल का पुष्प चढ़ाना चहिए। साधक को पूजा के समय बीजक मंत्र की आराधना करनी चहिए। मां चंद्रघंटा की पूजा से आरोग्य में वृद्धि होती है। धन और यश की प्राप्ति होती है।
रिपोर्ट : सुरेश सिंह
Published on:
09 Oct 2021 07:54 am
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