
नई दिल्ली। तीन दिन पहले असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर ( NRC ) की अंतिम सूची जारी हुआ था। अब इस मुद्दे को लेकर असम में राजनीति चरम पर है। टीएमसी ने 19 लाख लोगों की नागरिकता समाप्त करने के विरोध में सत्ताधारी भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। टीएमसी का कहना है कि सरकार के फैसले से 19 लाख लोगों के सामने अपनी पहचान को साबित करने का संकट पैदा हो गया है।
सीएम सोनोवाल ने एनआरसी सूची के खिलाफ जारी विरोध को देखते हुए उन लोगों के लिए सरकारी मदद के दरवाजे खोल दिए हैं जिनका एनआरसी में नाम शामिल नहीं हो सका है।
सरकार मुहैया कराएगी मुफ्त कानूनी सहायता
अब असम सरकार की तरफ से ऐसे लोगों को कानूनी मदद मुहैया कराई जाएगी। इसके लिए पूरे राज्य में फॉरन ट्रिब्यूनल्स की संख्या बढ़ाई जाएगी। अभी राज्य में सिर्फ 100 फॉरन ट्रिब्यूनल्स हैं। अब सरकार का लक्ष्य है कि अक्टूबर तक इनकी संख्या 200 तक पहुंचाई जाए। ताकि लोगों को अधिक संख्या में मदद मिल सके।
आवेदन के लिए मिलेगा 120 दिन
एनआरसी में नाम दर्ज नहीं करा सकने वाले लोगों को कानूनी रास्ता बताने के लिए हर जिले में कुछ यूनिट बनाई जाएंगी जो लोगों की मदद करेगी। हालांकि अभी इसके लिए तबतक अप्लाई नहीं किया जा सकता है जबतक NRC कोऑर्डिनेटर की तरफ से व्यक्ति के पास इस बात का लेटर न आ जाए कि उनका नाम लिस्ट में नहीं है। जिनका नाम लिस्ट में नहीं है उन्हें दोबारा आवेदन करने के लिए 120 दिन का समय मिलेगा।
19 लाख से ज्यादा लोग सूची से बाहर
बता दें कि 31 अगस्त को एनआरसी की अंतिम सूची जारी हुई थी। सूची आने के बाद भगदड़ जैसे माहौल बन गए। हालात कुछ ऐसे बने कि किसी को कुछ समझ ही नहीं आया। परिवार के एक सदस्य का नाम लिस्ट में है तो वहीं दूसरे व्यक्ति का नाम लिस्ट में नहीं है। कुछ जगह तो ऐसे भी उदाहरण मिले हां पर पूरे परिवार का नाम ही लिस्ट में नहीं है।
अभी तक एनआरसी की अंतिम सूची से 19,06,677 लोग निकाले गए हैं, जबकि इसी सूची में 3,11,21,004 लोगों को भारतीय नागरिक बताया गया है।
Updated on:
03 Sept 2019 10:35 am
Published on:
03 Sept 2019 10:20 am
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