
कुछ वर्षों में इस वजह से खत्म हो जाएगा जंगल के राजा का वंश!
नई दिल्ली। अपनी दहाड़ से किसी को भी थर्रा देने वाला बाघ जलवायु में बदलाव की वजह से विलुप्त होने के कगार पर हैं। दरअसल एक शोध में दावा किया गया है कि जलवायु परिवर्तन बाघों के आखिरी गढ़ से भी उनके विनाश की वजह बन सकता है। वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन के जरिए हम धरतीवासियों को यह चेतावनी दी है। चेतावनी इसलिए क्योंकि हमारा अस्तित्व भी बाघ के अस्तित्व के साथ जुड़ा हुआ है।
बाघ ही नहीं, धरती पर खतरे में हैं जीवों की 10 लाख प्रजातियां
विडाल वंश के सबसे बड़े सदस्य बाघ की गिनती उन करीब 10 लाख जीवों में की जाती है, जिनका अस्तित्व अब खतरे में है। बाघों के विलुप्त होने के खतरे की सबसे बड़ी वजह है उनके प्राकृतिक आवास का लगातार कम होते जाना।
जलस्तर में बढ़ोतरी से डूब जाएगा सुंदरबन
भारत और बांग्लादेश में 4,000 वर्ग मील दलदली जमीन को सुंदरबन नाम से जाना जाता है। सुंदरबन में दुनिया के सबसे बड़े मैंग्रोव जंगल हैं, जो बाघों के लिए उचित आवास उपलब्ध कराते हैं। दुर्भाग्य से सुंदरबन की करीब 70 फीसदी जमीन समुद्र तल से केवल कुछ ही फुट ऊपर है। जलवायु परिवर्तन से यदि समुद्र तल ऊपर उठता है, तो सुंदरबन का अस्तित्व और इसके साथ बाघ व सैकड़ों अन्य प्रजातियों के जीवों की जिंदगी भी खतरे में पड़ जाएगी।
जलवायु परिवर्तन से पिघलते ग्लेशियर
ऑस्ट्रेलियाई और बांग्लादेशी शोधकर्ताओं ने साइंस ऑफ द टोटल एनवायरनमेंट नाम की एक की पत्रिका में अपना शोधपत्र प्रकाशित करवाया। इसमें कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन से धरती पर गर्मी बढ़ेगी, ग्लेशियर पिघलेंगे और समुद्रतल का स्तर ऊंचा उठेगा। यह बदलाव सुंदरबन में बचे कुछ सौ बाघों के विलुप्त होने के लिए पर्याप्त साबित होगा।
जैवे विविधता का खत्म होना भी जलवायु बदलाव जैसा ही घातक
संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक अन्य रिपोर्ट इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन बायोडाइवर्सिटी एंड ईकोसिस्टम सर्विसेज (IPBES) में भी ऐसी ही चिंता व्यक्त की गई है। इसमें कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन की तरह जैव विविधता के खत्म होने पर भी बाघ और इनसान का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
उत्तराखंड में बाघ के प्राकृतिक आवास को लैंटाना झाड़ियों से खतरा
उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व में भी बाघों के आवास के लिए खतरा पैदा हो गया है। बताया जाता है कि वहां बाघ का प्राकृतिक आवास लैंटाना झाड़ियों की वजह से खत्म हो रहा है। विश्व विख्यात जिम कार्बेट नेशनल पार्क के करीब 50 फीसदी, तो राजाजी टाइगर रिजर्व के 60 प्रतिशत हिस्से पर ये झाड़ियां फैल चुकी हैं।
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Published on:
08 May 2019 07:01 am
