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माननीयों की थाली को सीमित करने की तैयारी में सरकार! Parliament Canteen के ठेके में बदलाव की घोषणा

कोरोना महामारी ( Corona Crisis ) का प्रभाव अब देश की अर्थव्यवस्था के साथ माननीयों के जीवन पर भी पड़ने जा रहा Coronavirus Crisis के चलते लिए जा रहे बड़े-बड़े फैसलों के साथ सरकार ने Parliament Canteen का ठेका बदलने का निर्णय लिया

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नई दिल्ली। कोरोना महामारी ( Coronavirus in India ) का प्रभाव अब देश की अर्थव्यवस्था ( Indian Economy ) के साथ माननीयों के जीवन पर भी पड़ने जा रहा है। कोरोना संकट ( Coronavirus Crisis ) के चलते लिए जा रहे बड़े-बड़े फैसलों के साथ सरकार ने संसद की कैंटीन ( Parliament Canteen ) का ठेका बदलने का निर्णय लिया है। दरअसल, अब तक संसद की कैंटीन का ठेका रेलवे ( Railway ) के पास था, जो अब वापस लिया जा रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अब संसद की कैंटीन का यह ठेेका सरकारी कंपनी आईटीडीसी ( ITDC ) को मिलेगा। गौरतलब है कि संसद की कैंटीन की ठेका तकरीबन 52 साल से रेलवे के पास था। रेलवे ने पहली बात 1968 में संसद भवन परिसर में कैटरिंग के काम की शुरुआत की थी।

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आपको बता दें कि पिछले 52 सालों से संसद भवन के परिसर में रेलवे सांसदों, संसद में काम करने वाले कर्मचारियों, पत्रकारों और बाहर से आने वाले विजिटर्स को खाना उपलब्ध कराना है। अनुमान है कि रेलवे के तकरीबन 300 कर्मचारी इस कैंटीन में जुटे हुए था। आपको बता दें कि संसद की कैंटीन कई मायनों में काफी चर्चित है। यहां पर माननियों को स्वादिष्ट खाना सब्सिडी की वजह से काफी संस्ते रेट में मिलता है। सूत्रों की मानें तो सरकार संसद की इस कैंटीन को हर साल 17 से 18 करोड़ रुपए सब्सिडी के रूप में देती है।

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इसमें से लगभग 12 करोड़ रुपए तो कैंटीन मेंकाम करने वाले कर्मचारियों को वेतन के रूप में दिए जाते थे। इससे पहले बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ने संसद की कैंटीन की सब्सिडी खत्म करने की मंजूरी दी थी। जबकि मोदी सरकार 1.0 के कार्यकाल में इस कैंटीन की सब्सिडी को घटा दिया गया था।