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नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अभी तक अपने मिशन चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से संपर्क नहीं साध पाया है।
हालांकि अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने विक्रम के बारे में जल्द ही कोई सूचना देने की उम्मीद जताई है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण नासा के लूनर रिकनैसैंस ऑर्बिटर (LRO) का उसी स्थान से गुजरना है, जहां भारतीय लैंडर विक्रम गिरने की संभावना जताई गई है।
इस बीच दुनिया भर में मून मिशन को लेकर शुरू किए गए अभियानों को लेकन नई कहानियां सामने आ रही हैं। कुछ ऐसा ही एक वाकया जर्मन स्पेस एजेंसी के मुखिया रहे वर्नर से जुड़ा है।
एक इंटरव्यू के दौरान वर्नर ने कहा था कि "हम अंतरिक्ष में अंतरर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन से आगे की प्लानिंग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वह धरती से कमतर ऑरबिट वाले क्षेत्र में माइक्रो ग्रेवेटी रिसर्च के लिए छोटा स्पेसक्राफ्ट लगाने पर विचार कर रहे हैं।
जबकि चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से पर एक गांव बनाने का प्रस्ताव भी रखा है। दरअसल, कुछ ऐसा ही सपना 60 के दशक में अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी देखा था।
हालांकि बाद में नासा ने इस मिशन को शुरू करने से पहले ड्रॉप कर दिया।
वर्नर ने जानकारी देते हुए बताया कि चांद पर गांव बसाने का मतलब आबादी या घर, चर्च और टाउन हाल बनाने से नहीं है।
यह एक ऐसा गांव होगा, जहां सारी दुनिया की मदद से रोबोटिक और स्पेश मिशन को आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें संचार क्षेत्र में सेटेलाइट के माध्यम से तरह-तरह के प्रयोग किए जा सकेंगे।
बर्नर ने यह भी बताया कि चांद का दूरस्थ हिस्सा कई मायने में काफी रोचक है। इस गांव के माध्यम से हम टेलीस्कोप के सहारे अंतरिक्ष में दूर तक नई नई जानकारियां जुटाई जा सकती हैं।
Updated on:
28 Oct 2019, 9:32 AM IST
Published on:
28 Oct 2019, 9:28 AM IST
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