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सेंटीनली ने मारा था अमरीकी नागरिक को, जानिए 60 हजार साल पुराने कबीले की चौंकाने वाली बातें

कबीले के लोगों ने उसे तीरों से मार डाला और गाड़ दिया। इस घटना के बाद इस द्वीप के कबीले के लोगों के बारे में दुनियाभर की जिज्ञासा बढ़ गई है। जानिए कौन हैं उत्तरी सेंटीनल द्वीप में रहने वाले यह लोग।
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नई दिल्ली

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Amit Kumar Bajpai

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Updated: 22 Nov 2018, 10:35 AM IST

उत्तरी सेंटीनल

अंडमान का नॉर्थ सेंटीनलः जानिए 60 हजार साल पुराने कबीले की चौंकाने वाली बातें

अंडमान। एक अमरीकी नागरिक को नॉर्थ सेंटीनल नामक हजारों साल पुरानी आदिम जनजाति के लोगों ने मार डाला। जॉन एलन चाऊ (27) नामक व्यक्ति ईसाई धर्म का प्रचार करने अवैध रूप से अंडमान के उत्तरी सेंटीनल द्वीप पहुंचा था। कबीले के लोगों ने उसे तीरों से मार डाला और गाड़ दिया। इस घटना के बाद इस द्वीप के कबीले के लोगों के बारे में दुनियाभर की जिज्ञासा बढ़ गई है। जानिए कौन हैं उत्तरी सेंटीनल द्वीप में रहने वाले यह लोग।

दरअसल, अंडमान-निकोबार में उत्तरी सेंटीनल द्वीप में सेंटीनल जनजाति के लोग (सेंटीनली) रहते हैं। इस जनजाति और उनके इलाके को संरक्षित श्रेणी में रखा गया है। 2011 की जनगणना में में सेंटीनल लोगों की आबादी 40 आंकी गई थी। माना जाता है कि अभी इनकी संख्या 150 है। इनके बारे में बहुत ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन यह आज भी शिकार के लिए तीर-कमान जैसे पुराने हथियार इस्तेमाल करते हैं।

भारत सरकार ने दे रखी है सुरक्षा

भारतीय कानून सेंटीनल लोगों की रक्षा करता है। उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। उनसे किसी प्रकार का संपर्क या उनके निवास क्षेत्रों में प्रवेश अवैध है। 2017 में ही सरकार ने इनका वीडियो बनाने या इंटरनेट पर अपलोड करने पर पाबंदी लगा दी थी। सेना को भी इनके करीब जाने की मनाही है। उत्तरी सेंटीनल एक प्रतिबंधित इलाका है और यहां आम इंसान का जाना बहुत मुश्किल है।

सेंटीनली हैं बहुत खतरनाक

सेंटीनली लोगों को काफी खतरनाक माना जाता है। ये हमले भी करते हैं। यहां जारवा जनजाति भी निवास करती है। सरकारी आदेश के मुताबिक इनसे भी मिलना प्रतिबंधित है। वैज्ञानिकों के मुताबिक करीब 60 हजार साल पहले सेंटीनली अफ्रीका से पलायन करके अंडमान में बस गए थे। न केवल भारत सरकार बल्कि तमाम अंतरराष्ट्रीय संगठन सेंटीनली को बचाने की कोशिशें कर रहे हैं।

2004 की सूनामी में भी बच गए थे

बात सन 2004 की है, जब सूनामी ने तबाही मचाई थी। उस वक्त हिंद महासागर में आई इस तबाही के बाद उत्तरी सेंटीनल द्वीप में रहने वाले सेंटीनली लोगों के हालात जानने की कोशिश की गई। यह जनजाति अपने द्वीप की सुरक्षा को लेकर बहुत सजग रहती है, इसलिए उस वक्त जब भारतीय नौसेना का एक हेलीकॉप्टर इस इलाके में गश्त करने पहुंचा, सेंटीनली लोगों ने इस पर तीर बरसाने चालू कर दिए। इस हमले से प्रशासन निश्चिंत हो गया कि यह लोग सुरक्षित है और सूनामी में भी खुद को बचाने में कामयाब रहे।

अजनबी नहीं थे चाऊ

गौरतलब है कि सेंटीनली के हाथों मारे गए अमरीका के अल्बामा में रहने वाले जॉन एलन चाऊ (27) यहां ईसाई धर्म के प्रचार के लिए पांच बार पहले भी आ चुके थे। वो पहले भी सेंटीनली जनजाति से मिल चुके थे और इन लोगों में फुटबॉल, मछली पकड़ने का सामान और मेडिकल किट बांटते थे। चाऊ इन लोगों के लिए अजनबी नहीं थे, लेकिन फिर भी उन्हें क्यों मार दिया गया, बड़ा सवाल है।