
सपा के कद्दावर नेता आजम खान ने खोला प्रधानमंत्री मोदी की बढ़ती दाढ़ी का राज
रामपुर। 31 अक्टूबर 2018 यानी बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की विशाल प्रतिमा का अनावरण किया है। सपा के कद्दावर नेता आजम खान ने इस पर कड़ी प्रतिक्रया दी है। उन्होंने कहा है कि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल कांग्रेसी थे। क्या भाजपा उनके नाम को भुनाना चाह रही है?
'मस्जिदों में जाने लगे हैं पीएम'
उन्होंने कहा, सरदार वल्लभ भाई पटेल फ्रीडम फाइटर थे जबकि आरएसएस आजादी के पक्ष में नहीं था। ये दोनों कभी नहीं मिल सकते हैं। दोनों अलग-अलग हैं। जहां तक छलने और ठगने की बात है तो अब तो अांबेडकर जी भी कमल में से निकलते हुए बताए जाने लगे हैं। अब मोदी जी मस्जिदों में भी जाने लगे हैं। अब वह टोपी ओढ़ते हैं और साफा बांधते हैं। ये इमाम लोग बांधते हैं। कुरान शरीफ की आयतें भी पढ़ने लगे हैं। मस्जिद में कलमा भी दोहराया। उन्होंने तकरीर भी की, जो कोई मुस्लिम आलिम भी मुश्किल से करेगा।
पीएम की बढ़ती दाढ़ी पर बोले आजम
उन्होंने कहा, अब दाढ़ी का साइज बढ़ गया है। थोड़ी सी और बढ़ जाये तो मोदी जी इमामत के काबिल हो जाएंगे। यह राजनीतिक ठगी है। दुनिया में तीन स्टेचू हैं, जो अब जाने जाएंगे। पहला है अमेरिका की स्टेचू ऑफ लिबर्टी। अमेरिका अपने हिसाब से दुनिया की इकाॅनमी को चलाता है। दूसरा देश है चीन, जिसने लाखों किलोमीटर की जमीन दबा रखी है। हम उससे यह कहते भी नहीं कि भाई हमारी जमीन से कब्जा छोड़ दो। अब यह हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा है या डर है, यह हम नहीं जानते हैं। वे गौतमबुद्ध को पूजते हैं। लिबर्टी ऑफ स्टेचू से ऊंची महात्मा बुद्ध की प्रतिमा है। उन्होंने भी अपने आप को इतना ऊंचा बनाना चाहा। यह तय करना मुश्किल है कि अमेरिका बड़ा है या चाइना।
गोरखपुर के मासूम बच्चों पर लगाना चाहिए था पैसा
आजम खान बोले, तीसरा स्टेचू हमने लगाया है यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई दामोदर दास मोदी जी ने। जिसके बारे में यह कहा जाता है कि इसकी कीमत सिर्फ प्रतिमा की है। मेरे हिसाब से वह सिर्फ एक प्रतिमा है। उसकी कीमत 3 हजार करोड़ है। बाकी सब जो और डेवलपमेंट हुआ है, उसकी कीमत अलग है। तीन हजार करोड़ रुपये की प्रतिमा उस देश ने जिस देश के मुकाबले में बनवाई है, जिसकी प्रतिमा सबसे छोटी है। इन तीनों देशों के मुकाबले में जिस देश की प्रतिमा सबसे छोटी है, इन तीनों देशों के मुकाबले में उसका एक रुपया हमारे 74 रुपये के बराबर है। हमारे ख्याल से इन पैसों की कोशिश इस बात की होनी चाहिए थी कि हम इसको गोरखपुर के उन मासूम बच्चों पर लगाते जो मारे गए हैं। हम उन बच्चियों पर खर्च करते, जिनका चार साल की उम्र में बलात्कार हुआ।
Published on:
1 Nov 2018, 9:32 AM IST
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