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सीतापुर के बाद इस जनपद में आवारा कुत्तों का आतंक, पांच महीने में आठ हजार को काटा

पांच महीने में आठ हजार से ज्यादा लोगों पर हमला कर चुके आदमखोर पिछले डेढ़ साल में एक दर्जन से ज्यादा बच्चों को मौत के घाट उतार चुके
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मुरादाबाद

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Jai Prakash

•

Updated: 25 May 2018, 6:42 PM IST

moradabad

सीतापुर के बाद इस जनपद में आवारा कुत्तों का आतंक, पांच महीने में आठ हजार को काटा

मुरादाबाद: जनपद में आदमखोरों की दहशत अब ख़ौफ़ का पर्याय बन चुकी है। गली-गली घूम रहे इन आवारा आदमखोरों के चलते लोग घरों में कैद होने को मजबूर है। बच्चें घरों से बाहर खेलने नहीं जा रहे और किसान खेतों से जल्दी वापस घर लौट आते है। पिछले पांच महीने के आंकड़े देखें तो तस्वीर हर किसी के होश उड़ा देगी। पांच महीने में आठ हजार से ज्यादा लोगों पर हमला कर चुके आदमखोर पिछले डेढ़ साल में एक दर्जन से ज्यादा बच्चों को मौत के घाट उतार चुके है। हर दिन लगभग पचास से साठ लोगों पर हमला कर रहे इन आदमखोरों पर लगाम कैसे लगेगी इसकी जानकारी किसी को नहीं है।

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अब तक तीन हजार लोग इलाज कराने पहुंचे

मुरादाबाद जनपद के शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में आदमखोर कुत्तों का ख़ौफ़ लोगों के होश उड़ा रहा है। अकेले मुरादाबाद जिला अस्पताल में ही पिछले पांच महीनों में तीन हजार से ज्यादा लोग अपना इलाज करा चुके है। इनमें से सौ से ज्यादा मरीजों को गम्भीर हालत में अस्पताल लाया गया था। देहात क्षेत्र के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हालत और भी ज्यादा खराब है। प्रतिदिन तीस से चालीस लोग कुत्तों के हमले से जख्मी होकर देहात क्षेत्र के अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच रहे है। गर्मियों के इस मौसम में आदमखोर कुत्तों के हमले बढ़ने की ज्यादा आशंका है जिसके बाद अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन की व्यवस्था पर्याप्त करने के आदेश अधिकारियों द्वारा दिये गए है। इतनी बड़ी तादात में कुतों के हमले से हर रोज जख्मी होकर अस्पताल पहुंच रहे लोगों को इस मुसीबत से बचने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा।

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एक दर्जन बच्चों की हो चुकी मौत

जनपद के कुंदरकी और बिलारी थाना क्षेत्रों में पिछले ढेड़ साल में आदमखोर कुत्तों द्वारा एक दर्जन से ज्यादा बच्चों को मार दिया गया था। बच्चों की मौत के बाद आक्रोशित लोगों को शांत करने के लिए प्रशासन द्वारा आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए टीमें भेजी गई लेकिन इन खूंखार कुत्तों को नहीं पकड़ा जा सका था। झुंड बनाकर रहने वाले आवारा कुत्तों के हमले से पांच दिन पहले एक मासूम बच्ची की हालत बिगड़ गयी जिसको इलाज के लिए दिल्ली भेजा गया है।

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गर्मी में कुत्ते हो जाते हैं खूंखार

जानकारों की मानें तो देहात क्षेत्रों में अवैध स्लाटर हाउस पर रोक लगने के बाद कुत्तें आक्रमक हुए है। अवैध स्लाटर हाउसों से इन आवारा कुत्तों को मांस मिल जाता था लेकिन स्लाटर हाउस बन्द होने के बाद यह मांस की तलाश में लोगों खासकर बच्चों को निशाना बनाने लगे है। आवारा कुत्तों के ख़ौफ़ से परिजन बच्चों की सुरक्षा को लेकर खासे चिंतित है। जिला अस्पताल में सीएमएस डॉक्टर ज्योत्सना पंत के मुताबिक गर्मियों में कुत्तें लोगों पर ज्यादा हमले करते है लिहाजा इन दिनों कुत्तों के हमले से जख्मी लोगों की तादात बढ़ रही है। सीएमएस का कहना है की वो कुत्तों के काटने के तरीके को लेकर हैरान है। उनके अनुसार ज्यादातर कुत्तें पैरों में काटते है लेकिन पिछले कुछ महीनों में देखने मे आया है कि आदमखोर बने कुत्तें इंसानों के सीने, गर्दन और चेहरे पर हमला कर रहे है। सीएमएस डॉ ज्योत्स्ना पंत के मुताबिक आशंका इसके पीछे कुत्तों की नस्ल में हो रहे बदलाव या फिर किसी जंगली जानवर से क्रॉस ब्रीड भी जिम्मेदार हो सकता है।

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कुत्तों को लगने चाहिए ये इंजेक्शन

जिला पशु चिकित्सालय के डॉक्टर प्रदीप तोमर के मुताबिक कुत्तों में पसीने की ग्रन्थि ना होने के चलते यह गर्मियों में ज्यादा आक्रमक हो जाते है और इंसानों पर हमला करते है। पशुपालन विभाग कुत्तों को एंटी रैबिज इंजेक्शन लगाने के लिए लोगो को जागरूक कर रहा है।

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अभी तक नहीं बना कोई प्लान

आदमखोर कुत्तों के हमले से जख्मी लोग हर रोज अस्पताल पहुंच रहे है लेकिन स्थानीय प्रशासन सिर्फ दावें कर अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। नगर निगम से लेकर प्रशासन तक हर कोई आवारा कुत्तों को पकड़ने की योजनाएं बनाने में मशगूल है लेकिन यह योजना धरातल पर कब उतरेगी और उतरेगी भी या नहीं इसका जबाब खुद इनके पास भी नहीं है।