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डर्टी बाबा अशोक खरात का ‘हवाला’ कनेक्शन, कॉल रिकॉर्ड से खुली पोल, दुबई से ऑस्ट्रेलिया तक फैला जाल

Ashok Kharat Hawala Racket: एनसीपी (शरद पवार) विधायक रोहित पवार ने मांग की है कि अशोक खरात मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंपी जानी चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Apr 05, 2026

CM Devendra Fadnavis on Ashok Kharat

सीएम फडणवीस बोले- अशोक खरात केस में किसी को नहीं छोड़ेंगे (Photo: X/IANS)

महाराष्ट्र में चर्चित ढोंगी बाबा अशोक खरात मामले में अब एक और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच में पता चला है कि खरात अपने मंदिर ट्रस्ट के जरिए दुबई से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट चला रहा था।

150 से ज्यादा महिलाओं के शोषण का आरोप

अशोक खरात पहले ही 150 से अधिक महिला अनुयायियों के यौन शोषण के आरोपों में पुलिस हिरासत में है। राज्य सरकार ने जांच के लिए एसआईटी (SIT) गठित की है। एसआईटी को अब तक पाखंडी के लैपटॉप और मोबाइल से करीब 200 वीडियो मिले हैं।

नेताओं, अफसरों और कारोबारियों से करीबी संबंध

कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के अनुसार, खरात के महाराष्ट्र के कई बड़े नेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों से संपर्क थे। जांच में यह भी सामने आया कि वह इन लोगों के पैसों को अपने ट्रस्ट के जरिए सुरक्षित ठिकानों में भेजकर काले धन को सफेद बनाने का काम करता था।

दुबई, कतर, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में लेन-देन

CDR से खुलासा हुआ है कि खरात ने दुबई, ऑस्ट्रेलिया, कतर, वर्जिन आइलैंड्स और क्रिसमैन आइलैंड जैसे देशों में लगातार संपर्क बनाए रखा था। इन देशों को काला धन छिपाने के लिए सुरक्षित माना जाता है।

100 से ज्यादा बैंक खाते, कई PAN और आधार

SIT जांच में यह भी सामने आया कि खरात और उसके परिवार के नाम पर 100 से अधिक बैंक खाते थे। इसके अलावा कई फर्जी PAN और आधार कार्ड का भी इस्तेमाल किया गया।

1000 करोड़ के घोटाले का आरोप

राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया है कि अशोक खरात के मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट से 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ यौन शोषण का मामला नहीं है, बल्कि इसमें नेताओं, अफसरों और कारोबारियों का गठजोड़ शामिल है, जो काले धन को विदेशों में भेजकर सफेद बना रहे थे।

ED जांच की मांग की

रोहित पवार ने इस मामले की जांच ईडी से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हो सकता है, इसलिए इसकी गहराई से जांच जरूरी है।

CDR लीक पर सियासी घमासान

इस मामले में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने कहा कि संवेदनशील जानकारी का इस तरह बाहर आना यह दिखाता है कि कुछ बड़े नेता निशाने पर हैं। राउत ने इसे सत्तारूढ़ दल की आंतरिक जंग करार दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर अंजलि दमानिया जैसी कार्यकर्ता को गोपनीय CDR मिल रहा है, तो दिखाता है कि ये नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निशाने पर हैं।

राउत ने कहा कि अंजलि दमानिया रॉ की प्रमुख नहीं हैं, बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। अगर उन्हें यह गोपनीय जानकारी मिल रही है, तो सीडीआर में नाम आने वाले इन नेताओं के लिए मुश्किल समय है। क्योंकि अशोक खरात से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। हालांकि, इस मामले को पूरी तरह से उजागर किया जाना चाहिए और पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए।

वहीं शिवसेना नेता प्रकाश महाजन ने सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की जानकारी सार्वजनिक करना उपमुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। साथ ही उनकी जान के लिए भी खतरा है।

अंजली दमानिया का दावा- शिंदे की खरात से 17 बार हुई बात

सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने दावा किया है कि उनके पास अशोक खरात का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) है। जिससे पता चलता है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अशोक खरात के बीच अतीत में कम से कम 17 बार फोन पर बातचीत हुई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा और एनसीपी के कई नेताओं का भी ढोंगी बाबा से संपर्क था। दमानिया के अनुसार, उन्हें यह सीडीआर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सऐप के जरिए प्राप्त हुआ।

इसलिए आने वाले दिनों में अशोक खरात कांड में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिसका महाराष्ट्र की राजनीति पर गहरा असर पड़ सकता है। मुख्यमंत्री फडणवीस पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि अशोक खरात मामले में शामिल किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।