
अशोक खरात के एक और कांड से उठा पर्दा (Photo: Social Media)
महाराष्ट्र के नासिक के स्वयंभू बाबा अशोक खरात मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने अदालत में बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच के दौरान खरात के मोबाइल फोन से लगभग 2500 से अधिक ऐसे नंबर मिले हैं, जिन्हें कोडवर्ड या खास गुप्त नामों से सेव किया है। पुलिस का मानना है कि यह पहचान छिपाने की सोची-समझी साजिश थी, ताकि किसी को उन नंबरों की असली पहचान का पता न चल सके। इन डिजिटल साक्ष्यों ने इस पूरे मामले को और अधिक जटिल बना दिया है, जिसे सुलझाने के लिए पुलिस अब खरात के 'मायाजाल' की गहराई से पड़ताल कर रही है।
जांच एजेंसियों ने आरोपी अशोक खरात के मोबाइल का फॉरेंसिक क्लोन तैयार कर लिया है और उसकी गहन जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन कोडेड कॉन्टैक्ट्स को डिकोड करने और संभावित सहयोगियों तक पहुंचने के लिए आरोपी से आमने-सामने पूछताछ बेहद जरूरी है। इसी आधार पर अदालत ने उसकी पुलिस कस्टडी 1 अप्रैल तक बढ़ा दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपी कथित तौर पर महिलाओं को नशीला पदार्थ मिलाकर खारा और कड़वा पानी पिलाता था। जिससे वे अचेत या असहाय हो जाती थीं। फिर वह उनके साथ हैवानियत करता था। कई मामलों में वह अपने ऑफिस की लाइट बंद कर देता था और ‘दैवीय शक्तियों’ का डर दिखाकर मानसिक दबाव बनाता था। इस वजह से पीड़ित महिलाएं विरोध नहीं कर पाती थीं।
SIT अब आरोपी के कनाडा कॉर्नर स्थित कार्यालय और अन्य ठिकानों की भी जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इसी तरह की घटनाएं अन्य स्थानों पर भी हुई हैं और क्या इसमें कोई अन्य लोग भी शामिल थे।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ अब तक 10 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें 8 मामले महिलाओं के यौन शोषण से जुड़े हैं, जबकि 2 मामले ठगी और जबरन वसूली के हैं। SIT द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर 150 से अधिक कॉल्स भी प्राप्त हुई हैं, जिससे इस पूरे मामले का दायरा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से अदालत को बताया गया कि अशोक खरात इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड है, लेकिन वह जांच में बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रहा है। पूछताछ के दौरान वह सच्चाई छिपाने के लिए गोलमोल जवाब देता है।
हालांकि सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नासिक जिला न्यायालय (Nashik Court) अशोक खरात की पुलिस हिरासत 1 अप्रैल तक बढ़ा दी। अब पुलिस डिजिटल सबूतों, संभावित नेटवर्क और अन्य पीड़ितों की कड़ी जोड़ने में जुटी हुई है।
Updated on:
30 Mar 2026, 2:32 PM IST
Published on:
30 Mar 2026, 2:31 PM IST
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