
अमित शाह से एकनाथ शिंदे की मुलाकात की तस्वीर (Photo: IANS/File)
महाराष्ट्र की राजनीति में महानगरपालिका चुनावों के नतीजों के बाद अब मेयर (Mayor) की कुर्सी को लेकर घमासान शुरू हो गया है। मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना और भाजपा (BJP) के बीच 'शह-मात' का खेल जारी है। एमएमआर क्षेत्र में मुंबई की एइएम्सि सहित आठ महानगरपालिकाएं हैं।
महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। विशेष रूप से मुंबई (BMC) में मेयर पद को लेकर भाजपा और शिंदे सेना के बीच जबरदस्त रस्साकशी चल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि मुंबई में शिंदे गुट की बात नहीं बनी, तो एकनाथ शिंदे कल्याण-डोंबिवली (KDMC) महानगरपालिका और उल्हासनगर (UMC) महानगरपालिका में अपना मेयर बनाने की तैयारी में हैं। ठाणे और कल्याण-डोंबिवली को छोड़ दें तो एमएमआर क्षेत्र की ज्यादातर महानगरपालिकाओं में भाजपा ने शिंदे गुट की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में कुल 122 नगरसेवक हैं। इनमें शिंदे गुट के 53 और भाजपा के 50 नगरसेवक (पार्षद) चुने गए हैं। चुनाव दोनों दलों ने गठबंधन में लड़ा था, लेकिन सीटों का अंतर बेहद कम होने के कारण भाजपा यहां सत्ता में बराबर हिस्सेदारी की मांग कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट भाजपा के लिए मेयर पद और अन्य अहम पद छोड़ने के मूड में नहीं है।
यही वजह है कि एकनाथ शिंदे के सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे कल्याण-डोंबिवली में शिवसेना की सत्ता अकेले स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके तहत अन्य दलों के नगरसेवकों से संपर्क साधा जा रहा है। मनसे के पांच नगरसेवकों व कुछ शिवसेना ठाकरे गुट के नगरसेवकों ने शिंदे को समर्थन देने का ऐलान किया है।
122 सीटों वाली कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में बहुमत के लिए 62 सीटों की आवश्यकता है। शिवसेना (53) और मनसे (5) के साथ आने से यह आंकड़ा 58 पर पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि उद्धव गुट (UBT) के कुछ नगरसेवक भी शिंदे गुट के संपर्क में हैं, जिससे बहुमत का आंकड़ा पार होने की उम्मीद है।
15 जनवरी को हुए केडीएमसी चुनाव में शिवसेना 53 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। जबकि भाजपा को 50 सीटें मिली हैं। इसके अलावा शिवसेना (उद्धव ठाकरे) को 11, मनसे को 5, कांग्रेस को 2 और एनसीपी (एसपी) को एक सीट पर संतोष करना पड़ा।
उल्हासनगर महानगरपालिका (UMC) में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। यहां भाजपा के 37 जबकि शिंदे गुट के 36 नगरसेवक निर्वाचित हुए हैं। उल्हासनगर में भी शिंदे गुट ने भाजपा को चौंका दिया है। उल्हासनगर नगर निगम चुनाव के नतीजों में भाजपा 37 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत के जादुई आंकड़े से वह महज 3 कदम दूर रह गई।
दूसरी ओर, 36 सीटें जीतने वाली शिवसेना लगातार अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत कर रही है। शिवसेना को पहले ही अपने सहयोगी 'साई पार्टी' (SAI Party) के एक पार्षद और एक निर्दलीय का समर्थन मिल चुका था, जिससे उनकी संख्या 38 पहुंच गई थी। अब वंचित बहुजन आघाड़ी के दो और पार्षदों का समर्थन मिलने के बाद शिवसेना का आंकड़ा 40 पर पहुंच गया है, जो बहुमत के लिए पर्याप्त है।
भाजपा के रुख पड़े नरम!
भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख रवींद्र चव्हाण ने कहा कि महायुति गठबंधन कल्याण-डोंबिवली के अलावा ठाणे और उल्हासनगर महानगरपालिकाओं में अपना मेयर बनाएगी। चव्हाण का यह बयान ऐसे समय में आया है जब केडीएमसी और उल्हासनगर में राजनीतिक समीकरणों में हो रहे बदलावों से शिंदे सेना मजबूत हो रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन को तीनों महानगरपालिकाओं में जनता का स्पष्ट जनादेश मिला है, और इसलिए मेयर पदों पर महायुति उम्मीदवार ही नियुक्त होंगे। चव्हाण ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दावोस से लौटने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। 25 जनवरी को फडणवीस के लौटने के बाद मुंबई में उनके और उपमुख्यमंत्री शिंदे के बीच अहम बैठक होगी।
Updated on:
22 Jan 2026 11:21 am
Published on:
22 Jan 2026 11:09 am

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