
मामले में बरी हुए फहीम अंसारी को नहीं मिलेगा ऑटो चलाने का परमिट
Bombay High Court News:बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को फहीम अंसारी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने ऑटो रिक्शा ड्राइवर के रूप में काम करने के लिए पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) दिए जाने की मांग की थी। अंसारी को 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मामले में अदालत ने बरी कर दिया था
जस्टिस ए. एस. गडकरी और जस्टिस रंजीतसिंह भोसले की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि अधिकारियों द्वारा अंसारी को पीसीसी (PCC) देने से इनकार करना पूरी तरह उचित था। हालांकि विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है, लेकिन इस फैसले से अब अंसारी के लिए ऑटो रिक्शा का परमिट हासिल करना नामुमकिन हो गया है, क्योंकि इसके लिए पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होता है।
अंसारी ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC) देने से इनकार करना मनमाना, अवैध और भेदभावपूर्ण है, जो उनके आजीविका कमाने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सभी अदालतों ने उन्हें आतंकी आरोपों से बरी कर दिया है, इसलिए पुराने आरोपों के आधार पर उन्हें रोजगार के अवसरों से वंचित नहीं किया जा सकता। वहीं राज्य सरकार और पुलिस ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से पुराने संबंधों के आरोपों के चलते फहीम अंसारी अब भी निगरानी के दायरे में हैं और इसी सुरक्षा कारण से उनका PCC आवेदन खारिज किया गया था।
2008 में हुए मुंबई में हमला भारत के इतिहास की सबसे भयावह आतंकी घटनाओं में से एक था, इसमें166 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इन हमलों में शामिल हमलावरों की मदद करने के आरोप में फहीम अंसारी को भी पकड़ा गया था, लेकिन अदालतों ने साक्ष्यों के अभाव में उन्हें इन आरोपों से बरी कर दिया था। जेल से रिहा होने के बाद फहीम अंसारी ने अपनी आजीविका के लिए ऑटो रिक्शा चलाने का प्रयास किया, लेकिन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के साथ पुराने संबंधों के संदेह और सुरक्षा निगरानी के चलते उन्हें पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया गया, जिसे हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी सही ठहराया है।
Published on:
29 Apr 2026 06:18 pm
