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पुरानी और ऐतिहासिक हेरिटेज बिल्डिंग पर आई आईआईटी की रिपोर्ट ?

पुरानी ( Old ) और ऐतिहासिक हेरिटेज बिल्डिंग ( Historic Heritage Building ) पर आई आईआईटी ( IIT ) की रिपोर्ट, म्हाडा ( Mhada ) की ओर से पुनर्स्थापित ( Restored ) करना असंभव, हलफनामा ( Affidavit ) पर अब उच्च न्यायालय ( High Court ) करेगा सुनवाई, शहरी विकास विभाग ( Urban Development Department ) के विपरीत है म्हाडा ( Mhada ) की भूमिका

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पुरानी और ऐतिहासिक हेरिटेज बिल्डिंग पर आई आईआईटी की रिपोर्ट ?

पुरानी और ऐतिहासिक हेरिटेज बिल्डिंग पर आई आईआईटी की रिपोर्ट ?

मुंबई. दक्षिण मुंबई एक्‍सप्लनेड मेंशन की पुरानी और ऐतिहासिक हेरिटेज बिल्डिंग के महत्व के संबंध में आईआईटी मुंबई की एक रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) की ओर से कहा गया है इसे बहाल करना या पुनर्स्थापित करना असंभव है। वहीं म्हाडा की ओर से तैयार हलफनामा अब उच्च न्यायालय की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा। मुंबई हाई कोर्ट ने प्रतिज्ञापत्र में आश्वस्त किया गया है कि शहरी विकास विभाग मेंशन हेरिटेज के अनुसार फिर से शुरू किया जाएगा, लेकिन म्हाडा ने इस हलफनामे के विपरीत भूमिका निभाई है।

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32.03 करोड़ की अनुमानित लागत...
विदित हो कि म्हाडा का कहना है कि इमारत को ध्वस्त किए बिना इसका पुनर्विकास करना असंभव है। जबकि शहरी विकास विभाग का कहना है कि विस्तार हवेली के निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्रियों का उपयोग करके इमारत का पुनर्निर्माण किया जा सकता है। लेकिन इमारत के विध्वंस से इसका ऐतिहासिक महत्व नष्ट हो जाएगा। हालांकि म्हाडा के पास धन की कमी है, म्हाडा ने भवन की मरम्मत के लिए एक आर्किटेक्‍ट को काम पर रखा है। वहीं म्हाडा की रिपोर्ट के अनुसार इसमें करीब 32.03 करोड़ की अनुमानित लागत का खर्चा है। वहीं आईआईटी से मिली रिपोर्ट की माने तो यह कहना मुश्किल है कि अरबों रुपये की लागत से इमारत की मरम्मत होने के बावजूद यह कहना ठीक नहीं है कि इमारत कब तक स्थिर रह सकेगी।

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18 नवंबर को फिर सुनवाई की उम्मीद...
उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाई में उच्च न्यायालय ने म्हाडा को नगरपालिका के हलफनामे पर जवाब देने के लिए कहा था। वहीं इस मामले में 18 नवंबर को न्यायालय में एक और सुनवाई की उम्मीद है। बता दें कि इस इलाके में 100 से अधिक ऐसी धरोहर इमारतें हैं। वहीं म्हाडा की माने तो अगर म्हाडा एक इमारत पर 32 करोड़ रुपये खर्च करता है तो प्रत्येक इमारत पर उतनी ही राशि लगेगी, जबकि म्हाडा की तिजोरी पर अधिकाधिक भार पड़ेगा। इसके अलावा यह भी बताया गया है कि भवनों के लिए म्हाडा का मरम्मत बोर्ड 2 करोड़ रुपये तक प्रदान कर सकता है।

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