
शिवसेना के 40, ठाकरे गुट के 14 विधायकों को नोटिस
Shiv Sena MLA Disqualification: महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर (Rahul Narvekar) ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना के 40 और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 14 विधायकों को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही दोनों गुटों की अयोग्यता की याचिकाओं पर प्रक्रिया तेज हो गई है। विधायकों को अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन का समय दिया गया है।
शिवसेना विधायकों को अयोग्यता के खिलाफ कार्रवाई से बचने के लिए सभी दस्तावेज व अन्य सबूत जमा करने होंगे। बता दें कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस और एनसीपी के साथ हाथ मिलाने के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना 2019 में बीजेपी से अलग हो गई थी। तीनों दलों ने महाविकास आघाडी (एमवीए) सरकार का गठन किया था। जिसके बाद पिछले साल जून में शिवसेना में फूट के बाद शिंदे ने बीजेपी से हाथ मिला लिया था और मुख्यमंत्री बन गए थे। लंबी सुनाई के बाद चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना के तौर पर मान्यता दे दी। यह भी पढ़े-महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र 17 जुलाई से, शिंदे सरकार के कैबिनेट विस्तार पर सस्पेंस कायम
हाल ही में महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि सीएम शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को ‘शिवसेना’ का नाम और निशान देने का चुनाव आयोग का फैसला पहले प्रभावी माना नहीं जायेगा। मीडियाकर्मियों से बात करते हुए स्पीकर नार्वेकर ने कहा था कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित 16 विधायकों की अयोग्यता पर निर्णय इस बिंदु पर शुरू होगा कि जुलाई 2022 में कौन सा गुट वास्तविक शिवसेना का प्रतिनिधित्व कर रहा था।
नार्वेकर का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई के अपने फैसले में कहा कि भरत गोगावाले की चीफ व्हिप (शिवसेना का) के रूप में नियुक्ति अवैध है। विधानसभाध्यक्ष ने कहा था, गोगावाले को पार्टी का चीफ व्हिप फिर से बनाया जा सकता है यदि शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार उचित प्रक्रिया का पालन किया जाता है और राजनीतिक दल उन्हें फिर से नामित करता है। कोर्ट ने स्पीकर को चीफ व्हिप के रूप में पुन: नियुक्त करने से प्रतिबंधित नहीं किया है।
बता दें कि जून 2022 में शिवसेना में बगावत के बाद महाराष्ट्र में महाविकास आघाडी (एमवीए) सरकार गिर गई रही। सरकार के गिरने का कारण शिवसेना में टकराव था, लेकिन अपने फैसले में देश की शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को बहाल नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्होंने विश्वास मत का सामना किए बिना इस्तीफा दे दिया था।
इस दौरान मुख्यमंत्री शिंदे सहित शिवसेना के 16 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वें दलबदल विरोधी कानून के तहत विधायकों की अयोग्यता की याचिकाओं पर फैसला नहीं सुना सकते है, यह अधिकार विधानसभा स्पीकर के पास है, इसलिए राहुल नार्वेकर को अयोग्यता के लंबित मामले पर ‘उचित अवधि’ में फैसला लेना चाहिए।
एमवीए सरकार में शिंदे कैबिनेट मंत्री थे। जून 2022 में शिंदे और 39 अन्य शिवसेना विधायकों ने पार्टी के नेतृत्व यानी उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर दी जिससे शिवसेना के दो फाड़ हो गई। हाल के चुनावों को शिंदे और ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अलग-अलग पार्टी के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें अभी विधानसभा में अलग से मान्यता नहीं मिली है। जबकि चुनाव आयोग ने इस साल फरवरी में शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को ‘शिवसेना’ नाम और उसका चुनाव चिन्ह ‘धनुष और बाण’ आवंटित किया था।
Published on:
08 Jul 2023 12:41 pm
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