
(मुंबई): शिवसेना की परंपरागत दशहरा रैली पर जहां देश की सभी विपक्षी पार्टियों की नजर रही, वहीं शिवसेना के भाषण के बाद से विरोधी पक्ष भी आक्रामक हो गया है। महाराष्ट्र समेत केंद्र की राजनीति में खुद को पाक-साफ बताने वाली शिवसेना पर कांग्रेस और एनसीपी शुक्रवार को हमलावर होती दिखीं। दोनों ही पार्टियों ने शिवसेना पर आरोप लगाया कि वह केंद्र समेत महाराष्ट्र में भी बीजेपी की सहयोगी पार्टी है, फिर भी शिवसेना सिर्फ सभाओं के मंडपों में ही बीजेपी को आड़े हाथों लेती है, जबकि मंत्रिमंडल से उसे अधिक लगाव है। इसके अलावा कांग्रेस और एनसीपी की मानें तो केंद्र के बीजेपी समेत शिवसेना को अब अहसास हो जाना चाहिए कि उनके चार साल के कार्यकाल से देश की आवाम पूरी तरह से हताश और परेशान है, जिसने अब सत्ता परिवर्तन के लिए कमर कस ली है।
मंदिर निर्माण का चुनावी झुनझुना थमा रहीं सरकारें : सचिन सावंत
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सचिन सावंत आगे कहते हैं कि चुनाव नजदीक आते ही हिंदुत्व के मुद्दे को भुनाने के लिए हमेशा आगे रहने वाली बीजेपी समेत उसकी सहयोगी पार्टियों को राम मंदिर निर्माण की याद सताने लगती है, जबकि इसके उलट सत्ता में रहने के बावजूद आवाम को वह सिर्फ जुमले पर जुमला ही देती दिखती है।
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के अयोध्या जाने को लेकर कांग्रेस ने कहा कि यूपी में तो शिवसेना का कोई जनाधार ही नहीं है, फिर भी वो जनता को रोजगार, महिला उत्पीड़न, किसान, आरक्षण जैसे जरूरी मुद्दों से गुमराह करते हुए अब राम मंदिर निर्माण का चुनावी झुनझुना थमा रही है।
देश की कुंडली पर विराजमान हैं शनि और मंगल...
वहीं शिवसेना की रणनीति को लेकर एनसीपी भी शिवसेना नेता संजय राउत के बयान पर हमलावर होती नजर आई। शिवसेना ने अपनी रैली में देश के पीएम नरेंद्र मोदी को शनि तो भाजपा अध्यक्ष को मंगल की उपाधि से नवाजा है। एनसीपी नेता नवाब मालिक बताते हैं कि उध्दव ठाकरे के अनुसार, देश की कुंडली पर आज शनि और मंगल विराजमान हैं। इतना ही नहीं शिवसेना नेता संजय राउत ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को भड़वों की सरकार तक कह डाला। इस लिहाज से सवाल खड़ा हो गया है कि जब दोनों एक-दूसरे को गालियां दे रहे हैं। अब देखना होगा कि ऐसे में भाजपा शिवसेना को हटाएगी या लाख गाली खाकर साथ रहेगी। यह सोचने वाली बात है।
आवाम का ध्यान भटकाने का काम कर रहीं सरकारें
वहीं सावंत आगे कहते हैं कि शिवसेना हो या भाजपा दोनों ही पार्टियों को देश की जनता से कोई लेनादेना नहीं है। ये दोनों ही हमेशा अपने हित की बात करते हैं, जबकि इन राजनीतिक पार्टियों को जनता की मूल जरूरतों से कोई सरोकार नहीं है। इनके अलावा मालिक ने बताया कि राम मंदिर के निर्माण की बात करने वाले उध्दव ठाकरे और आरआरएस चीफ मोहन भागवत देश की सर्वोच्च न्यायपालिका सुप्रीम कोर्ट पर अविश्वास जाता रहे हैं। ये सब चुनाव आते ही राम मंदिर को लेकर आवाम का ध्यान भटकाने का काम करते हैं।
मीटू के लिए ठोस कानून की कवायद...
बता दें कि मीटू के लेकर शिवसेना ने महिलाओं से अपील की थी कि उन्हें समय का इंतजार किए बगैर ही उसी समय सामने वाले को जोरदार थप्पड़ जड़ देना चाहिए। इस पर कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत के कहना है कि मीटू जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकारों को ठोस कदम उठाना चाहिए। इस तरह के उत्पीड़न का शिकार शहरों से ज्यादा गांवों की महिलाएं ज्यादा हो रही हैं। गांव में तो सामाजिक दबाव और गरीबी के चलते महिलाएं अपने ऊपर हुए अत्याचार को लेकर सामने वाले दरिंदे के खिलाफ अपनी आवाज तक नहीं उठा पातीं। वहीं एनसीपी के नवाब मालिक का कहना है कि मीटू जैसे महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़े अभियान को सत्ता ले भूखे राजनीतिज्ञ कमजोर करने में लगे हैं। इसके लिए अब देश की आवाम को किसी ठोस और निर्णायक कानून की जरूरत है।
जनसभा पर थी देश भर की नजर...
विदित हो कि गुरुवार देर शाम मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में शिवसेना की बरसों से चली आ रही दशहरा रैली का आयोजन किया गया था, जिसमें सेना चीफ उद्धव ठाकरे समेत संजय राउत, रामदास कदम जैसे कई बड़े नेताओं ने शिरकत की थी।
Published on:
19 Oct 2018 06:51 pm
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