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लालबागचा राजा मंडल पर भड़की राज ठाकरे की मनसे, कहा- गणपति में बस गरबा खेलना बाकी, अनंत अंबानी क्या बताते हैं?

MNS on Lalbaugcha Raja: गणेशोत्सव महाराष्ट्र की मिट्टी और मराठी लोगों का त्योहार है। क्या अब हमें गणेश उत्सव में सिर्फ गरबा देखना बाकी रह गया है? हमारे मराठी त्योहारों को गुजराती कंपनियों के हाथों में क्यों दिया जा रहा है? अगर ऐसा ही चलता रहा तो 50 साल बाद लालबागचा राजा और चिंतामणी जैसे प्रतिष्ठित गणपति केवल उद्योगपतियों के नाम से जाने जाएंगे।"
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मुंबई

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Dinesh Dubey

Aug 26, 2026

MNS on Lalbaugcha Raja

लालबागचा राजा मंडल पर राज ठाकरे की मनसे ने साधा निशाना (Photo: X/IANS)

Ganeshotsav 2026: मुंबई के प्रसिद्ध गणेशोत्सव को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता संदीप देशपांडे ने बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई का गणेशोत्सव धीरे-धीरे कॉरपोरेट संस्कृति का हिस्सा बनता जा रहा है। देशपांडे ने सवाल किया कि क्या महाराष्ट्र का पारंपरिक गणेशोत्सव अब उद्योगपतियों और बड़ी कंपनियों के हाथों में सौंपा जाएगा?

बुधवार को मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुंबई मनसे अध्यक्ष संदीप देशपांडे ने विशेष रूप से लालबागचा राजा गणेश मंडल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव महाराष्ट्र की मिट्टी और मराठी समाज की परंपरा से जुड़ा त्योहार है, लेकिन अब इसमें कॉरपोरेट हस्तक्षेप बढ़ता जा रहा है। क्या अब हमें गणेश उत्सव में सिर्फ गरबा देखना बाकी रह गया है? हमारे मराठी त्योहारों को गुजराती कंपनियों के हाथों में क्यों दिया जा रहा है? अगर ऐसा ही चलता रहा तो 50 साल बाद लालबागचा राजा और चिंतामणी जैसे प्रतिष्ठित गणपति केवल उद्योगपतियों के नाम से जाने जाएंगे।"

‘अनंत अंबानी कौन सी सलाह देते हैं?’

संदीप देशपांडे ने कहा कि गणेशोत्सव भव्य तरीके से मनाने के लिए पैसे की जरूरत होती है, लेकिन बड़े गणेश मंडलों को श्रद्धालुओं से करोड़ों रुपये का दान मिलता है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि गणेशोत्सव के आयोजन में बड़े उद्योगपतियों की जरूरत क्यों पड़ रही है।

उन्होंने अनंत अंबानी को लालबागचा राजा मंडल से जोड़ने पर भी सवाल उठाया। देशपांडे ने कहा कि लालबाग के राजा को करोड़ों रुपये का चंदा श्रद्धालु खुद देते हैं, फिर भी मंडल को उद्योगपतियों के सहारे की क्या जरूरत है? अनंत अंबानी ऐसा कौन सा बड़ा ज्ञान या सलाह देते हैं, जो इतने वर्षों तक मंडल के पास नहीं था? क्या गणेशोत्सव मंडल को कोई कंपनी बनाना है, जिसके लिए अंबानी को सलाहकार नियुक्त किया गया है?

‘आज अंबानी आए हैं, कल अडानी... ये मार्केटिंग का जरिया है क्या?’

मनसे नेता ने कहा कि आज अंबानी आए हैं, उन्हें देखकर अडानी आए हैं, कल JSW और गोदरेज आएंगे। क्या गणेश मंडलों को कॉर्पोरेट प्रतिस्पर्धा का मैदान बनाया जा रहा है? उद्योगपति अपने व्यावसायिक हितों को ध्यान में रखकर काम करते हैं और ऐसे में धार्मिक उत्सवों को मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया, “गणपति क्या मार्केटिंग की जगह है? क्या हमारे भगवान गणपति का इस्तेमाल मार्केटिंग के लिए किया जाएगा?”

देशपांडे ने कहा कि उन्हें इस तरह के बदलाव पर आपत्ति है और सभी मराठी गणेशोत्सव मंडलों को इस विषय पर आत्ममंथन करना चाहिए कि वे जिस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, वह सही है या नहीं।

‘50 साल बाद गणपति उद्योगपतियों के नाम से पहचाने जाएंगे?’

संदीप देशपांडे ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर गणेशोत्सव में कॉरपोरेट कंपनियों का प्रभाव इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में स्थिति अलग हो सकती है। उन्होंने कहा कि आज लालबागचा राजा और चिंतामणि जैसे गणपति अपने पारंपरिक नामों और श्रद्धा के लिए पहचाने जाते हैं, लेकिन अगर कॉरपोरेट दखल बढ़ता गया तो 50 साल बाद कहीं इन गणेशोत्सव मंडलों की पहचान उद्योगपतियों के नाम से न होने लगे।

लालबागचा राजा मंडल के पदाधिकारी पर भी साधा निशाना

देशपांडे ने लालबागचा राजा मंडल के मानद सचिव सुधीर सालवी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सालवी उनके अच्छे मित्र हैं, लेकिन गणेशोत्सव से जुड़े इस मामले में उनकी भूमिका से वह सहमत नहीं हैं। मनसे नेता ने कहा कि गणेशोत्सव महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा त्योहार है और इसे केवल व्यवसाय या ब्रांडिंग के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

‘मराठी त्योहार बड़ी कंपनियों के हाथ में क्यों?’

देशपांडे ने अपने बयान में यह भी सवाल उठाया कि क्या महाराष्ट्र के पारंपरिक त्योहारों में बड़ी कंपनियों का बढ़ता प्रभाव उचित है। उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव को उसकी परंपरा, सामाजिक सहभागिता और धार्मिक भावना के साथ मनाया जाना चाहिए।

उनके बयान के बाद मुंबई के गणेशोत्सव मंडलों में कॉरपोरेट भागीदारी और बड़े उद्योगपतियों की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।