
Mumbai News : 15-15 दिन के अंतर पर होंगे कोरोना रोधी वैक्सीन के दो परीक्षण
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
पुणे. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और भारत बायोटेक के सहयोग में बनाई गई कोरोना रोधी कोवैक्सीन अचानक विश्व पटल में सुर्खियों में आ गई है। जानवरों के पर किए गए परीक्षण में सफल रही भारत की स्वदेशी वैक्सीन (बीबीवी-152) आत्मनिर्भर भारत की पहचान बन सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार 80 दिन पहले चीन के वुहान शहर से केरल आई एक युवती में पहला वायरस मिला था। उसी वायरस स्ट्रेन से दिन-रात मेहनत कर यह वैक्सीन तैयार की गई है। वायरस का स्ट्रेन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी), पुणे ने अलग किया था। आईसीएमआर ने वही स्ट्रेन भारत बायोटेक को दिया था।
मिली जानकारी अनुसार देश की 12 टेंस्टिंग संस्थाएं सात जुलाई से वैक्सीन का इंसानी ट्रायल शुरू करेंगी। एनआईवी की निदेशक टॉ. प्रिया अब्राहम ने कहा कि 15-15 दिन के अंतर से दो परीक्षण किए जाएंगे। एम्स, दिल्ली के सामुदायिक मेडिसिन विभाग के डॉ. संजय कुमार राय ने कहा कि दोनों परीक्षण के आंकड़े अलग रखे जाएंगे। इनके विश्लेषण से पता चलेगा कि वैक्सीन कितनी कारगर है।
आठ तरह के वायरस
वैज्ञानिकों के मुताबिक 30 जनवरी से 2 मई के बीच देश में 8 तरह के वायरस मिले। लेकिन, इसके बाद से 90 फीसदी मरीजों में ए2ए और ए3आई वायरस ही मिले हैं। इन दोनों वायरस के स्वरूप में ज्यादा बदलाव नहीं आया। इसके चलते वैज्ञानिकों को कोरोना की तोड़ निकालने में आसानी हुई।
कोरोना योद्धाओं को प्राथमिकता
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वैक्सीन हर किसी को तत्काल नहीं मिलेगी। इसके प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं। सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मचारियों, फिर पुलिस जवान और आपदा प्रबंधन में जुटे कर्मचारियों यानी कोरोना योद्धाओं को दी जाएगी। दुष्प्रभाव न मिलने पर इसे किस आयु वर्ग को पहले देना है और किसे नहीं, यह तय किया जाएगा।
Updated on:
05 Jul 2020 02:26 pm
Published on:
05 Jul 2020 02:12 pm
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