
Mumbai News Live : गलियों मेें बाजार, जहां सुई से सोना सबकुछ बिकता है
विजय यादव
मुंबई. छोटी-छोटी गलियां और इन गलियों मे छोटी-छोटी दुकानें। शाम के समय जहां पैदल चलना दूभर हो जाए। शोर-गुल इतना कि, जैसे मेला लगा हो। कांदिवली पूर्व मे जहां ऐसा नजारा दिखे बस आप समझ जाईये कि, क्रांति नगर मार्केट में पहुंच गए हैं। स्लम बस्ती के बीच इस मार्केट में सुई से लेकर सोना तक वाजिब व होलसेल Patrika .com/banswara-news/gold-and-silver-prices-in-banswara-mandi-rate-in-banswara-5389427/" target="_blank">भाव से मिल जाएगा।
क्रांति नगर बस्ती करीब 1950 के दशक में अस्तित्व में आई। शुरुआती दिनों मे यहां आदिवासी और मराठी मूल के लोग निवास करते थे, धीरे-धीरे प्रवासी हिंदी भाषियों का आना शुरु हुआ और आज देश के हर कोने का व्यक्ति यहां की गलियों मे मिल जाएगा। विविधताओं से भरे इस देश में अनेकता में एकता की मिसाल है क्रांति नगर।
क्रांति नगर कांदिवली पूर्व का एक स्लम इलाका है। शौचालय, रास्ते जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभी तक अभाव है, लेकिन बाजार की बात करें तो यह पूरे क्षेत्र में अपना प्रथम स्थान रखता है। क्रांति नगर-गोकुल नगर-दुर्गा नगर व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष श्याम बचन गिरी के अनुसार यहां की कुल 1,250 दुकानों में तकरीबन 700 दुकानें गलियों में हैं। साढ़े पांच सौ व्यवसायिक प्रतिष्ठान फ्रंट पर हैं।
इन दुकानों में जरूरत का सभी सामान मिल जाएगा। बच्चों के लिए फैंसी परिधान, रसोई के लिए अनाज, मसाले, सब्जी, सौंदर्य प्रसाधन, ज्वेलरी के साथ-साथ चटपटी चाट-पकौड़ा भी उपलब्ध है।
मिनी इंडिया है क्रांति नगर
एसोसिएशन के अध्यक्ष श्याम बचन गिरी बताते हैं कि, क्रांति नगर मिनी इंडिया है। यहां हर भाषा, समाज और पंथ के लोग एक साथ मिलकर रहते हैं। एसोसिएशन यहां सिर्फ व्यापार ही नहीं करता बल्कि होली, दशहर, दीपावली , गणेशोत्सव, छठ, ईद जैसे त्योहार भी मिलजुलकर मनाते हैं।
क्रांति नगर बाजार के खरीदार सिर्फ इस बस्ती के लोग नहीं हैं, बल्कि लोखंडवाला, हनुमान नगर, कुरार आदि स्थानों से बड़ी संख्या में ग्राहक आते हैं। यहां शाम को सब्जी की बड़ी मण्डी लगती है। नासिक से यहां सीधे सब्जी आती है। यही वजह की क्रांति मार्केट की सब्जी सबसे ताजी और सस्ती होती है। इस बाजार ने अपना कारोबार बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध करा रहा है। दुकानों के आलावा यहां इमिटेशन ज्वेलरी के भी बड़ी संख्या में व्यापारी हैं जो, उसे बनाने का काम गृहिणियों को देते हैं। इससे घर मे ही वह कुछ आय कर लेती हैं।
प्रमुख कारोबारी
ऐसे तो यहां हर भाषा, समाज के लोग करोबार से जुड़े है, लेकिन राजस्थानी समाज का वर्चस्व सबसे ज्यादा है। करीब 90 प्रतिशत व्यापारी राजस्थानी हैं। इनमे सावंत सिंह भूरसिंह सिसोदिया, देवी सिंह चौहान, भरत चौधरी, सुशील जैन, मुकेश सुराना आदि हैं। सावंत सिंह सिसोदिया क्रांति नगर व्यापारी एसोसिएशन के सेक्रेटरी भी हैं।
Updated on:
09 Dec 2019 11:57 pm
Published on:
09 Dec 2019 11:49 pm
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