
मुंबई के सातों जलाशयों में बचा सिर्फ 15% पानी, बीएमसी की बढ़ी चिंता (Patrika Photo)
मुंबईकरों के लिए आने वाला समय अल नीनो (El Nino) संकट के चलते मुश्किल भरा हो सकता है। केरल में मानसून ने दस्तक जरूर दे दी है, लेकिन भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का अनुमान है कि इस साल देश में औसत की तुलना में केवल 90 प्रतिशत ही बारिश होगी। इस कम बारिश के पूर्वानुमान ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के सामने साल 2027 की गर्मियों तक शहर के लिए पर्याप्त पीने का पानी बचाकर रखने की एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
मुंबई शहर को पानी की आपूर्ति करने वाले सात प्रमुख जलाशयों की कुल क्षमता 14.47 लाख करोड़ लीटर है। अमूमन जून से सितंबर के दौरान मानसून में ये तालाब पूरी तरह भर जाते हैं, जिससे शहर को रोजाना करीब 3,950 मिलियन लीटर (MLD) पानी मिलता है। यदि इस बार मानसून कमजोर रहा और कम बारिश हुई तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए जल संकट का खतरा गहरा सकता है।
मुंबई को अपर वैतरणा, मोडक सागर, तानसा, मध्य वैतरणा, भातसा, विहार और तुलशी जलाशयों से पेयजल आपूर्ति की जाती है। इन सातों जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता लगभग 14.47 लाख करोड़ लीटर पानी है। हर वर्ष जून से सितंबर के बीच मानसून के दौरान ये जलाशय भर जाते हैं और इन्हीं से पूरे साल मुंबई को प्रतिदिन लगभग 3,950 मिलियन लीटर (MLD) पेयजल उपलब्ध कराया जाता है।
हालांकि, ताजा आंकड़ों के अनुसार मंगलवार तक इन जलाशयों में कुल जल भंडार उनकी क्षमता के केवल 15 प्रतिशत तक रह गया है। अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान उपलब्ध जल भंडार से शहर को केवल 45 दिनों तक ही पानी की आपूर्ति हो सकेगी।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस वर्ष एल नीनो का प्रभाव काफी मजबूत रहने की संभावना है। इसका असर मानसून की गति और बारिश की मात्रा दोनों पर पड़ सकता है। आमतौर पर केरल में मानसून 1 जून के आसपास दस्तक देता है, लेकिन इस बार इसके आगमन में 4 दिन की देरी हुई है।
यदि मुंबई और उसके जलग्रहण क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो जलाशयों में अपेक्षित जल संग्रह नहीं हो पाएगा, जिससे आने वाले महीनों में बड़ा जल संकट खड़ा हो सकता है।
यदि मानसून कमजोर रहा तो सितंबर के बाद आने वाली 'अक्टूबर हीट' स्थिति को और गंभीर बना सकती है। गर्मी बढ़ने से जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से घट सकता है, जिससे अगले मानसून तक शहर की जल आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
मुंबई के पास फिलहाल पेयजल का कोई बड़ा वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि शहर की लगभग पूरी आबादी मानसून और इन सात जलाशयों पर निर्भर रहती है।
मानसून की अनिश्चितता के चलते संभावित जल संकट से निपटने के लिए बीएमसी ने पहले ही कई एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। 15 मई से पूरे शहर में 10 प्रतिशत जल कटौती लागू की गई है। साथ ही पानी के टैंकरों की संख्या बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। टैंकर माफियाओं पर नकेल कसने और पानी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। साथ ही नागरिकों से पानी का सीमित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने की अपील की गई है। जल संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारी जलाशयों की स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।
मुंबई में मानसून आमतौर पर 10 जून तक पहुंचता है। इसके बाद अगर मानसून के शुरुआती दो महीनों में यानी जून और जुलाई में अच्छी बारिश होती है, तो स्थिति काफी हद तक सामान्य हो सकती है। लेकिन यदि बारिश उम्मीद से कम रही, तो मुंबई को आने वाले महीनों में जल कटौती का सामना करना पड़ सकता है। बीएमसी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और किसी भीपरिस्थिति से निपटने के लिए प्रशासन तैयार है।
Updated on:
04 Jun 2026 05:27 pm
Published on:
04 Jun 2026 05:23 pm
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